KBL and CKT20 League Controversy Exposed the Corruption of Cricket Kenya: केन्या क्रिकेट कभी वर्ल्ड क्रिकेट में एक मिसाल माना जाता था, लेकिन आज इसकी स्थिति पहले से काफी बदल चुकी है। वर्ल्ड कप 2003 में जब केन्या की टीम ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था, तब सभी को ऐसा लगा था कि यह देश जल्द ही क्रिकेट की दुनिया में बड़ी ताकत बनेगा।
लेकिन आज उसी केन्या का क्रिकेट बोर्ड आपसी कलह, भ्रष्टाचार और सत्ता की लड़ाई में इस कदर उलझ चुका है कि खेल का भविष्य पूरी तरह दांव पर लग गया है। पहले केन्या ब्लास्टर लीग (KBL) और अब हालिया विवादित CKT20 लीग इसका सबसे ताजा और शर्मनाक उदाहरण है।
सोचने वाली बात यह है कि, जिस देश ने मॉरीस ओडुम्बे, स्टीव टिकोलो और कॉलिन्स ओबुया जैसे खिलाड़ियों के दम पर वर्ल्ड क्रिकेट को चौंकाया, आज वही देश ICC की निगरानी और आंतरिक झगड़ों का शिकार है। सवाल यह है कि आखिर 22 साल में ऐसा क्या हुआ कि केन्या क्रिकेट अपनी पहचान ही खो बैठा? इसका सबसे बड़ा कारण है बोर्ड में गहराती राजनीति और भ्रष्टाचार।
CKT20 लीग ने उठाया नया विवाद
सितंबर 2025 की शुरुआत में क्रिकेट केन्या के सीईओ रोनाल्ड बुकुसी ने स्पष्ट बयान जारी करते हुए कहा था कि CKT20 लीग का कोई अस्तित्व ही नहीं है और बोर्ड ने इसे मंजूरी नहीं दी है। बुकुसी ने जनता को यह भी चेताया था कि वे लोग इस लीग से दूर रहें और यहां तक कि उन्होंने आयोजक AOS (Arena of Sports) पर कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दी।
लेकिन महज़ एक हफ़्ते के अंदर हालात पलट गए। 10 सितंबर को क्रिकेट केन्या सुप्रीम काउंसिल का एक धड़ा सामने आया, जिसने न सिर्फ इस लीग को मंजूरी दी, बल्कि उल्टा बुकुसी पर ही गंभीर आरोप लगा दिए। उन्होंने कहा कि सीईओ लोगों को गुमराह कर रहे हैं, बोर्ड की छवि खराब कर रहे हैं और अपने पद का दुरुपयोग भी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, काउंसिल ने उनकी बर्खास्तगी तक की सिफारिश कर दी।
AOA के दौरान कई मैच फिक्सर भी रहे मीटिंग में शामिल
चौंकाने वाली बात यह है कि, CKT20 के लिए हुए आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AOA) के दौरान कई मैच फिक्सरों को भी मीटिंग में देखा गया। उनमें से कई लोगों को भारत में मैच फिक्सिंग के आरोपों की पुष्टि के बाद बीसीसीआई ने पूरी तरह से बैन कर रखा है। नामचीन फिक्सरों का उनके साथ होने से से यह साफ पता चलता है कि, क्रिकेट केन्या और उसके साथ जुड़े लोग टी20 लीग के नाम पर क्रिकेट प्रेमियों को मैच नहीं ‘फिक्स्ड मैच’ कराकर धोखा देना और खुद पैसे कमाना चाहते हैं।
इसके साथ ही साथ, वह देश में क्रिकेट के भविष्य को पूरी तरह से बर्बाद करने की और युवा खिलाड़ियों को मैच फिक्सिंग के अपराध में धकेलकर उनका करियर ख़राब करने पर तुले हुए हैं। इस लीग के साथ जुड़े पूर्व केन्याई कप्तान मॉरीस ओडुम्बे खुद 2004 में मैच फिक्सिंग के आरोप में 5 साल बैन की सजा झेल चुके हैं।
पूर्व खिलाड़ियों का इस्तेमाल करके बटोरे जा रहे हैं पैसे
गौरतलब हो कि, मॉरीस ओडुम्बे, ओबुया ब्रदर्स, एलेक्स ओबांडा और राजाब अली जैसे वर्ल्ड कप 2003 टीम के कई स्टार खिलाड़ी CKT20 लीग के एंबेसडर बनाए गए हैं। जाहिर सी बात है कि उन्हें पैसे और पहचान का लालच देकर इस प्रोजेक्ट से जोड़ा गया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ पूर्व खिलाड़ियों का चेहरा दिखाकर भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों पर पर्दा डाला जा सकता है?
10 सितम्बर 2025 को नैरोबी में हुई बैठक के बाद काउंसिल ने लीग को पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ करार दिया। काउंसिल ने कहा कि क्रिकेट केन्या और दुबई/भारत आधारित स्पोर्ट्स प्रमोशनल कंपनी AOS स्पोर्ट के बीच हुआ 255 मिलियन शिलिंग का पांच साल का एग्रीमेंट देश में इस खेल के विकास और विस्तार के लिए बेहद अहम साबित होगा।
हालाँकि, सुनने में तो यह डील काफी आकर्षक लगती है, लेकिन केन्या क्रिकेट की बर्बादी की असली जड़ ही इसी प्रकार की सोच रही है कि “पैसा आ रहा है, इसलिए नियम-कानून और गवर्नेंस को ताक पर रख दो।”
हकीकत यह है कि अगर बोर्ड ने ICC की मंजूरी के बिना इस लीग को आगे बढ़ाया, तो न सिर्फ यह टूर्नामेंट विवादों में फंस जाएगा, बल्कि केन्या पर ICC से बैन जैसी सख़्त कार्रवाई का खतरा भी मंडरा सकता है।
केन्या ब्लास्टर लीग का विवाद भी अब तक जारी
अगस्त 2024 में क्रिकेट केन्या ने एसए इवेंट वर्क्स (SA Event Worx) के साथ मिलकर केन्या ब्लास्टर लीग (KBL) शुरू करने का ऐलान किया था। इस फ्रेंचाइजी आधारित टी20 लीग को भारत में होने वाले IPL की तर्ज पर बनाया जा रहा था। इसके साथ ही, बोर्ड की तरफ से वादा भी किया गया था कि यह लीग स्थानीय खिलाड़ियों को मंच देगा और क्रिकेट को नई दिशा देगा।
SA Event Worx के CEO हेमंत शर्मा और केन्या क्रिकेट के उस समय के चेयरमैन मनोज पटेल ने मिलकर इसे लॉन्च किया था। उन्होंने मई 2025 के आसपास के समय में केन्या ब्लास्टर लीग शुरू करने की योजना भी बनाई थी। इस लीग का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के लिए मीडिया कवरेज हुआ, उम्मीदें जगीं, लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद क्रिकेट केन्या ने पलटी मार दी और कहा कि उसने इस लीग को कभी मंजूरी ही नहीं दी थी।
इसके चलते SA Event Worx को भारी वित्तीय और साख का नुकसान हुआ और यह मामला कानूनी लड़ाई तक भी पहुंच गया है। इतना ही नहीं, बोर्ड ने तत्कालीन अध्यक्ष मनोज पटेल को भी उनके पद से हटा दिया गया और खुद अपना पल्ला झाड़ लिया। यह क्रिकेट केन्या की किसी टी20 लीग के नाम पर भ्रष्टाचार की पहली शुरुआत थी।
हेड कोच डोडा गणेश को भी अचानक पद से हटाने पर चल रहा है विवाद
क्रिकेट केन्या ने 14 अगस्त 2024 को पूर्व भारतीय क्रिकेटर डोडा गणेश को केन्या की नेशनल टीम का हेड कोच नियुक्त किया था। उस समय ऐसा लगा था जैसे बोर्ड अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कुछ बड़ा करने की सोच रहा है, लेकिन यह सब वहम मात्र रहा।
ठीक एक महीने बाद उन्होंने ‘प्रक्रियागत गड़बड़ी’ के नाम पर गणेश को अचानक उनके पद से हटा दिया, जिसके बाद उन्होंने क्रिकेट केन्या के खिलाफ क़ानूनी लड़नी भी शुरू की। हालाँकि, अब तक इस मामले पर कोई फैसला नहीं आ सका है, लेकिन इस विवाद के चलते बोर्ड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी भी झेलनी पड़ी।
गुटबाजी ने किया खेल को तबाह
आज की सबसे बड़ी समस्या यह है कि क्रिकेट केन्या एक टूटी हुई संस्था बन चुकी है। एक धड़ा दूसरे को अवैध बताता है, वोट ऑफ नो कॉन्फिडेंस पास किए जाते हैं, चेयरमैन की वैधता पर सवाल उठते हैं और अब सीईओ की कुर्सी भी हिल रही है। ऐसे में खिलाड़ियों और खेल का क्या होगा? यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि भ्रष्टाचार और राजनीति ने केन्या क्रिकेट की जड़ों को खोखला कर दिया है।
केन्या क्रिकेट में युवाओं की नई पीढ़ी, जो इंटरनेशनल लेवल पर अपनी पहचान बनाना चाहती है, उन्हें एक मजबूत घरेलू ढांचे की जरूरत है। लेकिन अगर बोर्ड बार-बार अपने हितों की लड़ाई में उलझा रहेगा तो देश के क्रिकेटरों का भविष्य अंधकार में ही रहेगा।
कौन सही, कौन गलत?
सवाल यह है कि एक ही बोर्ड के दो हिस्से दो बिल्कुल अलग बातें कैसे कह रहे हैं? असलियत यह है कि क्रिकेट केन्या के भीतर सत्ता और ताकत को लेकर संघर्ष चरम पर है। एक ओर सीईओ और बोर्ड का बड़ा हिस्सा ICC की मंजूरी मिलने तक किसी भी टूर्नामेंट को हरी झंडी नहीं देना चाहता, वहीं दूसरी ओर काउंसिल और कुछ प्रतिनिधि पैसे और सरकारी समर्थन का हवाला देकर टूर्नामेंट तुरंत करवाना चाहते हैं।
यहां यह भी समझना जरूरी है कि ICC के नियमों के बिना किसी भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता वाली लीग का आयोजन नहीं किया जा सकता है। फिर भी बोर्ड का एक धड़ा सिर्फ स्पॉन्सर्स और चकाचौंध के लालच में ऐसे फैसले ले रहा है जो देश की क्रिकेटिंग साख को और गिरा सकते हैं।
आज के हालात यह साबित कर रहे हैं कि क्रिकेट केन्या ने 2003 के बाद से सिर्फ गलतियां ही दोहराई हैं। पारदर्शिता की कमी, सत्ता की लड़ाई और पैसों का लालच इस खेल को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं। डोडा गणेश को अचानक से हेड कोच पद से हटाने, केन्या ब्लास्टर लीग (KBL) और CKT20 लीग विवाद महज़ एक पद या टूर्नामेंट की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह केन्या क्रिकेट की सड़ चुकी व्यवस्था का आईना है।
अगर यह बोर्ड अब भी नहीं संभला तो केन्या का क्रिकेट पूरी तरह अंधकार में डूब जाएगा और तब यह सवाल हमेशा गूंजेगा कि क्या क्रिकेट केन्या ने खुद अपने ही हाथों से अपनी पहचान मिटा दी? क्योंकि इससे पहले 2005 में इन्हीं जैसे कामों की वजह से ‘केन्या क्रिकेट एसोशिएशन’ का नाम बदलकर ‘क्रिकेट केन्या’ कर दिया गया था, क्योंकि उस समय बोर्ड के नाम पर किसी को भरोसा नहीं था।
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