श्रीलंका के नेगोंबो में क्रिकेट सुनते हुए बड़े हुए क्रिशन कलुगामगे (Crishan Kalugamage) आज इटली की जर्सी पहनकर टी20 वर्ल्ड कप 2026 खेल रहे हैं।
क्रिशन कलुगामगे (Crishan Kalugamage) दिन में इटली के टस्कनी क्षेत्र के लूक्का शहर में पिज्जा बनाते हैं और रात में अपने लेग स्पिन पर काम करते हैं, लेकिन उनकी असली पहचान अब सिर्फ एक पिज्जा शेफ की नहीं रही, बल्कि इटली की टी20 वर्ल्ड कप 2026 टीम के अहम खिलाड़ी की है।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 में जब इटली का राष्ट्रगान बजा, तो उनके लिए वह पल सिर्फ एक औपचारिक शुरुआत नहीं था, बल्कि एक लंबे सफर की मंजिल जैसा था। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि क्वालीफाई करने के बाद टीम के कुछ खिलाड़ी रो पड़े थे, क्योंकि वर्ल्ड कप खेलना उनका बचपन का सपना था। यह उनके लिए भावनात्मक भी था, क्योंकि टूर्नामेंट श्रीलंका और भारत में हो रहा है, जहां से उनकी जड़ें जुड़ी हैं।
नेगोंबो से इटली तक, एक अधूरा सपना

क्रिशन का बचपन श्रीलंका के नेगोंबो में बीता, जहां वे अपने दादा के साथ रेडियो पर क्रिकेट कमेंट्री सुनते थे और स्कूल के बाद दोस्तों के साथ खेलते थे। वे स्कूल की अंडर 13 और अंडर 15 टीम का हिस्सा भी रहे और तब तक उनका लक्ष्य साफ था कि उन्हें प्रोफेशनल क्रिकेटर बनना है।
लेकिन 2007 में जब उनके माता-पिता काम के लिए इटली चले गए और वे लगभग 16 साल के थे, तो उनके सामने नई संस्कृति और नई जिंदगी की चुनौती थी, लेकिन सबसे बड़ा झटका यह था कि इटली में क्रिकेट का कोई साफ रास्ता नहीं था।
नई जगह पर खुद को ढालना आसान नहीं था, इसलिए उन्होंने स्कूल में एथलेटिक्स में नाम लिखवाया और बाद में इटली में रहने वाले श्रीलंकाई समुदाय के साथ टेनिस बॉल क्रिकेट खेलना शुरू किया। धीरे-धीरे यही शौक क्लब क्रिकेट में बदल गया और लूक्का के छोटे क्लबों से खेलते हुए उन्होंने अपने खेल को जिंदा रखा।
रोम क्रिकेट क्लब से नई शुरुआत

2015-16 में उन्हें रोम क्रिकेट क्लब से मौका मिला, जो इटली के सबसे पुराने क्लबों में से एक है, और यहीं से उनके करियर को नई दिशा मिली। इस क्लब के साथ उनका रिश्ता लगभग एक दशक का हो चुका है और इसी दौरान उनका खेल निखरा।
एक समय ऐसा भी आया जब उनकी लंबाई बढ़ने के बाद उन्होंने सोचा कि उन्हें तेज गेंदबाज बनना चाहिए। उन्होंने इटली A टीम के लिए तेज गेंदबाज के रूप में भी खेला और 2019 में श्रीलंका के घरेलू क्लब कैंडी कस्टम्स के लिए भी तेज गेंदबाजी की, लेकिन लगातार चोटों ने उन्हें रोक दिया।
आखिरकार 2021 में उन्होंने फिर से लेग स्पिन पर लौटने का फैसला किया और यही फैसला उनके करियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। रोम क्रिकेट क्लब के संस्थापक प्रभात एकनेलिगोड़ा ने भी उन्हें समझाया कि लेग स्पिन ही उनकी असली ताकत है और उसी पर टिके रहना बेहतर होगा।
वॉर्न, हसरंगा और राशिद से प्रेरणा
बचपन में उनके हीरो अरविंदा डी सिल्वा और सनथ जयसूर्या थे, लेकिन लेग स्पिनर बनने के बाद उन्होंने शेन वॉर्न, वनिंदु हसरंगा और राशिद खान को ध्यान से देखना शुरू किया।
वर्ल्ड कप से पहले उन्होंने कोलंबो में श्रीलंका टीम के लिए नेट गेंदबाज के रूप में एक महीने से ज्यादा समय बिताया, क्योंकि इटली की सर्दियों में बाहर अभ्यास करना आसान नहीं होता। वहीं उनकी मुलाकात हसरंगा से हुई और उन्होंने गेंदबाजी को लेकर सलाह भी ली। दुबई में आयरलैंड के खिलाफ सीरीज के दौरान उनकी मुलाकात राशिद खान से भी हुई, जिन्होंने उन्हें गूगली पर कुछ टिप्स दिए।
उसी सीरीज में उन्होंने तीन मैचों में चार विकेट लिए और इटली की आयरलैंड पर पहली टी20 जीत में अहम भूमिका निभाई।
दिन में नौकरी, रात में क्रिकेट
क्रिकेट अब उनकी पहचान है, लेकिन अभी यह उनकी पूरी आजीविका नहीं है। वे लूक्का की ला वीटा पिज़्ज़ेरिया में सोमवार से शनिवार तक काम करते हैं और रविवार को सुबह जल्दी रोम ट्रेनिंग के लिए निकल जाते हैं। इसके बीच वे जिम और रनिंग से फिटनेस बनाए रखते हैं।
उन्होंने खुद कहा है कि कई नौकरियां उन्हें छोड़नी पड़ीं क्योंकि टूर्नामेंट के दौरान छुट्टी नहीं मिलती थी, लेकिन अब वे उम्मीद करते हैं कि भविष्य में क्रिकेट ही उनका मुख्य काम बन सके।
इटली के लिए एक विरासत छोड़ने का सपना

34 साल की उम्र में वर्ल्ड कप खेलना उनके लिए करियर का सबसे बड़ा मंच है, लेकिन वे इसे आखिरी मंजिल नहीं मानते। वे चाहते हैं कि इटली में क्रिकेट की जड़ें और मजबूत हों और आने वाली पीढ़ी को वह संघर्ष न करना पड़े जो उन्हें करना पड़ा।
टीम में वे उन कुछ खिलाड़ियों में से हैं जो इटालियन भाषा में धाराप्रवाह हैं और अक्सर अपने साथियों की मदद करते हैं। फुटबॉल के दीवाने देश में क्रिकेट को जगह दिलाना आसान नहीं है, लेकिन इटली के कुछ बड़े फुटबॉल नामों से मिले समर्थन ने टीम का हौसला बढ़ाया है।
क्रिशन कलुगामगे के लिए यह कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं है, बल्कि उस भरोसे की है जो उन्होंने सालों तक जिंदा रखा। पिज्जा बनाते हुए भी उन्होंने क्रिकेट का सपना छोड़ा नहीं और अब वही सपना उन्हें वर्ल्ड कप के मंच तक ले आया है।
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