भारत के महान स्पिनर अनिल कुंबले ने 2002 में एंटीगा टेस्ट में वेस्टइंडीज के खिलाफ़ खेलते समय जबड़ा टूट जाने के बाद भी विपक्षी टीम के खिलाफ गेंदबाजी की थी। जब उन्होंने यह फैसला लिया तो उनकी पत्नी चेतना को लगा कि वह मजाक कर रहे हैं। उस समय कैरेबियाई टीम में ब्रायन लारा जैसे बल्लेबाज थे जिन्हें कुंबले सबसे कठिन बल्लेबाजों में से एक मानते थे । लारा के पास एक गेंद के लिये तीन शॉट हुआ करते थे। इसके बावजूद कुंबले ने ऐसा बहादुरी भरा फैसला लिया और टूटे हुए जबड़े के साथ 14 ओवर डाले और ब्रायन को भी आउट किया। पांच मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर थी और चौथा टेस्ट मैच चल रहा था। कुंबले बल्लेबाजी करने उतरे और उन्हें मर्वन डिल्लन की बाउंसर गेंद जबड़े पर लगी। उनके मुंह से खून निकलने लगा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। चोट लगाने के बाद भी वो मैदान पर बने रहे।
एंटीगुआ टेस्ट के दौरान टीम को परेशानी में देखकर जब उन्होंने चेहरे पर पट्टी बांधकर टूटे हुए जबड़े के साथ वेस्टइंडीज टीम के खिलाफ़ गेंदबाजी करने का फैसला किया
2002 टेस्ट मैच कैसे बन गया इतिहास और इस मैच अनिल कुंबले की भागीदारी क्या थी

इस मैच में 6 विकेट गिरने के बाद अनिल कुंबले को सातवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया था, इसी दौरान मर्विन डिल्लों की एक बाउंसर गेंद को खेलते हुए मुह पर एक बॉल तेज गति से लगने के बाद उनका जबड़ा टूट गया था लेकिन खून बहने के बावजूद उन्होंने 20 मिनट तक बल्लेबाजी की।
उसके बाद कुंबले ने अपने चेहरे पर पट्टी लपेटकर गेंदबाजी करते हुए अपने समय के सबसे कठिन बल्लेबाजों में से एक ब्रायन लारा का विकेट लिया और 14 ओवर गेंदबाजी की थी। उन्होंने कहा की उस वक्त कि अच्छी बात यह थी कि उस दौर के अधिकांश बेहतरीन खिलाड़ी मेरी टीम में थे। भारत की ओर से 500 विकेट लेने वाले पहले प्लेयर कुंबले ने टेस्ट क्रिकेट में कुल 619 विकेट लिए और वह भारत की ओर से तीसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले प्लेयर हैं।
टूटे जबड़े के साथ 2002 टेस्ट में खेलने पर भारत के पूर्वकप्तान रहे कुंबले ने क्या बताया

जियो सिनेमा के होम ऑफ हीरोज शो पर जब अनिल कुंबले से इस घटना को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि,
“मुझे जहाँ तक याद है, मैं ही प्लेइंग XI में टीम की ओर से एकमात्र स्पिनर था। इस सीरीज़ में मुझे पहले दो टेस्ट मैचों में जगह नहीं मिली थी। पहले टेस्ट मैच के बाद मुझे ड्रॉप कर दिया गया था। मैं चोट के बाद टीम में वापसी कर रहा था, तो मुझे यह जानकारी थी कि मुझे जाना है और भारतीय टीम को मैच जिताना है। इसलिए मैंने फैसला लिया कि मैं चोट के बावजूद भी गेंदबाज़ी करूँगा। मैंने अपनी पत्नी चेतना को इस बारे में फ़ोन पर बताया।
कुंबले ने आगे कहा, ‘मैंने उससे कहा था कि मुझे पता है कि मुझे घर लौटकर आना है और मुझे सर्जरी की ज़रूरत होगी, लेकिन मैं जाऊँगा और अपनी टीम के लिए गेंदबाज़ी करूँगा। लेकिन मुझे लगता है कि उसे लगा था कि मैं मज़ाक कर रहा हूँ। और फिर मैं वापस ड्रेसिंग रूम चला गया। मुझे नहीं लगता कि उसने मेरी बात को गंभीरता से लिया भी था।
जब मैं ड्रेसिंग रूम में पहुँचा तो देखा कि सचिन तेंदुलकर गेंदबाज़ी कर रहे हैं। मुझे लगा कि अगर हम वेस्टइंडीज के विकेट जल्द गिरा लेते तो हमारे पास मैच जीतने का मौक़ा है। ऐसे में मैंने एंड्रयू लीपस (फ़िज़ियोथेरेपिस्ट) से कहा कि मुझे वहाँ से बाहर निकालो।”
कुंबले अगले दिन सर्जरी के लिए बेंगलुरु आने वाले थे।
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