सचिन तेंदुलकर और ब्रैड हॉग के बीच का विवाद क्रिकेट की दुनिया की उन कहानियों में से है, जो खेल को और भी और भी मनोरंजक बना देता है। यह घटना हमें यह भी सिखाती है कि आत्मविश्वास से दिया गया जवाब कितना प्रभावशाली हो सकता है। सचिन ने बल्ले से ही नहीं, अपने व्यवहार और शब्दों से भी साबित किया कि क्यों उन्हें क्रिकेट का भगवान कहा जाता है। सचिन को हम मास्टर ब्लास्टर के नाम से भी जानते है।
इस विवाद की शुरुआत कैसे हुई
वर्ष 2007-08 की बात है, जब भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वनडे सीरीज़ चल रही थी। उस समय में ऑस्ट्रेलिया की टीम दुनिया की सबसे मजबूत टीम मानी जाती थी। ऑस्ट्रेलिया के पास मैथ्यू हेडन,रिकी पोंटिंग, एडम गिलक्रिस्ट, शेन वॉटसन, ब्रेट ली, माइकल क्लार्क और एंड्रयू साइमंड्स जैसे खिलाड़ी उस वक्त के महान खिलाड़ी माने जाते थे।
दूसरी ओर भारत की टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी की रीढ़ माने जाते थे सचिन तेंदुलकर। इस सीरीज़ में ऑस्ट्रेलिया की ओर से लेफ्ट-आर्म स्पिनर ब्रैड हॉग भी उस मैच में खेल रहे थे। हॉग अपनी गेंदबाज़ी के साथ-साथ मैदान पर अपनी अक्रामक स्वभाव और मस्तीखोर स्वभाव के लिए भी जाने जाते थे।
जब मैच मे हॉग ने किया तेंदुलकर को आउट

इस ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ के एक मुकाबले में हॉग ने वह कर दिखाया जो शायद उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है। हॉग ने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का विकेट चटकाया। उस समय सचिन मैच में क्रीज पर जम रहे थे, लेकिन ब्रैड की एक बेहतरीन गेंद पर वह आउट हो गए उनके के लिए यह पल कभी ना भूलने वाला था।
क्रिकेट में हर गेंदबाज़ का सपना होता है कि वह सचिन जैसे दिग्गज बल्लेबाज़ का विकेट चटकाए। सचिन का विकेट लेना हॉग के लिए सबसे बड़ा लम्हा था।
क्या है पोस्ट कार्ड भेजने की कहानी
सचिन तेंदुलकर को आउट करने के बाद हॉग काफी खुश थे। उन्होंने उस पल को हमेशा के लिए यादगार बनाने के लिए के लिए एक अलग तरीका अपनाया।
सचिन के आउट होने की तस्वीर से ब्रैड हॉग ने एक पोस्टकार्ड तैयार किया और उस पोस्टकार्ड पर उन्होंने अपने हाथ से लिखा “बोल्ड, ब्रैड हॉग”। इसके साथ ही हॉग ने उस पर अपना ऑटोग्राफ भी कर दिया। इसके बाद हॉग ने वह पोस्टकार्ड तेंदुलकर को भेजा था, शायद वो यह कहना चाहते थे कि उन्होंने क्रिकेट के भगवान को आउट किया है।
सचिन ने ब्रैड हॉग को जवाब में क्या लिखा जो इतिहास बन गया
सचिन स्वभाव से बेहद शांत खिलाड़ी रहे हैं। मैदान पर वे कभी ज्यादा आक्रामक नहीं दिखते थे, लेकिन उनका बल्ला हमेशा जवाब देता था। सचिन ने हॉग के द्वारा भेजे गए पोस्टकार्ड को लिया और उस पर ने एक लाइन लिखी, “दिस वील नेवर हैपन अगेन” (ऐसा दोबारा नहीं होगा)। ऐसा लिखने के बाद सचिन ने अपने हस्ताक्षर किए और वही कार्ड वापस ब्रैड हॉग को भेज दिया।
सचिन और हॉग की कहानी को
इसे विवाद से ज्यादा एक मजेदार और प्रेरणादायक कहानी बोला जा सकता है। सचिन को आउट करने के बाद हॉग ने गर्व जताने के लिए पोस्टकार्ड भेज बैठे। और इस घटना के बाद से सचिन कभी ब्रैड हॉग के गेंद पर आउट नहीं हुए लेकिन सचिन तेंदुलकर का जवाब इतना दमदार और आत्मविश्वास से भरा हुआ था कि वह घटना क्रिकेट इतिहास में आज भी सुनी जाती है।
इस किस्से के बाद से जब भी लोग हॉग और तेंदुलकर का नाम लेते हैं तो ये मजेदार कहानी याद आती है। सचिन द्वारा लिखी गयी लाइन यह बताती है कि क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं है, बल्कि इसमें मान-सम्मान, आत्मविश्वास और मानसिक मज़बूती की भी बहुत बड़ी भूमिका होती है।
इस घटना के बाद ब्रैड हॉग की प्रतिक्रिया
इस किस्से की चर्चा जब मीडिया में हुई तो हॉग ने भी स्वीकार किया कि सचिन का जवाब उनके लिए याद करने लायक था। उन्होंने खुद कहा था कि, “मैंने सचिन को आउट किया, लेकिन उनका जवाब मुझे ज़िंदगी भर याद रहेगा। वह सिर्फ एक महान बल्लेबाज़ नहीं, बल्कि एक महान इंसान भी हैं।”
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