टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने अपने समय में बहुत सी शानदार पारियां खेलकर टीम को मैच जिताने में मदद की है। वो टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी थे। उनकी महानता को इसी बात से समझा जा सकता है कि अपने डेढ़ दशक से लंबे करियर में वो कभी भी ड्रॉप नहीं हुए।
उन्हें यह खेल खेलने वाला सबसे महान प्लेयर भी माना जाता है। हालाँकि टीम इंडिया और मुंबई की टीम के उनके पुराने साथी करसन घावरी ने सुनील गावस्कर को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है कि जब उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने से मना कर दिया था।
सुनील गावस्कर ने प्रधानमंत्री से मिलने से किया मना

इस पॉडकास्ट में उन्होंने एक किस्सा सुनाया जब उन्होंने कहा कि “सुनील गावस्कर पैड पहनकर पूरी तरह से तैयार थे। वह ड्रेसिंग रूम में बैठकर बल्लेबाज़ी से पहले अपना ध्यान लगा रहे थे। क्योंकि थोड़ी ही देर में उनकी बल्लेबाज़ी थी। लेकिन तभी टीम मैनेजर राज सिंह डूंगरपुर वहां आए। उन्होंने कहा, ‘सब लोग आ जाओ। प्रधानमंत्री यहां पर आए हुए हैं। परिचय होगा और बस 2-3 मिनट लगेंगे।’
ध्यान लगाने के लिए प्रधानमंत्री से मिलने से किया मना
सभी खिलाड़ी प्रधानमंत्री से मिलने के लिए बाहर चले गए, लेकिन सुनील ने कहा, ‘मैं नहीं आ रहा हूं। मुझे ध्यान लगाने दो। मेरी बल्लेबाज़ी मेरे और मेरी टीम के लिए ज्यादा अहम है।’ गावस्कर ने टी तक बल्लेबाज़ी की और ठीक-ठाक रन भी बनाए।
जब दिन का खेल खत्म हुआ तब हमें पता चला कि प्रधानमंत्री सिर्फ गावस्कर से मिलने के लिए ड्रेसिंग रूम में आए थे। इस तरह सनी जी, 1971 से 1987 तक, हमेशा चैंपियन रहे। उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में यह भी कहा कि वह किसी भी तरह का खून करके बच निकल सकते थे।
1975 वर्ल्ड कप: एक अलग अनुभव
सुनील गावस्कर ही नहीं बल्कि दुनिया के सभी खिलाड़ियों के लिए 1975 का वर्ल्ड कप काफी ख़ास था। क्योंकि तब वर्ल्ड कप की शुरुआत हो रही थी और खिलाड़ियों को इस फॉर्मेट को कैसे खेलना है, इसके बारे में जानकारी नहीं थी। भारत का पहला मैच इंग्लैंड से था और उन्होंने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 334 रन बनाए थे।
सुनील ने बल्लेबाज़ी के दौरान सभी निर्देश किए अनसुने
इसके जवाब में भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर ने 174 गेंदों में 36 रन बनाए थे। इस वाकये को याद करते हुए करसन घावरी ने कहा कि ड्रेसिंग रूम में लोग उनके खेलने के तरीके से खुश नहीं थे। हमें वनडे क्रिकेट खेलने का अंदाज़ा नहीं था। लेकिन उन्होंने उस मैच में पूरी बल्लेबाज़ी की। उन्हें बार-बार संदेश भेजा गया कि तेज खेलो या फिर आउट हो जाओ, लेकिन उन्होंने किसी की भी नहीं सुनी और अंत तक बल्लेबाज़ी करके वापस आए।
वनडे वर्ल्ड कप में टेस्ट सीरीज़ की तैयारी कर रहे थे गावस्कर
लेकिन उस समय गावस्कर तो गावस्कर थे और उन्हें कोई ज़्यादा कुछ कह भी नहीं सकता था। सुनील गावस्कर किसी की नहीं सुन रहे थे। वह सिर्फ टोनी ग्रिग, ज्योफ अर्नोल्ड, क्रिस ओल्ड और बॉब विलिस को आराम से खेल रहे थे।
इस मैच के बाद जब उनसे इस बल्लेबाज़ी का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया, ‘मैं इन गेंदबाज़ों को इसलिए खेल रहा था ताकि भविष्य में होने वाली टेस्ट सीरीज़ की प्रैक्टिस कर सकूं।’ ड्रेसिंग रूम में तब खलबली मच गई, जब हमारे मैनेजर ने उनसे सवाल पूछा, तो सुनील ने कहा, ‘मुझे अकेला छोड़ दो।’”







