AIFF: अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ ने कहा कि बोली मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) नागेश्वर राव इंडियन सुपर लीग के व्यावसायिक अधिकारों के लिए कोई बोली न मिलने के बाद अपनी रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय को सौंपने वाले हैं। इससे पहले एआईएफएफ ने बीते शुक्रवार को घोषणा की थी कि उसे पहले से ही विलंबित आईएसएल के व्यावसायिक अधिकारों के लिए कोई बोली नहीं मिली है। इसके चलते हुए अब देश के घरेलू फुटबॉल का भविष्य अधर में लटक गया है।
सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौपेंगे न्यायमूर्ति राव :-
अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ ने कहा है कि बोली मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) नागेश्वर राव इंडियन सुपर लीग के व्यावसायिक अधिकारों के लिए कोई बोली न मिलने के बाद अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपने वाले हैं। वहीं इससे पहले भी तो एआईएफएफ ने बीते शुक्रवार को यह घोषणा की थी कि उसे पहले से ही विलंबित आईएसएल के व्यावसायिक अधिकारों के लिए कोई बोली नहीं मिली है। इसके चलते हुए अब भारत के घरेलू फुटबॉल का भविष्य अधर में लटक गया है।

इसके अलावा बोली मूल्यांकन समिति के अन्य दो सदस्य एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे और स्वतंत्र सदस्य के रूप में एशियाई फुटबॉल परिसंघ के केश्वरन मुरुगासु हैं। वहीं अब एआईएफएफ के बयान के अनुसार, “अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ की बोली मूल्यांकन समिति (बीईसी) ने रविवार को एक बैठक की, जिसमें सीमित अवधि के लिए एआईएफएफ से संबंधित वाणिज्यिक अधिकारों के मुद्रीकरण का अधिकार देने के लिए ‘प्रस्ताव’ की स्थिति की समीक्षा और चर्चा की गई है।”

इसके अलावा इस समिति के विचार-विमर्श के बाद बीईसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) नागेश्वर राव प्रक्रिया के अगले चरण के रूप में न्यायालय के सामने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले हैं। क्यूंकि इस बोली प्रक्रिया की निगरानी उच्चतम न्यायालय द्वारा की जा रही है और न्यायमूर्ति राव की नियुक्ति इस न्यायालय के आदेश पर ही की गई थी। इसके चलते हुए ही एआईएफएफ ने लीग के वाणिज्यिक अधिकारों के मुद्रीकरण हेतु 15 साल के अनुबंध के लिए 16 अक्टूबर को प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। जबकि प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि सात नवंबर थी।
स्पोर्ट्स से जुड़ी ताजा खबरों के लिए Sports Digest Hindi के साथ जुड़े रहें और हमें यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम, और ट्विटर (X) पर भी फॉलो करें।

