क्रिकेट की सबसे पुरानी और कड़ी राइवलरी में से एक एशेज में बहुत से ऐसे पल दिए हैं जो क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में अभी भी ताजा हैं। एक बार फिर से यह प्रतिस्पर्धी सीरीज शुरू होने वाली हैं लेकिन इस सीरीज के बिल्डअप से पहले ही ऑस्ट्रेलियाई टीम को बड़ा झटका लगा गया हैं।
ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस पर्थ में होने वाले पहले मैच में खेलते हुए नहीं दिखेंगे और उनकी जगह पर इस दशक के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज स्टीव स्मिथ कप्तानी करते हुए नजर आएंगे।
तो चलिए एक बार नजर डालते हैं कि कमिंस का पहले मैच में न खेलना ऑस्ट्रेलिया के लिए कितना बड़ा झटका साबित होने वाला हैं और बतौर कप्तान स्मिथ का प्रदर्शन कैसा रहता हैं। क्या वो कमिंस की कमी को भर पाएंगे या नहीं?
कप्तान बनते ही स्मिथ की बल्लेबाजी में आता हैं सुधार

स्टीव स्मिथ इस दशक के सबसे बेस्ट टेस्ट बल्लेबाज हैं। उनको जब कप्तानी मिलती हैं तो वो और भी ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं। कप्तान बनने के बाद उनकी बल्लेबाजी और ज्यादा निखर कर सामने आती हैं।
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि जिन भी खिलाड़ियों ने 25 से ज्यादा टेस्ट मैचों में कप्तानी की हैं उसमें एवरेज सबसे बेहतरीन हैं। चाहे एशिया हो, अफ्रीका हो इंग्लैंड हो या फिर घर में इस धाकड़ बल्लेबाज ने हर जगह अपनी बल्लेबाजी का झंडा गांड़ा हैं।
काफी शानदार कप्तान हैं स्मिथ
स्टीव स्मिथ की कप्तानी में ऑस्ट्रेलियाई टीम को नतीजे भी मिले हैं। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ उनके घर में सीरीज जीत हो या फिर श्रीलंका को उन्हीं की सरजमीं चटाना हो या फिर एशेज को एकतरफा जिताना हो उनकी कप्तानी में सब हासिल किया हैं।
वो काफी टैक्टिकल कप्तान हैं जो कि अपने रिसोर्सेस का इस्तेमाल अच्छे से करना जानते हैं। कमिंस की अनुपस्थिति में उन्होंने 6 मैचों में कप्तानी की हैं और सब मैच में टीम को जीत मिली हैं। इस पता चलता हैं कि वो अपने खिलाड़ियों का इस्तेमाल अच्छे से करना जानते हैं जिसकी वजह से उन्हें नतीजे भी मिले हैं।
कमिंस की कप्तानी से ज्यादा नहीं पड़ेगा अंतर
स्टीव स्मिथ ने ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट में 40 मैचों में कप्तानी की हैं जिसमें 23 मैचों में जीत मिली हैं जबकि 10 मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा हैं और 7 मुकाबले ड्रा रहे हैं। जबकि बल्लेबाजी में इस दौरान उन्होंने 69 पारियों में 68.98 की औसत से 4139 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके नाम 14 शतक और 17 अर्धशतक लगाए हैं।
कप्तान बनते ही उनका प्रदर्शन अचानक से काफी अच्छा हो जाता हैं। कमिंस के न होने से ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी में थोड़ा फर्क देखने को मिल सकता हैं लेकिन उनकी कप्तानी को ऑस्ट्रेलियाई टीम ज्यादा मिस नहीं करेगी।







