Cheteshwar Pujara Best Test Innings: भारतीय क्रिकेट टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज़ चेतेश्वर पुजारा ने 24 अगस्त 2025 (रविवार) को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेकर अपने शानदार करियर का अंत कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करके भावुक अंदाज में उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने उनकी यहाँ तक की यात्रा में सहयोग दिया।
Wearing the Indian jersey, singing the anthem, and trying my best each time I stepped on the field – it’s impossible to put into words what it truly meant. But as they say, all good things must come to an end, and with immense gratitude I have decided to retire from all forms of… pic.twitter.com/p8yOd5tFyT
— Cheteshwar Pujara (@cheteshwar1) August 24, 2025
चेतेश्वर पुजारा का नाम उस दौर से जुड़ा है, जब भारत ने विदेशी धरती पर जीत का नया इतिहास लिखा। पुजारा ने अपने करियर में कई बार साबित किया कि टेस्ट क्रिकेट में रन बनाने के लिए सिर्फ़ शॉट्स की नहीं, बल्कि धैर्य, संयम और मानसिक मज़बूती की भी ज़रूरत होती है। इसीलिए, आज के समय में उनके जैसा बल्लेबाज मिलना काफी मुश्किल है।
चेतेश्वर पुजारा का टेस्ट करियर
चेतेश्वर पुजारा ने 2010 में बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था और कुछ ही समय में भारतीय टेस्ट टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ों में जगह बना ली। वे नंबर 3 पर बल्लेबाज़ी करने के लिए जाने गए, जो भारतीय क्रिकेट में हमेशा सबसे अहम स्थान माना जाता है। पुजारा ने अपने 15 साल लंबे करियर में कुल 103 टेस्ट मैच खेले और 43.60 की औसत से 7,195 रन बनाए। उनके बल्ले से 19 शतक और 35 अर्धशतक निकले, जिनमें से कई पारियाँ भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक साबित हुईं। खासकर विदेशी सरज़मीं पर उन्होंने अद्भुत धैर्य और क्लास दिखाई और ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड तथा दक्षिण अफ्रीका जैसे कठिन दौरों में भी खुद को साबित किया।
पुजारा की चट्टान जैसी स्थिरता और गेंदबाज़ों को थकाकर हराने करने की कला उनकी बल्लेबाज़ी की असली पहचान रही। वे अक्सर लंबे समय तक क्रीज़ पर टिककर भारतीय पारी को सहारा देते रहे और टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला।
2018-19 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी पारियाँ भारत की ऐतिहासिक सीरीज़ जीत की नींव बनीं, वहीं 2020-21 के ब्रिसबेन टेस्ट में उनका जज़्बा और साहस भारत की दूसरी ऐतिहासिक जीत में यादगार रहा।
पुजारा ने 24 अगस्त 2025 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की और अपने पीछे ऐसा करियर छोड़ा जो उन्हें भारतीय टेस्ट क्रिकेट की रीढ़ और आधुनिक युग के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ों में शुमार करता है।
चेतेश्वर पुजारा के टेस्ट करियर की 10 सर्वश्रेष्ठ पारियाँ
पुजारा को उनके धैर्य से खेलने की क्षमता के चलते ‘मिस्टर डिपेंडेबल’ और ‘भारतीय क्रिकेट की नई दीवार’ कहा गया, क्योंकि उन्होंने राहुल द्रविड़ की तरह नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करते हुए भारत को मज़बूत नींव दी। उनकी कई पारियाँ भारतीय क्रिकेट टीम की जीत में निर्णायक साबित हुईं। यहाँ हम चेतेश्वर पुजारा के टेस्ट करियर की 10 सर्वश्रेष्ठ पारियों पर एक नज़र डालने जा रहे हैं।
1. 206* बनाम इंग्लैंड, अहमदाबाद, 2012
2012 में इंग्लैंड के खिलाफ अहमदाबाद में खेले गए पहले टेस्ट में शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के बाद भारतीय टीम दबाव में आ गई थी। ऐसे में चेतेश्वर पुजारा ने क्रीज़ पर आते ही हालात संभाले और धैर्यपूर्वक बल्लेबाज़ी करते हुए इंग्लिश गेंदबाज़ों की सारी योजनाओं को नाकाम कर दिया। उन्होंने नौ घंटे से ज्यादा बल्लेबाज़ी की और अपनी तकनीक और संयम से पूरी पारी को थामे रखा।
पुजारा ने उस पारी में नाबाद 206 रन बनाए, जो उनके टेस्ट करियर का पहला दोहरा शतक था। उन्होंने युवराज सिंह और विराट कोहली के साथ अहम साझेदारियाँ करके भारत को पहली पारी में 521/8 (घोषित) तक पहुँचाया। जवाब में उतरी इंग्लैंड की टीम पहली पारी में 191 पर सिमट गई और दूसरी पारी में 406 रन ही बना सकी। इसके बाद, भारत ने एक विकेट खोकर 77 रनों का लक्ष्य हासिल कर लिया और 9 विकेट से जीत भी दर्ज की।
2. 135 बनाम दक्षिण अफ्रीका, जोहान्सबर्ग, 2013
2013 में जोहान्सबर्ग के वांडरर्स मैदान पर खेले गए एक मुकाबले में भारत ने दक्षिण अफ्रीका का सामना किया, जहाँ तेज़ और उछाल भरी पिच पर बल्लेबाज़ों के लिए रन बनाना आसान नहीं था। इस मुकाबले में भारत ने पहली पारी में 280 रन बनाए, लेकिन दूसरी पारी में जब टीम को बढ़त को मज़बूत करना था, तब पुजारा ने सबसे कठिन घड़ी में बल्लेबाज़ी की। उन्होंने डेल स्टेन, मॉर्ने मोर्केल और वर्नन फिलेंडर जैसे खतरनाक गेंदबाज़ों का डटकर सामना किया।
पुजारा ने 270 गेंदों पर 135 रन बनाकर भारत को 421 रन तक पहुँचाया और दक्षिण अफ्रीका के सामने 458 रनों का लक्ष्य रखा। हालांकि, यह मैच ड्रॉ रहा, लेकिन इस कठिन हालात में पुजारा की पारी ने टीम इंडिया की लड़ाई को ज़िंदा रखा। उनकी यह पारी विदेशी पिच पर उनके धैर्य और क्लास का बड़ा सबूत मानी जाती है।
3. 153 बनाम श्रीलंका, कोलंबो, 2017
2017 में कोलंबो के एसएससी ग्राउंड पर खेले गए टेस्ट में भारत शुरुआती विकेट गंवाकर मुश्किल में आ गया था। बल्लेबाज़ी का हाल देखकर लग रहा था कि टीम बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर पाएगी, लेकिन पुजारा ने क्रीज़ पर जमकर श्रीलंकाई गेंदबाज़ों को थकाया। उन्होंने 153 रनों की शानदार पारी खेली और अजिंक्य रहाणे के साथ मिलकर बड़ी साझेदारी की।
इस मुकाबले में भारत ने पहली पारी में 622/9 (घोषित) का बड़ा स्कोर बनाया और श्रीलंका को पस्त कर दिया। मेज़बान टीम दोनों पारियों में जूझती रही और भारत ने एक पारी और 53 रनों से यह मैच जीत लिया। पुजारा की यह पारी विदेशी धरती पर उनकी बड़ी जीतों में से एक की अहम कड़ी बनी।
4. 202 बनाम ऑस्ट्रेलिया, रांची, 2017
2017 में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के रांची टेस्ट में जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया का सामना किया तो मैच की दिशा पूरी तरह बदल गई थी। इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 451 रन बनाए थे, जिसके चलते भारत पर बड़ा दबाव आ गया था। पहली पारी में भारत की शुरुआत भी साधारण रही, लेकिन पुजारा ने जैसे ही क्रीज़ पर पैर जमाए, उन्होंने मैच का चेहरा बदल दिया।
पुजारा ने लगभग 11 घंटे तक बल्लेबाज़ी कर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों को थका दिया और 202 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली,। इस पारी ने भारत को 603/9 (घोषित) तक पहुँचाया और यह मैच ड्रॉ हो गया। अगर पुजारा इतनी लंबी पारी न खेलते तो भारत हार की कगार पर होता। यह पारी उनकी धैर्य और सहनशक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण मानी जाती है।
5. 123 बनाम ऑस्ट्रेलिया, एडिलेड, 2018
2018-19 की ऐतिहासिक ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ का पहला टेस्ट एडिलेड में खेला गया था। इस मैच में भारत की शुरुआत बेहद खराब रही और टीम ने पहले ही दिन जल्दी चार विकेट गंवा दिए। ऐसे में पुजारा ने पारी को संभाला और संयम के साथ बल्लेबाज़ी करते हुए शतक जमाया। उन्होंने 246 गेंदों पर 123 रन बनाए और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचाया।
भारत ने पहली पारी में 250 रन बनाए और दूसरी पारी में भी पुजारा ने 71 रन जोड़कर टीम को 307 तक पहुँचाया। ऑस्ट्रेलिया 323 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 291 रन पर ढेर हो गया और भारत ने 31 रनों से जीत दर्ज की। यह वही पारी थी जिसने भारत की ऑस्ट्रेलिया में पहली सीरीज़ जीत की नींव रखी।
6. 193 बनाम ऑस्ट्रेलिया, सिडनी, 2019
2018-19 की ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर सीरीज़ का चौथा टेस्ट सिडनी में खेला गया था। इस मैच से पहले भारत इस सीरीज़ में बढ़त बना चुका था और यहाँ जीत या ड्रॉ से इतिहास रच सकता था। इस मुकाबले में भारतीय टीम जल्दी ही शुरुआती विकेट खो चुकी थी, जिसके बाद पुजारा एक बार फिर मुश्किल हालात में उतरे और धैर्यपूर्वक पारी को संभाला। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों को थकाते हुए 373 गेंदों पर 193 रन ठोके।
पुजारा की इस पारी की बदौलत भारत ने पहली पारी में 622/7 (घोषित) का बड़ा स्कोर खड़ा किया। इस मैच में ऑस्ट्रेलिया दोनों पारियों में संघर्ष करता रहा और बारिश से प्रभावित मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ। हालांकि, इस मैच में भारतीय टीम को भले ही जीत नहीं मिली, लेकिन पुजारा की पारी ने ऑस्ट्रेलिया में भारत को पहली टेस्ट सीरीज़ जीत (2-1) सुनिश्चित कर दिया था। इस सीरीज में उन्हें मैन ऑफ द सीरीज़ भी चुना गया था।
7. 132* बनाम इंग्लैंड, नागपुर, 2012
2012 में इंग्लैंड के खिलाफ नागपुर में खेला गया टेस्ट मैच भारत के लिए अहम था, क्योंकि सीरीज़ दांव पर लगी थी। भारत ने उस मैच में शुरुआत में जल्दी विकेट खो दिए थे और पिच पर बल्लेबाज़ी बेहद कठिन साबित हो रही थी। ऐसे मुश्किल हालात में पुजारा ने संयम दिखाया और एक छोर थामे रखा। उन्होंने उस पारी में नाबाद 132 रन बनाए और इंग्लिश गेंदबाज़ों की सारी योजनाओं को नाकाम कर दिया।
भारत ने पहली पारी में 326 रन बनाए और मैच अंततः ड्रॉ हो गया। हालाँकि, भारत यह सीरीज़ हार गया, लेकिन इस पारी ने पुजारा को टेस्ट क्रिकेट में टीम का सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ साबित कर दिया। नागपुर की धीमी पिच पर उनकी बल्लेबाज़ी धैर्य और तकनीक का सच्चा नमूना थी।
8. 145 बनाम श्रीलंका, कोलंबो (सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब), 2015
2015 में कोलंबो के एसएससी ग्राउंड पर भारत और श्रीलंका के बीच सीरीज़ निर्णायक टेस्ट खेला जा रहा था। यह पिच बल्लेबाज़ों के लिए आसान नहीं थी और भारत ने जल्दी विकेट भी खो दिए थे, लेकिन ओपनर बनकर आए पुजारा ने शानदार जिम्मेदारी निभाई और 145 रनों की नाबाद पारी खेली।
उनकी इस पारी से भारत ने पहली पारी में 312 रन बनाए और फिर अश्विन की शानदार गेंदबाज़ी ने श्रीलंका को दोनों पारियों में जल्दी समेट दिया। परिणामस्वरूप, भारत ने 117 रनों से यह मैच जीत लिया और 22 साल बाद श्रीलंका में कोई टेस्ट सीरीज़ जीतने में सफल रहा। पुजारा की यह पारी विदेशी सरजमीं पर उनके धैर्य और क्लास का बड़ा सबूत बनी।
9. 73 बनाम ऑस्ट्रेलिया, गाबा (ब्रिस्बेन), 2021
2020-2021 की ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर सीरीज़ का निर्णायक टेस्ट गाबा में खेला गया था, जहाँ ऑस्ट्रेलिया पिछले 32 साल से अजेय था। भारत को सीरीज़ जीतने के लिए अंतिम पारी में 328 रनों का पीछा करना था। शुभमन गिल ने शुरुआत में 91 रन बनाए और बाद में ऋषभ पंत ने शानदार पारी खेली, लेकिन बीच में जब ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ दबाव बना रहे थे, तब पुजारा ने क्रीज़ पर डटकर मुकाबला किया।
उन्होंने 211 गेंदों पर 73 रन बनाए, लेकिन इस पारी की असली अहमियत उनके द्वारा झेले गए बाउंसर और चोटें थीं। वे कई बार गेंद लगने के बावजूद डटे रहे और बाकी बल्लेबाज़ों को आज़ादी से खेलने का मौका दिया। भारत ने यह मैच 3 विकेट से जीता और सीरीज़ 2-1 से अपने नाम की। पुजारा की यह पारी आँकड़ों से ज्यादा उनकी जुझारूपन और टीम के लिए खड़े रहने का प्रतीक थी।
10. 90 बनाम दक्षिण अफ्रीका, जोहान्सबर्ग, 2018
2018 में जोहान्सबर्ग की उछाल भरी पिच पर भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच तीसरा टेस्ट खेला गया था। यह मैच तेज़ गेंदबाज़ों के लिए स्वर्ग साबित हो रहा था और बल्लेबाज़ों को टिकना बेहद मुश्किल हो रहा था। भारत पहली पारी में 187 रन पर सिमटा, लेकिन दूसरी पारी में पुजारा ने अलग ही जज़्बा दिखाया।
उन्होंने 179 गेंदों पर 90 रन बनाए और दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाज़ों को थकाकर भारत को मैच में बनाए रखा। भारत ने दूसरी पारी में 247 रन बनाए और अंततः 63 रनों से यह मैच जीत लिया। पुजारा की यह पारी भले ही शतक में नहीं बदली, लेकिन हालात और पिच की कठिनाई को देखते हुए इसे उनकी सबसे जुझारू पारियों में गिना जाता है।
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