Saturday, February 14

14 अक्टूबर को इस साल के विश्वकप का सबसे बड़ा महामुकाबला खेला गया। इस मुकाबले से पहले पाकिस्तान के क्रिकेट जानकार और फैंस अपनी टीम से भारत को हराकर पूराने रिकॉर्ड को तोड़ने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लेकिन इस बार भारत ने विश्वकप में पाकिस्तान को हराने वाली परंपरा को जारी रखा। इस अहम मुकाबले में भारतीय टीम ने अपने चिर-प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को एकतरफा हराया। कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पाकिस्तान को पहले बल्लेबाजी करने के लिए आमंत्रण दिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी पाकिस्तान की टीम भारत के सामने केवल 192 रन का लक्ष्य दे पाई। इस लक्ष्य को भारतीय टीम ने 7 विकेट से करारी शिकस्त दी। इस जीत के साथ ही भारतीय टीम ने पाकिस्तान को विश्वकप में लगातार 8 बार हराने का भी रिकॉर्ड बना डाला। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज हम आपके सामने इस बात को उजागर करने जा रहे हैं कि पाकिस्तान की टीम आखिर विश्वकप जैसे अहम आयोजन में भारत के सामने क्यों मात खा जाती है। तो आइए जानते हैं इसके अमह कारण।

आत्मविश्वास की कमी

बेशक पाकिस्तान टीम ने भी आज तक के इतिहास में एक से बढ़कर एक खिलाड़ी बनाए हैं। चाहें वह पहले के वसीम अकरम, शाहीद अनवर, इमरान खान या फिर आज के बाबर आजम और शाहीन शाह अफरीदी ही क्यों ना हो, ये सब बहुत प्रतिभाशाली खिलाड़ी रहे हैं। लेकिन विश्वकप जैसे अहम आयोजन से पहले इनकी टीम मानसिक रूप से कमजोर पड़ा जाती है। इसका बात को समझा जा सकता है कि बड़े मैचों में पाकिस्तान टीम की फिल्डिंग, बल्लेबाजी और मुश्किल वक्त में कठोर निर्णय लेने की क्षमता साधारण मुकाबलों के तुलना में कमजोर पड़ जाते हैं।

घरेलू दबाव

भारतीय खिलाड़ी की तुलना में पाकिस्तानी टीम के पास मैच जीतने के लिए उनके मीडिया और घरेलू फैंस का काफी दबाव होता है। वहां पर क्रिकेट मैच में हार मतलब किसी जंग में मात खाने जैसे समझा जाता है। जब भी पाकिस्तान भारत से मुकाबले हारता है, इसके बाद यदि आप वहां के फैंस और पूर्व क्रिकेटरों के रिएक्शन को सोशल मीडिया पर देखेंतो तो आपको खुद समझ में आ जाएगा कि इस देश के खिलाड़ियों के पास कितना दबाव होता है।

सही प्लानिंग का ना होना

बड़े मैचों से पहले हमेशा ही पाकिस्तान की हार के पीछे उसकी रणनीति को भी जोड़ा जाता है और ये बात शत-प्रतिशत सही भी है। अक्सर ही देखा जाता है कि मैच के दौरान उनके प्लेइंग इलेवन का सही ना होना और सही समय पर सही फैसलों की कमी होती है। ऐसे में भारत जैसी बड़ी टीम के सामने उनकी हार का एक प्रमुख कारण ये भी है।

पक्षपात

अगर वहां के मीडिया और पूर्व खिलाड़ियों की बात को हम ध्यान से सुनें तो पता चलता है कि वहां के इतिहास में आज तक जो भी मुख्य चयनकर्ता रहा है उसने अपने चहेतों को टीम में रखा ही है। फिर इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसका प्रदर्शन कैसा रहा है। इस बार भी पाकिस्तान की टीम में बहुत सारे खिलाड़ी ऐसे हैं जिनका हालिया प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है, लेकिन फिर भी टीम के बड़ी ही शान से हिस्सा बने हुए हैं।

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साल 2020 से स्पोर्ट्स पत्रकारिता में एक सिपाही के तौर पर कार्यरत हूं। प्रत्येक खेल में उसके सभी पहलुओं के धागे खोलकर आपके सामने रखने की कोशिश करूंगा। विराट व रोहित का बल्ला धोखा दे सकता है, लेकिन आपको यहां खबरों की विश्वसनियता पर कभी धोखा नहीं मिलेगा। बचपन से ही क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों में खास दिलचस्पी होने के कारण इसके बारे में लिखना बेहद पसंद है।

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