Arshad Nadeem Coach Salman Iqbal Faces Lifetime Ban By Pakistan Athletics Federation: पाकिस्तान के खेल जगत से एक बार फिर ऐसी खबर सामने आई है, जिसने देश की खेल व्यवस्था की पोल खोल दी है। जैवलिन थ्रो में देश का सबसे बड़ा नाम बन चुके अरशद नदीम के कोच सलमान इकबाल को पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन (PAAF) लाइफटाइम बैन कर दिया है। यह फैसला रविवार को लिया गया। इस फैसले के बाद पाकिस्तान में खेल प्रशासन पर कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
फेडरेशन ने लगाया ‘संविधान उल्लंघन’ का आरोप
फेडरेशन का कहना है कि सलमान इकबाल ने पंजाब एथलेटिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रहते हुए उसके संविधान का उल्लंघन किया। अगस्त में हुए चुनावों के दौरान उन्होंने कुछ ऐसे कदम उठाए जो फेडरेशन के नियमों के खिलाफ बताए जा रहे हैं।
फेडरेशन ने इस पूरे मामले की जांच के लिए सितंबर के बीच में एक इनक्वायरी कमेटी गठित की थी। इस जांच की रिपोर्ट 10 अक्टूबर को आई, जिसमें इकबाल को दोषी ठहराते हुए लाइफटाइम बैन की सिफारिश की गई।
इस फैसले के तहत सलमान इकबाल अब किसी भी एथलेटिक्स गतिविधि, कोचिंग या प्रशासनिक पद पर नहीं रह सकते। यानी, यह अरशद नदीम के करियर के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वही लम्बे समय से उनके मेंटर और ट्रेनर रहे हैं।
खराब प्रदर्शन पर रिपोर्ट देने से भड़की फेडरेशन?
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई महज संविधान उल्लंघन का मामला नहीं है। असली विवाद तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड (PSB) ने कोच इकबाल से यह पूछा कि अरशद नदीम का वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप (टोक्यो) में प्रदर्शन कमजोर क्यों रहा और उनके प्रशिक्षण पर खर्च हुए पैसों का ब्योरा क्या है।
सलमान इकबाल ने अपने जवाब में लिखा कि पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन पिछले एक साल से अरशद नदीम से खुद को अलग कर चुका है और न तो उसकी ट्रेनिंग में मदद की, न ही वित्तीय सहायता दी। यही बयान फेडरेशन को नागवार गुजरा और वही उनकी ‘गुस्ताखी’ बन गई।
कोच ने बताया, दोस्त की मदद से कराया ट्रेनिंग और इलाज
सलमान इकबाल ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि जब फेडरेशन ने हाथ खींच लिया, तब उन्होंने अरशद को दक्षिण अफ्रीका में ट्रेनिंग दिलाने और काफ मसल इंजरी के बाद उनके रीहैब की व्यवस्था अपने एक दोस्त की आर्थिक मदद से की।
यानी, पाकिस्तान की खेल संस्थाएं जहां सोई रहीं, वहीं एक कोच ने अपने खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खड़ा रखने के लिए निजी स्तर पर संघर्ष किया।
फेडरेशन की राजनीति के शिकार हुए कोच सलमान इकबाल?
यह पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान की खेल संस्थाओं में राजनीति और व्यक्तिगत प्रतिशोध के कारण टैलेंट को नुकसान हुआ हो। सलमान इकबाल जैसे कोच, जिन्होंने अरशद नदीम को विश्व स्तर तक पहुंचाया, अब फेडरेशन की सियासी चालों का शिकार बन गए हैं।
फेडरेशन के कुछ अफसरों ने व्यक्तिगत अहम के चलते ऐसा कदम उठाया है, जिससे पाकिस्तान की एथलेटिक्स की साख एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।
क्या अरशद नदीम पर भी पड़ेगा असर?
अरशद नदीम, जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक और बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में पाकिस्तान का नाम रोशन किया था, अब अपने हेड कोच से अलग हो गए हैं। ऐसे में उनके आने वाले टूर्नामेंट्स में प्रदर्शन पर असर पड़ना तय है।
बिना उचित कोचिंग सपोर्ट के किसी भी खिलाड़ी के लिए लगातार सफलता हासिल करना कठिन होता है। ऐसे में अरशद का यह अकेलापन पाकिस्तान की खेल व्यवस्था की विफलता को उजागर करता है।
पाकिस्तान में स्पोर्ट्स मैनेजमेंट की ‘कॉमेडी’ जारी
जहां भारत जैसे देशों में खिलाड़ियों को लेटेस्ट ट्रेनिंग, कोचिंग और मानसिक सपोर्ट दिया जाता है, वहीं पाकिस्तान अब भी अपने टॉप खिलाड़ियों और कोचों को बैन और राजनीति के जाल में उलझा रहा है।
यह वही पाकिस्तान है जो अक्सर भारत से तुलना करता है, लेकिन खुद अपने खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण को सम्मान देना भूल जाता है।
मेहनत हार गई, राजनीति जीत गई
सलमान इकबाल का मामला साफ दिखाता है कि पाकिस्तान में मेहनत और प्रतिभा से ज्यादा राजनीति की कीमत है। एक कोच जिसने मुश्किल हालात में अपने खिलाड़ी को संभाला, उसे फेडरेशन ने निलंबित कर अपनी अयोग्यता साबित कर दी। अब सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान ऐसे फैसलों से अपने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा रहा है या खुद अपनी खेल संस्कृति को खत्म कर रहा है?
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