Amanjot Kaur Family Hid Grandmother’s Heart Attack News Before Women’s World World Cup Final: भारत की महिला टीम ने महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 जीतकर इतिहास रच दिया, लेकिन इस जीत की कहानी में एक ऐसा भावुक अध्याय भी छुपा था, जिसे सुनकर हर भारतीय का दिल भर आता है। मैदान पर अमनजोत कौर ने अपनी फील्डिंग से मैच पलट दिया, जबकि उसी समय उनके घर में उनकी दादी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही थीं। सबसे खास बात यह रही कि परिवार ने यह दर्द अमनजोत से छुपाए रखा, ताकि उनका ध्यान मैच के दौरान न भटके और वह देश के लिए पूरा देना जारी रखें।
यह कहानी सिर्फ जीत की नहीं है, बल्कि एक बेटी के सपनों और परिवार के जुनून की है। यह उस रिश्ते की भी दास्तान है जिसमें एक दादी ने अपनी पोती को लड़कों के बीच क्रिकेट खेलने का हौसला दिया और आज वही पोती भारत की विश्व विजेता बनी। वर्ल्ड कप जीत ने पूरे भारत को खुशी दी, लेकिन अमनजोत के परिवार के लिए यह मुश्किल समय में उम्मीद बनकर आई।
बचपन से अमनजोत का हौसला बढ़ाती थीं दादी भगवंती
अमनजोत कौर की क्रिकेट में शुरुआती ताकत उनकी 75 वर्षीय दादी भगवंती रहीं और यह बात उनके पिता भूपिंदर सिंह खुद स्वीकारते हैं। जब अमनजोत ने अपने मोहाली के फेज 5 इलाके में गली में पड़ोस के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना शुरू किया, तब उनकी दादी हर दिन पार्क में कुर्सी लगाकर बैठ जाती थीं। वह न सिर्फ उन्हें खेलते हुए देखती थीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती थीं कि कोई उनकी पोती को परेशान करने की कोशिश न करे। दादी के भीतर अपनी पोती को आगे बढ़ते देखने का गर्व साफ झलकता था। यह समर्थन ही वह नींव बना जिसने अमनजोत को मजबूत व्यक्तित्व और आत्मविश्वास दिया।
उस दौर में लड़कियों का लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना उतना सामान्य नहीं था, लेकिन दादी की सोच हमेशा आगे की रही। उन्होंने परिवार में सबसे पहले यह समझा कि उनकी पोती में प्रतिभा है और उसे रुकने नहीं देना चाहिए। जब भी भूपिंदर अपनी बढ़ई की दुकान पर रहते, दादी घर के बाहर बैठकर अमनजोत पर निगाह रखती थीं ताकि वह सुरक्षित और आत्मविश्वास के साथ खेल सके।
वर्ल्ड कप फाइनल के दौरान परिवार ने दर्द छुपा लिया
फाइनल से पहले एक बड़ा भावनात्मक दौर परिवार के सामने आ चुका था। पिछले महीने दादी भगवंती को हार्ट अटैक आया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। परिवार के लिए यह समय मानसिक रूप से बेहद कठिन था, लेकिन भूपिंदर सिंह ने यह बात अमनजोत से छुपाने का फैसला किया। उनका मानना था कि बेटी वर्ल्ड कप खेल रही है और यह समय उसे किसी भी तनाव से दूर रखने का है। इसी कारण उन्होंने यह जानकारी उनसे साझा नहीं की ताकि उनका ध्यान मैच से न हटे।
वर्ल्ड कप के फाइनल के दौरान भी भूपिंदर अस्पताल और क्रिकेट मैच के बीच लगातार अपडेट लेते रहे। वह अपनी मां को फोन पर मैच की जानकारी देते रहे ताकि उनका मनोबल टूटे नहीं। परिवार के लिए यह एक अनोखा समय था, जहां भावनाएं, चिंता और गर्व तीनों एक साथ मौजूद थे।
कठिन समय में सहारा बनी भारत की वर्ल्ड कप जीत
भूपिंदर सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया कि दादी भगवंती ने अमनजोत को बचपन से प्रेरित किया और हमेशा उसके करियर का आधार बनी रहीं। हर छोटी-बड़ी उपलब्धि दादी के लिए उत्सव की तरह होती थी। हार्ट अटैक और अस्पताल में भर्ती होने के बाद वे भावनात्मक रूप से कमजोर थीं, लेकिन भारत की वर्ल्ड कप जीत उनके लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर आई। यह जीत परिवार के लिए मानसिक राहत और एक सकारात्मक ऊर्जा लेकर आई, जो उस समय बेहद जरूरी थी।
वर्ल्ड कप का खिताब सिर्फ खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए भी बड़ी जीत है, जिन्होंने कई त्याग किए और अपने बच्चों के सपनों में विश्वास बनाए रखा। अमनजोत के परिवार के लिए यह उपलब्धि ऐसे समय में आई जब वे भावनात्मक रूप से टूट रहे थे। इस जीत ने उन्हें संबल दिया और दादी के चेहरे पर मुस्कान वापस लाई।
फाइनल मैच में अमनजोत ने फील्डिंग से बदल दी कहानी
फाइनल मुकाबले में अमनजोत बल्ले और गेंद से प्रदर्शन नहीं कर पाईं, लेकिन फील्डिंग में उन्होंने मैच पलटने जैसा योगदान दिया। साउथ अफ्रीका 299 रन का पीछा कर रही थी और उनकी ओपनिंग जोड़ी लौरा वुल्वार्ट और ताजमिन ब्रिट्स ने बेहतरीन शुरुआत की। भारत को शुरुआती विकेट की सख्त जरूरत थी और यह जिम्मेदारी अमनजोत ने पूरी की। उन्होंने मिड विकेट से सीधे थ्रो पर ब्रिट्स को रन आउट किया और मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया।
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इसके बाद जब वुल्वार्ट ने शतक पूरा कर लिया था और मैच साउथ अफ्रीका की पकड़ में जाता दिख रहा था, तभी अमनजोत ने एक और अहम योगदान दिया। उन्होंने डीप मिड विकेट पर वुल्वार्ट का शानदार कैच पकड़ा, जिसने मैच का संतुलन पूरी तरह बिगाड़ दिया और भारत की जीत सुनिश्चित हो गई। यह कैच पूरे टूर्नामेंट के सबसे अहम मोमेंट्स में शामिल रहा।
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