भारती फूलमाली की कहानी संघर्ष, धैर्य और खुद को नए बदलावों से तैयार करने की मिसाल है।
क्रिकेट में वापसी सिर्फ फॉर्म से नहीं होती, इसके पीछे संघर्ष, धैर्य और खुद को बदलने की हिम्मत भी होती है। भारती फूलमाली (Bharti Fulmali) की कहानी इसी जज्बे की मिसाल है, जहां हालात ने उन्हें बार-बार परखा, लेकिन उन्होंने हार मानकर खुद को नए फिगर से तैयार किया।
सात साल पहले टीम इंडिया से बाहर होने के बाद जिस खिलाड़ी को भविष्य अनिश्चित लगने लगा था, वही भारती फूलमाली आज फिर राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन रही हैं। यह सफर सिर्फ रन और छक्कों का नहीं, बल्कि सोच, मेहनत और तालमेल को दोबारा हासिल करने की कहानी है।
नौकरी के फॉर्म और अनिश्चित भविष्य से शुरुआत
कुछ साल पहले तक भारती फूलमाली की सुबहें क्रिकेट से ज्यादा सरकारी नौकरी के फॉर्म भरने में गुजरती थीं। रेलवे, इनकम टैक्स, पोस्टल सर्विस और दूसरी सरकारी भर्तियों के विज्ञापन देखना उनकी दिनचर्या की आदत बन चुकी थी।
परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उनके पिता पर थी, जो स्कूल टीचर हैं और रिटायरमेंट के भी करीब थे। घरेलू क्रिकेट से मिलने वाली कमाई इतनी नहीं थी कि घर का खर्च चल सके। ऐसे में भारती फूलमाली के पास बैकअप प्लान बनाना मजबूरी था।
इनकम टैक्स की नौकरी और क्रिकेट के बीच बैलेंस
2023 के बीच में भेजे गए सैकड़ों फॉर्म में से एक ने किस्मत बदली और उन्हें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से बेंगलुरु में क्लर्क की नौकरी मिली। इससे परिवार को स्टेबिलिटी मिली और भारती फूलमाली को यह भरोसा भी मिला कि अगर क्रिकेट नहीं चला तो उनका जीवन नहीं रुकेगा।
उन्होंने साफ कहा कि परिवार ने कभी उन पर क्रिकेट छोड़ने का प्रेशर नहीं बनाया। यही भावुक सहारा उनका सबसे बड़ा बल बना।
सात साल बाद फूलमाली ने की टीम इंडिया में वापसी
2019 में दो टी20 इंटरनेशनल खेलने के बाद भारती फूलमाली टीम इंडिया से बाहर हो गई थीं। इसके बाद लंबा सन्नाटा रहा। अब सात साल बाद ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए उन्हें फिर से भारतीय टीम में चुना गया है।
भारती फूलमाली इसे अपना दूसरा डेब्यू मानती हैं। उनके लिए यह सिर्फ सिलेक्शन नहीं, बल्कि खुद पर दोबारा भरोसा जीतने का पल है।
फिनिशर बनने का फैसला और सोच में बदलाव
WPL 2023 ऑक्शन में अनसोल्ड रहने के बाद भारती फूलमाली ने इंतजार करने के बजाय खुद को बदलने का फैसला किया। उन्होंने तय किया कि वह फिनिशर बनेगी।
WPL 2025 के बाद गुजरात जायंट्स के कोच माइकल क्लिंगर से बातचीत ने उनकी सोच बदल दी। मैसेज साफ था कि हर खिलाड़ी टीम की टॉप स्कोरर नहीं बन सकता, लेकिन सही रोल में कुछ मैच अकेले जीता जा सकता है।
नेट्स छोड़ की सेंटर विकेट पर मेहनत
इसके बाद भारती फूलमाली ने अपनी ट्रेनिंग पूरी तरह बदल दी। उन्होंने नेट प्रैक्टिस छोड़कर सेंटर विकेट सिमुलेशन और रेंज हिटिंग पर फोकस किया।
टेनिस बॉल से 200 से 250 गेंदें रोज हिट करना, फील्ड के गैप बनाए और लिमिटेड बॉल में असर डालना, यही उनका नया तरीका बन गया। शुरुआत में कोच को शक था, लेकिन दौरे ने सब साफ कर दिया।
WPL में बदला नजरिया, बदला प्रदर्शन
इस बदलाव का असर सीधे WPL में दिखा। उन्होंने यूपी वॉरियर्स के खिलाफ 7 बॉल पर नाबाद 14 रन, मुंबई इंडियंस के खिलाफ 15 बॉल पर नाबाद 36 रन और फिर RCB के खिलाफ 20 बॉल पर 39 रन बनाए। इन पारियों ने भारती फूलमाली को एक भरोसेमंद फिनिशर के रूप में स्थापित कर दिया।
सोफी डिवाइन के साथ हेल्दी मुकाबला
ट्रेनिंग के दौरान सोफी डिवाइन के साथ उनकी रेंज हिटिंग की प्रतियोगिता भी चर्चा में रही। दोनों एक दूसरे को बेहतर बनने की चुनौतियां देती हैं। भारती फूलमाली मानती हैं कि ऐसा हेल्दी कॉम्पटीशन ही मैच में आत्मविश्वास बढ़ाता है।
अब नजर WPL ट्रॉफी और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर
भारती फूलमाली ने एक इंटरव्यू में बताया कि टीम इंडिया में वापसी की खबर आने के बाद वह रात भर सो नहीं सकीं। उनके अंदर पुराने डर और नए उत्साह दोनों साथ थे, लेकिन अब वह पूरी तरह वर्तमान पर फोकस कर रही हैं।
भारती फूलमाली के लिए अब आगे का लक्ष्य पहले WPL 2026 में गुजरात जायंट्स के लिए ट्रॉफी जीतना और फिर ऑस्ट्रेलिया में अपने दूसरे डेब्यू को यादगार बनाना है। यह कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर की नहीं, बल्कि धैर्य, मेहनत और खुद को दोबारा खोजने की मिसाल है।
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