Thursday, February 12

दक्षिण अफ्रीका ने पिछले कुछ समय में अपने टेस्ट में प्रदर्शन को सुधारा है। एक समय जब उन्होंने SA20 को प्राथमिकता देने के लिए उन खिलाड़ियों को न्यूज़ीलैंड भेजा था जो उस लीग में नहीं खेल रहे थे और उनके मुख्य प्लेयर सभी SA20 खेल रहे थे। हालांकि उसके बाद उन्होंने अपनी गलती सुधारी और लगातार अच्छे खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया और उसका ही नतीजा है कि वो वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब जीतने में सफल हुए थे।

इस साइकिल की भी उनकी शुरुआत ठीक रही है। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ 2 मैचों की सीरीज़ 1-1 से ड्रॉ की थी। अब उनका अगला सबसे बड़ा असाइनमेंट भारत का टेस्ट दौरा है। भारत में वही टीम सफल होती है जो स्पिन को अच्छा खेलती है। क्योंकि टीम इंडिया के पास एक से बढ़कर एक स्पिन गेंदबाज हैं जो विदेशी बल्लेबाजों को परेशानी में डालते हैं।

स्पिन की काट – स्वीप शॉट

South Africa Spin Resurgence: How They Tackles Spin Bowlers In Asia
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विदेशी टीमों ने उसका काट निकालने की कोशिश की है और वो स्पिनर्स के सामने स्वीप शॉट खेलने का प्रयास करते हैं ताकि गेंदबाजों को उनकी लाइन-लेंथ से भटकाया जा सके। भारतीय टीम पिछले दो दशक से भी ज्यादा में चुनिंदा सीरीज़ ही हारी है। उसमें विदेशी बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों को न्यूट्रलाइज़ कर दिया था, वो भी अपने स्वीप के दम पर।

साल 2004 में मैथ्यू हेडन के स्वीप के चलते भारतीय गेंदबाजों को खासी दिक्कत हुई थी, उसके बाद 2012 में केविन पीटरसन और एलस्टर कुक ने स्वीप का बखूबी इस्तेमाल किया था और पिछले साल 2024 में विल यंग, रचिन रविंद्र और डेवोन कॉन्वे ने इस शॉट का अच्छा प्रयोग किया था।

उसको देखते हुए अब बाकी टीमें भी स्वीप का इस्तेमाल कर रही हैं और अफ्रीका भी उन्हीं में से एक है। अफ्रीकी बल्लेबाजों ने एशिया में खेलते हुए काफी ज्यादा इस शॉट का प्रयोग किया है। तो चलिए जानते हैं कि कैसे उनके इस शॉट ने सबकॉन्टिनेंट में वापस अच्छा प्रदर्शन करने में मदद की है।

2006 से लेकर 2014 तक एशिया में एक भी सीरीज़ नहीं हारी थी साउथ अफ्रीका

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साउथ अफ्रीका अपने पिछले 12 में से 11 मैच जीत चुकी है। उसमें उनका सबसे यादगार पल लॉर्ड्स में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल में जीत के साथ आया। पिछले महीने रावलपिंडी में मिली जीत उनकी सबसे बड़ी विदेशी जीतों में से एक है। इस जीत के साथ ही उन्होंने भारत, श्रीलंका और पाकिस्तान में एक दशक से चले आ रहे हार के सूखे को खत्म किया, जहां वे 2015 से लगातार 10 टेस्ट हार रहे थे।

1993 में साउथ अफ्रीका ने एशिया में अपना पहला टेस्ट मैच खेला था। उस मैच के बाद अगले दो दशकों तक, वो एकमात्र ऐसी टीम थी जिसने एशिया में हार से ज्यादा जीत दर्ज की थी। उनके पास लंबी पारी खेलने वाले बल्लेबाज़ और दिग्गज तेज गेंदबाजों ने उनकी सफलता को मज़बूती दी। लेकिन 2015 के भारत दौरे के बाद उनका यह सिलसिला थम गया। साल 2006 से चली आ रही उनकी विदेशी सीरीज़ में अपराजित रहने की स्ट्रीक को भी तोड़ दिया।

स्पिन ने अफ्रीका को एशिया में 2015 से 2021 तक चटाई धूल

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अक्टूबर 2015 से लेकर पिछले साल बांग्लादेश दौरे की शुरुआत तक, दक्षिण अफ्रीका 11 मैचों में एशिया में जीत हासिल नहीं कर पाई थी। उन्हें अक्सर टर्निंग पिचों पर हार का सामना करना पड़ा, जहां टॉस हमेशा नतीजों को तय करता था, और इन 11 मुकाबलों में से सिर्फ एक बार वो टॉस जीतने में सफल हुई थी।

जब 2015 में दक्षिण अफ्रीका को भारत ने 3-0 से हराया था, तब भारतीय स्पिनरों ने 70 में से 61 विकेट लिए थे और उनका औसत सिर्फ़ 11.91 था। तीन साल बाद श्रीलंका में भी यही स्थिति रही जब 40 में से 37 विकेट स्पिनरों ने लिए थे। इस बार उनका औसत 14.94 रहा।

2019 में भारत ने अच्छी पिच दी थी तब जाकर, उनका औसत 27.06 तक पहुंच गया, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने अफ्रीका के स्पिन गेंदबाजों के सामने 78.40 की औसत से रन बनाए थे, जिससे टीम को एक बार फिर 3-0 से हार का सामना करना पड़ा।

2015 से लेकर अब तक हर सीरीज में स्पिनर्स के खिलाफ विकेट

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Series Mat Wkts Lost Ave SR Balls/Dis False %
India, 2015/16 4 61 11.91 34.16 34.8 20.0
Sri Lanka, 2018 2 37 14.94 46.23 32.3 23.8
India, 2019/20 3 32 27.06 45.08 60.0 17.0
Pakistan, 2020/21 2 16 26.06 40.48 64.3 10.0
Bangladesh, 2024/25 2 15 48.26 65.57 73.6 12.8
Pakistan, 2025/26 2 27 26.37 51.81 50.8 15.2

स्पिन से बचने के लिए निकाला स्वीप शॉट का तोड़

South Africa Spin Resurgence: How They Tackles Spin Bowlers In Asia
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2015 से 2021 तक चार बार एशिया के दौरों में, दक्षिण अफ़्रीकी बल्लेबाज़ों का स्पिन के ख़िलाफ़ औसत सिर्फ़ 17.55 रहा। उन्होंने हर सात ओवर में एक विकेट गंवाया और फ़ॉल्स-शॉट प्रतिशत 18.1% रहा। उन्होंने 11 में से 10 टेस्ट गंवाए, जिनमें से एकमात्र मैच बारिश के कारण ड्रॉ हो पाया था।

साउथ अफ्रीकी टीम ने 2024 में खेलने के तरीके में एक बड़ा बदलाव किया। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच चार टेस्ट मैचों में वो 3 मैच जीतने में सफल हुए, जिसमें बांग्लादेश में 2-0 की जीत शामिल है। यह 2014 के बाद से एशिया में उनकी पहली सीरीज़ जीत थी। अब स्पिन के खिलाफ उनका बल्लेबाजी औसत दोगुना होकर 34.19 हो गया है और फ़ॉल्स शॉट खेलने का प्रतिशत घटकर 14.1% रह गया है, और स्ट्राइक रेट 41 से बढ़कर 59 हो गया है।

गेंदबाजों की लाइन-लेंथ खराब करने के लिए लगातार खेल रहे स्वीप शॉट

इस सुधार का सबसे बड़ा कारण स्वीप शॉट का बढ़ता प्रयोग था। 2015-2021 के दौरान, दक्षिण अफ़्रीकी बल्लेबाज़ों ने केवल 4.3% गुड-लेंथ गेंदों को स्वीप किया। 2024 से, यह बढ़कर 10.6% हो गया है। स्वीप शॉट उन्हें गेंद को पिच होने के 2 मीटर से कम दूरी पर खेलने की अनुमति देता है, और इस रेंज में खेली गई गेंदों की संख्या 36.4% से बढ़कर 41% हो गई है।

इसके अलावा, स्वीप के लगातार इस्तेमाल ने गेंदबाजों को अपनी लाइन और लेंथ बदलने पर मजबूर किया। स्वीप से बचने के लिए, स्पिनर अक्सर अपनी लंबाई को गुड-लेंथ ज़ोन के पिछले हिस्से (लगभग 5 मीटर) या उससे भी कम कर लेते हैं। ये गेंदें, जो थोड़ी छोटी आती हैं, उन्हें बैकफुट से आसानी से खेला जा सकता है और उनमें विकेट जाने का खतरा भी कम हो जाता है।

2015 से 2021 के बीच, साउथ अफ्रीका के बल्लेबाजों का रन बनाने का ऑप्शन ड्राइव था, जिससे वो स्पिन के खिलाफ अपने 33.7% रन बनाते थे। जबकि स्वीप शॉट दूसरे स्थान पर था, जिसका योगदान 16.7% और उस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 18 गेंदों पर एक विकेट होता था।

ड्राइव की जगह स्वीप बना अफ्रीकी बल्लेबाजों की पहली पसंद

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हालांकि साउथ अफ्रीका के बल्लेबाजों ने अपने पिछले 4 टेस्ट मैचों में, स्वीप शॉट से लगभग ड्राइव के बराबर रन बनाए हैं। स्पिन के खिलाफ उनका शॉट प्रतिशत 28.3% से बढ़कर 29.2% हो गया, जिससे उनके औसत में भी उछाल देखने को मिला। पहले उनका औसत 30.57 था, जो अब 45.22 हो गया है।

अफ्रीकी बल्लेबाज रिवर्स स्वीप का प्रयोग नहीं करते थे, लेकिन स्वीप शॉट से मिलते नतीजों को देखते हुए उन्होंने इसका प्रयोग शुरू कर दिया है। 2015-21 तक इसका शॉट प्रतिशत 15.2% था और अब यह बढ़कर स्वीप का 44% हिस्सा बन गया है। मतलब, अफ्रीकी बल्लेबाज 100 स्वीप शॉट में से 44 रिवर्स स्वीप खेल रहे हैं। यह बदलाव मानसिक और पर्सनल स्ट्रेंथ को भी दिखाता है। एडेन मार्करम एकमात्र खिलाड़ी हैं जो दोनों फेज में हैं। 2018-21 तक के दौरों में, उन्होंने स्पिनरों की केवल 1.5% गेंदें स्वीप की थीं, जो अब बढ़कर 8.5% हो गई हैं।

पाकिस्तान के खिलाफ स्वीप शॉट रहा था कारगर

मौजूदा खिलाड़ियों में, विकेटकीपर बल्लेबाज काइल वेर्रेन सबसे ज्यादा स्वीप शॉट खेलते हैं। वो स्पिनर्स की 24.1% गेंदों पर स्वीप का इस्तेमाल करते हैं, यानी लगभग हर चौथी गेंद पर एक स्वीप शॉट लगाते हैं। सेनुरन मुथुसामी (16%) और टोनी डी ज़ोरज़ी (14.5%) तीसरे नंबर पर हैं।

हाल ही में पाकिस्तान के दौरे में साउथ अफ्रीकी बल्लेबाजों के स्वीप शॉट ने स्पिन को काफी हद तक बेअसर कर दिया था, लेकिन भारत एक अलग चुनौती पेश करेगा। स्वीप क्रॉस-बैट होने के कारण, टर्निंग ट्रैक पर ज़्यादा सुरक्षित होते हैं, लेकिन अच्छी पिचों पर जोखिम भरे होते हैं। भारत की पिचें पाकिस्तान या बांग्लादेश की पिचों की तरह नहीं हैं। अब यहाँ पर टिपिकल सबकॉन्टिनेंट विकेट मिलती हैं, जिसमें सभी के लिए कुछ न कुछ होता है।

2024 से लेकर अब तक साउथ अफ्रीका के बल्लेबाजों द्वारा सबसे ज्यादा स्वीप शॉट

Batter Runs Dis Ave Sweep %
K Verreynne 62 3 20.66 24.1
SR Harmer 15 1 15.00 18.8
S Muthusamy 50 1 50.00 16.0
T de Zorzi 119 2 59.50 14.5
DT Brevis 11 0 8.8
AK Markram 31 1 31.00 8.5
PWA Mulder 35 0 8.0
RD Rickelton 30 0 7.5
T Stubbs 42 1 42.00 5.2
KA Maharaj 0 0 4.3

भारत के खिलाफ स्वीप खेलना रहेगी चुनौती

इसके अलावा, भारतीय स्पिनर भी पाकिस्तान और बांग्लादेश के गेंदबाजों के मुकाबले स्पीड में काफी तेज हैं और वो विकेट-टू-विकेट गेंदबाजी करते हैं, जिससे बोल्ड और एलबीडब्ल्यू का खतरा बहुत बढ़ जाता है। रवींद्र जडेजा, अक्षर पटेल और वाशिंगटन सुंदर जैसे गेंदबाज़ लगभग 90 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गेंदबाजी करते हैं और लगातार स्टंप्स को हिट करते हैं। अगर इन गेंदबाजों के खिलाफ स्वीप शॉट मिस हुआ तो बचने का कोई चांस नहीं होता है।

एशिया में दक्षिण अफ्रीका ने हाल ही में काफी सफलता हासिल की है, जिससे यह पता चलता है कि वो इस बार काफी तैयारी के साथ भारत आए हुए हैं और पिछली बार की तरह उन्हें हल्के में लेने की भूल नहीं की जानी चाहिए।

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आकाश अवस्थी स्पोर्ट्स डाइजेस्ट हिंदी में बतौर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और स्पोर्ट्स जर्नलिज्म में दो वर्षों का अनुभव रखते हैं। इससे पहले वे इंडिया न्यूज़ और स्पोर्ट्सविकी जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम कर चुके हैं। क्रिकेट, कबड्डी और अन्य खेलों की बारीकियों को गहराई से समझना और उन्हें आसान व रोचक अंदाज में पाठकों तक पहुंचाना उनकी खासियत है। खेल जगत के साथ साथ पॉलिटिक्स की हर हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है।

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