क्रिकेट की दुनिया में हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह अपने देश के लिए इंटरनेशनल मैच खेले और राष्ट्रीय जर्सी पहनकर मैदान में उतरे। इसके लिए सबसे अहम कदम घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करना होता है। आमतौर पर चयनकर्ता घरेलू क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ही इंटरनेशनल लेवल पर मौका देते हैं।
लेकिन क्रिकेट का इतिहास यह भी बताता है कि कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे हैं जिन्होंने घरेलू क्रिकेट में गजब का प्रदर्शन किया, रन और विकेटों के अंबार लगाए, फिर भी उन्हें अपने देश के लिए इंटरनेशनल डेब्यू का मौका नहीं मिल सका। इन खिलाड़ियों की गिनती उन बदकिस्मत नामों में होती है, जो सिर्फ घरेलू क्रिकेट तक ही सीमित रह गए। आइए जानते हैं ऐसे पांच खिलाड़ियों के बारे में।
ये 5 खिलाड़ी कभी नहीं खेल पाए इंटरनेशनल क्रिकेट
5. डॉन शेफर्ड – इंग्लैंड
इंग्लैंड के डॉन शेफर्ड उन खिलाड़ियों की लिस्ट में आते हैं, जिनका रिकॉर्ड देखकर हर कोई हैरान हो जाता है। वह एक मध्यम गति के तेज गेंदबाज थे और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 2218 विकेट चटकाए। यह आंकड़ा उन्हें घरेलू क्रिकेट का सबसे बड़ा गेंदबाज साबित करता है। इसके बावजूद उन्हें इंटरनेशनल लेवल पर इंग्लैंड के लिए एक भी मैच खेलने का अवसर नहीं मिला।
4. फ्रैंकलिन स्टीफेंसन – वेस्टइंडीज
वेस्टइंडीज के फ्रैंकलिन स्टीफेंसन एक शानदार ऑलराउंडर थे। वह न सिर्फ मध्यक्रम में विस्फोटक बल्लेबाजी करते थे, बल्कि गेंदबाजी में भी खतरनाक साबित होते थे। क्रिकेट इतिहास में माना जाता है कि धीमी गति की गेंद (स्लो डिलीवरी) का इस्तेमाल सबसे पहले उन्होंने ही किया। अपने करियर में उन्होंने फर्स्ट क्लास और लिस्ट ए मैच मिलाकर 13 हजार से ज्यादा रन बनाए और 1240 विकेट चटकाए। इसके बावजूद उन्हें वेस्टइंडीज की टीम में जगह नहीं मिली।
3. रजिंदर गोएल – भारत
भारत के रजिंदर गोएल रणजी ट्रॉफी इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज माने जाते हैं। बाएं हाथ के इस स्पिनर ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में खेले 157 मैचों में 750 विकेट अपने नाम किए। उन्होंने हरियाणा के लिए लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन उनका कभी भारतीय टीम में चयन नहीं हो सका। आज भी उन्हें भारत का सबसे बदकिस्मत गेंदबाज कहा जाता है।
2. जेमी कॉक्स – ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया के जेमी कॉक्स घरेलू क्रिकेट में लंबे समय तक खेले और लगातार रन बनाए, लेकिन कभी इंटरनेशनल स्तर तक नहीं पहुंच पाए। उन्होंने 1987 से 2005 तक का करियर खेला और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 51 शतक जड़े। उनके नाम 18 हजार से ज्यादा रन दर्ज हैं। इतना शानदार रिकॉर्ड होने के बावजूद उन्हें ऑस्ट्रेलिया टीम में जगह नहीं मिल पाई।
1. अमोल मजूमदार – भारत
मुंबई के अमोल मजूमदार भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े बदकिस्मत बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। अपने फर्स्ट क्लास डेब्यू मैच में ही उन्होंने 260 रनों की शानदार पारी खेली थी। अपने करियर में उन्होंने 48 की औसत से 11 हजार से ज्यादा रन बनाए और 30 शतक भी जड़े। लेकिन भारतीय टीम का मध्यक्रम उस दौर में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और सौरव गांगुली जैसे दिग्गज बल्लेबाजों से भरा हुआ था। इसी कारण उन्हें कभी इंटरनेशनल क्रिकेट में खेलने का मौका नहीं मिला।
क्रिकेट में किस्मत का खेल भी अहम होता है। कई बार खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद इंटरनेशनल लेवल तक नहीं पहुंच पाते। जेमी कॉक्स, रजिंदर गोएल, डॉन शेफर्ड, फ्रैंकलिन स्टीफेंसन और अमोल मजूमदार जैसे नाम इस बात के गवाह हैं कि सिर्फ टैलेंट ही काफी नहीं होता, बल्कि समय, अवसर और टीम की जरूरत भी खिलाड़ी के करियर को आकार देते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: जेमी कॉक्स ने घरेलू क्रिकेट में कितने रन बनाए?
उत्तर: जेमी कॉक्स ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 18 हजार से ज्यादा रन बनाए।
प्रश्न 2: रणजी ट्रॉफी इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट किसके नाम हैं?
उत्तर: भारत के रजिंदर गोएल रणजी ट्रॉफी इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं।
प्रश्न 3: डॉन शेफर्ड का फर्स्ट क्लास करियर कितना लंबा रहा?
उत्तर: डॉन शेफर्ड ने लंबे करियर में 2218 विकेट चटकाए और घरेलू क्रिकेट में धाक जमाई।
प्रश्न 4: फ्रैंकलिन स्टीफेंसन को क्यों खास माना जाता है?
उत्तर: क्योंकि माना जाता है कि क्रिकेट में धीमी गति की गेंद (स्लो डिलीवरी) का इस्तेमाल सबसे पहले उन्होंने किया था।
प्रश्न 5: अमोल मजूमदार भारत के लिए क्यों नहीं खेल पाए?
उत्तर: क्योंकि उनके करियर के दौरान भारत का मध्यक्रम पहले से ही दिग्गज बल्लेबाजों से भरा हुआ था।
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