Monday, February 2

Richa Ghosh To Be Honoured With Gold-Plated Bat And Ball By CAB After India’s World Cup Triumph: भारतीय महिला टीम की वर्ल्ड कप विजेता विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋचा घोष को क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) गोल्ड-प्लेटेड बैट और बॉल से सम्मानित करेगा। यह सम्मान उनके शानदार प्रदर्शन के लिए ईडन गार्डन्स में भव्य समारोह में दिया जाएगा।

वर्ल्ड कप हीरोइन ऋचा घोष को मिलेगा खास सम्मान

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की युवा स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋचा घोष को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) की ओर से गोल्ड-प्लेटेड बैट और बॉल से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें शनिवार को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में आयोजित होने वाले एक भव्य सम्मान समारोह में दिया जाएगा।

ऋचा ने हाल ही में हुए महिला वर्ल्ड कप 2025 में भारत की ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने आठ पारियों में 235 रन बनाए और 133.52 के स्ट्राइक रेट के साथ पूरे टूर्नामेंट की सबसे तेज गति से रन बनाने वाली बल्लेबाज रहीं।

गांगुली और झूलन के सिग्नेचर वाला गोल्ड बैट-बॉल

CAB की ओर से तैयार किया गया यह खास गोल्ड-प्लेटेड बैट और बॉल भारत के दो दिग्गज खिलाड़ियों सौरव गांगुली और झूलन गोस्वामी के सिग्नेचर से सजा होगा। यह सम्मान ऋचा को उनकी “असाधारण उपलब्धियों और भारतीय क्रिकेट में योगदान” के प्रतीक के रूप में दिया जाएगा।

CAB अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा, “ऋचा ने वर्ल्ड स्टेज पर अद्भुत प्रतिभा, संतुलन और जज्बा दिखाया है। गोल्ड बैट और बॉल उनके योगदान की सराहना का एक छोटा-सा प्रतीक है। वह बंगाल और पूरे भारत की हर युवा क्रिकेटर के लिए प्रेरणा हैं।”

फाइनल में दिखाया दम, रचा इतिहास

सिर्फ 22 साल की ऋचा घोष ने फाइनल मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 24 गेंदों पर 34 रन की तेज पारी खेली थी, जिससे भारत ने DY पाटिल स्टेडियम में 52 रनों से ऐतिहासिक जीत हासिल की। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में ऋचा ने 12 छक्के भी लगाए और डिएंड्रा डॉटिन के वर्ल्ड कप रिकॉर्ड की बराबरी भी की।

ऋचा घोष की प्रेरणादायक क्रिकेट यात्रा

सिलीगुड़ी में जन्मी ऋचा दूसरी ऐसी विकेटकीपर हैं, जिन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उनसे पहले वृद्धिमान साहा बंगाल से भारत के लिए खेले थे।

ऋचा ने कम उम्र से ही अपने खेल से सबका ध्यान खींचा। आठ साल की उम्र में उनका टैलेंट सामने आया और 12 साल की उम्र में उन्होंने बंगाल अंडर-19 टीम में जगह बना ली। उसी सीजन में वह अंडर-23 टीम में पहुंचीं और 13 साल की उम्र में सीनियर टीम के लिए डेब्यू किया।

उनके पिता मनबेंद्र घोष क्लब स्तर के क्रिकेटर और बाद में अंपायर बने। उन्होंने ही अपनी बेटी के क्रिकेटिंग करियर की नींव रखी।

झूलन के साथ ओपनिंग करने वाली ऋचा

शुरुआती दौर में ऋचा एक ऑलराउंडर के रूप में जानी जाती थीं। वह बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में ओपनिंग करती थीं और साथ ही विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी भी संभालती थीं। उन्होंने कई बार झूलन गोस्वामी के साथ नई गेंद साझा की थी।

आज उनके पास एक ऐसा करियर है जो किसी भी युवा खिलाड़ी को प्रेरित कर सकता है। महिला वर्ल्ड कप, अंडर-19 वर्ल्ड कप, वीमेंस प्रीमियर लीग (WPL) खिताब, एशियाई खेलों का गोल्ड मेडल और कॉमनवेल्थ गेम्स का सिल्वर मेडल, सब कुछ उनकी ट्रॉफी कैबिनेट में सजा है।

“नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा” – CAB का संदेश

CAB ने अपने बयान में कहा कि ऋचा की यह यात्रा अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है।

उन्होंने कहा, “सिलीगुड़ी से इंटरनेशनल स्टारडम तक का सफर यह दिखाता है कि दृढ़ निश्चय और मेहनत से हर सपना पूरा हो सकता है।”

CAB को उम्मीद है कि यह सम्मान समारोह बंगाल की नई पीढ़ी की लड़कियों को क्रिकेट अपनाने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेगा।

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Neetish Kumar Mishra Sports Digest Hindi में Editor के रूप में कार्यरत हैं और खेल पत्रकारिता में गहरा अनुभव रखते हैं। क्रिकेट, टेनिस, फुटबॉल और अन्य खेलों की बारीकियों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। नीतिश कुमार मिश्र अपने पेशेवर लेखन के जरिए पाठकों को न सिर्फ सटीक खबरें, बल्कि गहन विश्लेषण के माध्यम से खेलों को और करीब से समझने का मौका भी देते हैं।

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