दोनों हाथ नहीं, फिर भी थी तीरंदाज बनने की ललक, जानिए शीतल दवी की कहानी

इंसान के मन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना से वो हर चुनौती को पार कर अपनी मंजिल तक पहुंच ही जाता है। इंसान की जिद के सामने हर मुश्किल को सर झुकाना ही पड़ता है।

किसी ने सही कहा है कि यदि किसी को कुछ करना होता है तो उसकी जिंदगी में अगर-मगर जैसे सवालों के लिए कोई जगह नहीं होती है। इंसान के मन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना से वो हर चुनौती को पार कर अपनी मंजिल तक पहुंच ही जाता है। इंसान की जिद के सामने हर मुश्किल को सर झुकाना ही पड़ता है। एक ऐसी ही सच्ची कहानी हम आज आपके सामने ला रहे हैं, जिसके हाथ ना होने के बाद भी उसने तीरंदाजी जैसे स्पोर्ट को चुना और आज वो उस जगह पर है, जहां पर होना चाहिए।

शीतल देवी आज हम सब की प्रेरणा

जी हां, दरअसल हम जम्मू कश्मीर की 16 वर्षीय महिला तीरंदाज शीतल देवी की बात कर रहे हैं। शीतल देवी वर्तमान समय समय में दुनिया की एकमात्र ऐसी महिला तीरंदाज हैं, जिनके हाथ ना हो। फिलहाल अब शीतल देवी वर्ल्ड पैरा आर्चरी चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंच गई हैं। फाइनल में पहुंचने के लिए शीतल ने अपने ही देश की सरिता को हराकर जगह बनाई है। ये आयोजन चेक रिपब्लिक के पिल्सेन में हो रहा है। उन्होंने सरिता को 137-133 के स्कोर से हराकर फाइनल में प्रवेश किया है।

कौन हैं शीतल? 

शीतल देवी की इस वक्त उम्र मजह 16 साल है। वो जम्मू-कश्मीर के लोही धार गांव की रहने वाली बताई जा रही हैं। शीतल ने तीरंदाजी के लिए माता वैष्णो देवी तीरंदाजी अकादमी से ट्रेनिंग ली है। जैसा कि पहले ही बता चुके हैं शीतल के दोनों हाथ नहीं हैं। ऐसा उनके साथ जन्म से ही नहीं है। बावजूद इसके शीतल ने अपने आप को कभी भी वक्त के सामने कमजोर नहीं समझा। उन्होंने कभी भी अपनी हिम्मत नहीं हारी। तीरंदाजी के लिए उन्होंने 11 महीने पहले से ही ट्रेनिंग लेना स्टार्ट किया था।

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