भारत के ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे महानतम बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर थे। उन्होंने अपनी बल्लेबाज़ी से दुनिया भर के गेंदबाज़ों को नाकों चने चबवा के रखे थे। अपने 24 साल लंबे करियर में उन्होंने भारतीय टीम की उम्मीदों को हमेशा कायम रखा। वो जब भी बल्लेबाज़ी के लिए जाते थे तो पूरे देश की उम्मीदें उन्हीं के ऊपर टिक जाती थीं।
पितामह भीष्म हों, अर्जुन हो या फिर सचिन तेंदुलकर, सभी के जीवन में उनके गुरु का बहुत महत्व है। वो जो कुछ भी हैं, उसमें उनके गुरुजनों ने अहम भूमिका निभाई, जिसके चलते वे अपने क्षेत्र में प्रसिद्धि प्राप्त कर सके।
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन के गुरु रमाकांत आचरेकर के स्वभाव काफ़ी सख्त थे, जिसकी वजह से ही वे इतने महान खिलाड़ी बन पाए। ऐसे ही एक बार उनके गुरु ने सबके सामने थप्पड़ मार दिया था, जिसने इस दिग्गज खिलाड़ी की ज़िंदगी बदल कर रख दी।
आचरेकर चाहते थे उनके शिष्य बनें अच्छे खिलाड़ी

सचिन तेंदुलकर और उनके कोच रमाकांत आचरेकर की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी और उसके गुरु की नहीं है, बल्कि यह उस रिश्ते की मिसाल है जिसमें डांट, सख़्ती और प्यार सब कुछ होता है। आचरेकर सर बहुत सख्त इंसान थे। वे ज़्यादा बोलते नहीं थे, तारीफ़ करना तो बहुत दूर की बात थी। लेकिन उन्हें अपने शिष्यों की काबिलियत पर पूरा भरोसा रहता था। बस वो चाहते थे कि हर खिलाड़ी मेहनत करे, नियम से चले और कभी बहाने न बनाए।
जब सचिन 11 साल के थे, तब उनके बड़े भाई अजीत उन्हें क्रिकेट सिखाने के लिए आचरेकर सर के पास लेकर गए। तब सचिन थोड़े शरारती और बेफ़िकर थे। क्रिकेट को वे सीरियसली नहीं लेते थे। लेकिन आचरेकर सर की एक सीख ने सब कुछ बदल दिया। एक बार की बात है। स्कूल की सीनियर टीम वानखेड़े स्टेडियम में हैरिस शील्ड का फ़ाइनल खेल रही थी।
प्रैक्टिस छोड़ मैच देखने गए सचिन को आचरेकर सर ने मारा थप्पड़
उधर, आचरेकर सर ने सचिन के लिए एक प्रैक्टिस मैच रखा था और कहा था कि “तुम्हें चौथे नंबर पर बल्लेबाज़ी करनी है।” लेकिन सचिन प्रैक्टिस छोड़कर स्टेडियम चले गए, अपने स्कूल की टीम को चीयर करने।
मैच के बाद जब आचरेकर सर ने सचिन को देखा, तो सबसे पहले पूछा “आज कितने रन बनाए?” उन्होंने अपने गुरु से कहा, “सर, मैं प्रैक्टिस में गया ही नहीं। मैं तो बस मैच देखने आया था।” बस, इतना सुनना था कि उनकी हाथ उठ गया। उन्होंने इस दिग्गज बल्लेबाज को एक ज़ोरदार थप्पड़ मारते हुए कहा “तुम दूसरों के लिए तालियां बजा रहे हो, लेकिन मैं चाहता हूं कि एक दिन लोग तुम्हारे लिए तालियां बजाएं।”
एक थप्पड़ ने सचिन की ज़िंदगी बदलकर रख दी
यह थप्पड़ सिर्फ एक डांट नहीं थी, वो एक आंख खोलने वाला मोड़ था सचिन की ज़िंदगी में। उसके बाद सचिन ने क्रिकेट को पूरी गंभीरता से लेना शुरू किया, जमकर मेहनत की, और वही लड़का एक दिन दुनिया का सबसे बड़ा बल्लेबाज़ बना। आज भी सचिन उस दिन को, उस थप्पड़ को और आचरेकर सर के उस एक वाक्य को नहीं भूल पाए हैं। क्योंकि वही एक पल था जिसने उन्हें ‘सचिन तेंदुलकर’ बना दिया।
इस गलती के बाद सचिन को जिंदगी की सीख मिली और उसके बाद उन्होंने कभी भी प्रैक्टिस मैच मिस नहीं करा। इस दिग्गज बल्लेबाज ने जीत तोड़ मेहनत की और अपने गुरु का नाम ऊंचा कर दिया। इस घटना ने ही इनको इतना बड़ा बल्लेबाज बनने के लिए प्रेरित किया।

