टी20 वर्ल्ड कप 2026 का पहला उलटफेर देखने को मिल गया है। जिम्बाब्वे ने आर प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए ग्रुप स्टेज गेम में ऑस्ट्रेलिया को 23 रनों से हराकर इतिहास रच दिया है।
अब तक एसोसिएट और लोअर रैंक टीमों ने अपने से हाईयर रैंक टीमों को कड़ी टक्कर दी थी, लेकिन वे दबाव में मैच चूक जाती थीं और हार का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन इस बार जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर इतिहास रच दिया है। तो चलिए जानते हैं कि टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में जिम्बाब्वे ने कब-कब उलटफेर किया है।
टी20 वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे के सबसे बड़े उलटफेर

जिम्बाब्वे बनाम ऑस्ट्रेलिया (साल 2007)
साल 2007 में टी20 वर्ल्ड कप की शुरुआत हुई थी। ऑस्ट्रेलिया अपने पीक पर थी और उस टूर्नामेंट को जीतने की हॉट फेवरेट भी थी। ऑस्ट्रेलियाई टीम इस मैच को काफी हल्के में ले रही थी, क्योंकि इससे पहले उन्होंने उसी साल की शुरुआत में बिना कोई मैच हारे लगातार तीसरी बार 50 ओवर का वर्ल्ड कप जीता था।
ऑस्ट्रेलिया ने केपटाउन में पहले बल्लेबाज़ी करते हुए एंड्रू साइमंड्स और ब्रैड हॉज के 38 रनों की बदौलत 138 रन बनाए। इसके जवाब में जिम्बाब्वे की टीम को शुरुआती झटके तो लगे, लेकिन युवा ब्रेंडन टेलर ने शानदार बल्लेबाज़ी करते हुए न सिर्फ अर्धशतक लगाया बल्कि टीम को मैच भी जिताया।
जिम्बाब्वे बनाम पाकिस्तान (2022)
जिम्बाब्वे ने साल 2022 में ऑस्ट्रेलिया में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ उलटफेर किया था। पहले बल्लेबाज़ी करते हुए जिम्बाब्वे ने पर्थ की मुश्किल विकेट पर सीन विलियम्स के 31 रनों की बदौलत 130 रन बनाए।
जिम्बाब्वे की टीम ने कम स्कोर के बाद भी हार नहीं मानी और लगातार अंतराल में विकेट लेते गए। आखिरी मौके पर पाकिस्तान को जीत के लिए 1 गेंद में 3 रन की ज़रूरत थी, लेकिन वह सिर्फ 1 रन ही बना पाई और 1 रन से हार का सामना करना पड़ा।
जिम्बाब्वे बनाम ऑस्ट्रेलिया (2026)
जिम्बाब्वे ने साल 2026 के टी20 वर्ल्ड कप में एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया को हराकर उलटफेर कर दिया। एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया की टीम भले ही चोट से जूझ रही थी, लेकिन उसके बाद भी वह खिताब जीतने की प्रबल दावेदारों में से है।
जिम्बाब्वे ने प्रेमदासा में खेले गए मैच में पहले बल्लेबाज़ी करते हुए ब्रायन बेनेट के अर्धशतक और सिकंदर रज़ा की पारियों की बदौलत 169 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया की टीम की शुरुआत काफी खराब रही। 32 रनों के अंदर ही उनके 4 विकेट गिर गए थे। मैक्सवेल और रेनशॉ ने टीम को संभाला, लेकिन लगातार बढ़ते रन रेट के चलते ग्लेन आउट हो गए। उसके बाद कोई भी मैट का साथ नहीं दे सका और जिम्बाब्वे ने आसानी से मैच जीत लिया।







