टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी शिखर धवन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से नोटिस भेजा गया है। इस दिग्गज ओपनिंग बल्लेबाज़ को ऑनलाइन बेटिंग ऐप केस के मामले में नोटिस भेजा गया है। पहले भी कुछ भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों से पूछताछ की जा चुकी है और अब उसमें नया नाम धवन का जुड़ा है। तो चलिए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला?
स्पष्ट करनी होगी शिखर धवन को अपनी भूमिका

प्रवर्तन निदेशालय ने टीम इंडिया के पूर्व ओपनिंग बल्लेबाज़ शिखर धवन को पूछताछ के लिए नोटिस दिया है, जिसमें उनसे अवैध सट्टेबाज़ी ऐप 1xBet की विज्ञापन गतिविधियों में अपनी भूमिका स्पष्ट करने को कहा गया है।
पिछले कुछ समय से ईडी की टीम लगातार ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ जांच कर रही है। हालांकि अब उन्होंने इस मामले में अपनी जांच को और तेज कर दिया है। उनकी नज़रें सिर्फ क्रिकेट खिलाड़ियों पर ही नहीं बल्कि फिल्मी हस्तियों पर भी हैं जिन्होंने इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े विज्ञापन किए हैं।
पीएमएलए के तहत हो रही है जांच
Former Indian cricketer Shikhar Dhawan summoned by ED for questioning in illegal betting app linked money laundering case: Officials
— Press Trust of India (@PTI_News) September 4, 2025
मीडिया खबरों की मानें, तो पूर्व भारतीय ओपनर शिखर धवन कुछ प्रचार गतिविधियों के लिए इन ऐप्स से जुड़े थे। ईडी, धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उनका बयान दर्ज करेगा। ईडी कई अवैध सट्टेबाज़ी ऐप्स की जांच कर रहा है, जिन पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने या भारी मात्रा में कर चोरी करने का आरोप है।
सुरेश रैना और हरभजन सिंह से भी हो चुकी है पूछताछ
ईडी ने इस साल जून में ऑनलाइन सट्टेबाज़ी ऐप मामले में कई नामचीन हस्तियों से पूछताछ की थी, जिनमें सुरेश रैना और हरभजन सिंह जैसे खिलाड़ी भी शामिल थे। उनके बयान केंद्रीय जांच एजेंसी ने दर्ज किए थे। हाल ही में केंद्र सरकार ने सभी तरह के ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को बंद करने के लिए नया कानून पारित किया था।
सरकार ऑनलाइन रियल मनी गेम को रोकने के लिए लाई नया कानून
दरअसल, सरकार यह नियम इसलिए लाई है क्योंकि पिछले कुछ समय में युवाओं के बीच ऑनलाइन गेम की लत बहुत बढ़ गई थी। जिसके चलते लगातार धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग के केसों में बढ़ोतरी देखी जा रही थी, जिसके चलते अब सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।
सरकार ने इस निर्णय के पीछे युवाओं में बढ़ रही लत, धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय नुकसान जैसे गंभीर सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारणों का हवाला दिया है। यही नहीं, इस नियम के अनुसार अगर कोई कंपनी इसका पालन नहीं करती है तो उसे 3 साल की जेल और भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। जबकि इसे प्रमोट करने वाले लोगों पर भी दंड का प्रावधान है।

