जब भारत की झोली में पहली बार आया गोल्ड

जितनी हमारे देश की आबादी है और जिस तरह की प्रतिभा यहां पर मौजूद है, उसके हिसाब से ओलंपिक में हमारा प्रदर्शन नहीं होता है। इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि आखिर दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश की झोली में ओलंपिक जैसे अहम इवेंट में पदक उस हिसाब क्यों नहीं आ पाते जितने आने चाहिए। 

खेल की दुनिया में ओलंपिक को सबसे बड़ा आयोजन माना जाता है। इस इवेंट में भाग लेना और यहां से अपने देश की झोली में पदक डालना किसी भी खिलाड़ी का सपना और उस देश के लिए भी ये गर्व का पल होता है। ओलंपिक में पूरी दुनिया के खिलाड़ी प्रतिभाग करते हुए दिखाई देते हैं। अगर बात करें हमारे देश भारत की तो हम भी बहुत पहले से इसमें भाग ले रहे हैं, लेकिन जितनी हमारे देश की आबादी है और जिस तरह की प्रतिभा यहां पर मौजूद है, उसके हिसाब से ओलंपिक में हमारा प्रदर्शन नहीं होता है। इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि आखिर दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश की झोली में ओलंपिक जैसे अहम इवेंट में पदक उस हिसाब क्यों नहीं आ पाते जितने आने चाहिए।

पूरी तरह से ये कहना भी गलत होगा कि वर्तमान समय में भारत हर खेल में पीछे है। इस वक्त भारतीय टीम क्रिकेट में दुनिया की बेहतरीन टीम मानी जाती है। इसके अलावा भी कुछ खेल जैसे हॉकी, फुटबॉल, कुश्ती और बेडमिंटन जैसे खेल में भारत आगे बढ़ रहा है। इन सब के बाद भी अभी बहुत सारी कमी हमारी खेल नीतियों में देखने को मिलती हैं। ओलंपिक जैसे आयोजनों में खेले जाने वाले खेलों में भारत की खेल संस्थाओं और सरकार को कुछ दमदार फैसले लेने की जरुरत है। भारत ने हॉकी में आजादी से पहले भी प्रतिभाग किया था, लेकिन वक्त से साथ भारत अपने आप को इसके अनुरूप ढालने में असफल रहा। ये ही कारण है कि आज हमारा पड़ोसी देश चीन भारत की तुलना में ओलंपिक जैसे इवेंट्स में अपनी छाप छोड़ता है और भारत को एक दो पदक के साथ ही संतुष्ट होना पड़ता है। खैर ये तो रही बात भारत की ओलंपिक में वर्तमान स्थिति के बारे में। आइए अब भारत के ओलंपिक इतिहास पर एक नजर डालते हैं।

ओलंपिक में भारत का पहला गोल्ड मेडल 

ओलंपिक की शुरुआत साल 1896 में एथेंस के ग्रीस में हुई थी। यही वो स्थान है जहां पर पहली बार खेल के कुंभ कहे जाने वाले ओलंपिक का आयोजन हुआ। भारत ने पहली बार नॉर्मन प्रिचर्ड के रूप में साल 1900 में पहली बार ओलंपिक खेलों का प्रतिनिधत्व किया। इसके बाद साल 1920 में भारत का पहला दल ओलंपिक खेलों में गया। इसके ठीक आठ साल के बाद भारतीय हॉकी टीम ने एमस्टर्डम ओलंपिक में पहली बार अपना पदक जीता। उस वक्त भारत ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आता था। अगर बात करें आजादी के बाद सबसे पहले पदक जीतने की तो बता दें कि साल 1948 में लंदन ओलंपिक के दौरान हॉकी मैच में उन्हीं के देश इंग्लैंड को हराकर अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। मुख्य रूप से इसी को भारत का ओलंपिक में पहला गोल्ड मेडल माना जाता है।

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