Thursday, March 12

पूर्व चीफ सेलेक्टर संदीप पाटिल ने कहा कि एमएस धोनी ने कभी भी चयन समिति से युवराज सिंह को टीम से बाहर करने के लिए नहीं कहा।

भारतीय क्रिकेट में एमएस धोनी (MS Dhoni) और युवराज सिंह (Yuvraj Singh) दो ऐसे नाम हैं जिन्होंने कई ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, इन दोनों खिलाड़ियों के नाम कई बार विवादों में भी साथ लिए गए, खासकर युवराज के पिता योगराज सिंह (Yograj Singh) द्वारा लगाए गए आरोपों की वजह से।

योगराज सिंह कई सालों से सार्वजनिक रूप से यह कहते रहे हैं कि युवराज सिंह को टीम से बाहर करने में एमएस धोनी की भूमिका थी। लेकिन अब इस विवाद पर पूर्व चीफ सेलेक्टर संदीप पाटिल (Sandeep Patil) ने बड़ा खुलासा करते हुए एक अलग ही तस्वीर पेश की है।

योगराज सिंह ने फिर दोहराए आरोप

योगराज सिंह लंबे समय से एमएस धोनी की आलोचना करते रहे हैं। उनका मानना है कि उनके बेटे युवराज सिंह के साथ उस दौर में अन्याय हुआ था।

हाल ही में एक यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान योगराज सिंह ने कहा, “मैं एमएस धोनी को कभी माफ नहीं करूंगा। उन्हें आईने में खुद को देखना चाहिए। वह बहुत बड़े क्रिकेटर हैं, मैं उन्हें सलाम करता हूं, लेकिन उन्होंने मेरे बेटे के साथ जो किया वह माफ करने लायक नहीं है। अब सच्चाई सामने आ रही है।”

योगराज सिंह का यह भी मानना है कि अगर युवराज सिंह को और मौके मिले होते तो उनका अंतरराष्ट्रीय करियर कुछ साल और लंबा हो सकता था।

उन्होंने कहा, “उस आदमी ने मेरे बेटे की जिंदगी बर्बाद कर दी। वह चार या पांच साल और खेल सकता था। मैं सभी को चुनौती देता हूं कि युवराज सिंह जैसा बेटा पैदा करके दिखाएं।”

संदीप पाटिल ने आरोपों को किया खारिज

हालांकि, अब इस पूरे मामले पर पूर्व चीफ सेलेक्टर संदीप पाटिल ने साफ तौर पर कहा है कि एमएस धोनी ने कभी चयन समिति पर युवराज सिंह को टीम से बाहर करने का दबाव नहीं बनाया।

एक इंटरव्यू में संदीप पाटिल ने कहा, “सेलेक्शन मीटिंग में, दौरे के समय या मैचों के दौरान, महेंद्र सिंह धोनी ने कभी भी हमसे (चयन समिति से) युवराज सिंह को टीम से बाहर करने के लिए नहीं कहा। मैं यह बात रिकॉर्ड पर कह रहा हूं।”

उन्होंने आगे कहा कि धोनी को चयन समिति पर पूरा भरोसा था और उन्होंने कभी उनके फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं की।

संदीप पाटिल ने कहा, “धोनी को चयन समिति पर पूरा भरोसा था। उन्होंने कभी हमारे फैसलों में हस्तक्षेप नहीं किया। एक पिता अपने बेटे के लिए भावुक हो सकता है, यह स्वाभाविक है। लेकिन इस मामले में वह बेवजह एक गलत व्यक्ति पर आरोप लगा रहे हैं।”

युवराज सिंह का शानदार करियर

विवादों से अलग हटकर देखा जाए तो युवराज सिंह भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में से एक रहे हैं। उन्होंने कई बड़े टूर्नामेंट में भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

युवराज सिंह 2007 के टी20 वर्ल्ड कप और 2011 के वनडे वर्ल्ड कप में भारत की जीत के हीरो रहे। खासकर 2011 वर्ल्ड कप में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था।

कैंसर से लड़कर की शानदार वापसी

युवराज सिंह की कहानी और भी प्रेरणादायक इसलिए बनती है क्योंकि 2011 वर्ल्ड कप के दौरान वह फेफड़ों में कैंसर से जूझ रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया।

हालाँकि, युवराज ने टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद इलाज कराया और फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी भी की। हालांकि, 2019 में 37 साल की उम्र में युवराज सिंह ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की।

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Neetish Kumar Mishra Sports Digest Hindi में Editor के रूप में कार्यरत हैं और खेल पत्रकारिता में गहरा अनुभव रखते हैं। क्रिकेट, टेनिस, फुटबॉल और अन्य खेलों की बारीकियों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है।

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