Tuesday, February 17

Gautam Gambhir & MS Dhoni World Cup 2011 Final: हर क्रिकेटर का अपने करियर में कम से कम एक बार वर्ल्ड कप जीतने का सपना जरूर होता है। एक वर्ल्ड कप खिताब जीतना खिलाड़ी को क्रिकेट जगत में अपने आप ही बड़ा दर्जा दिला देता है। सभी प्रारूपों में भारत के लिए सर्वश्रेष्ठ बाएँ सलामी बल्लेबाजों में से रहे गौतम गंभीर ने अपने करियर में दो वर्ल्ड कप जीता है। गंभीर ने ये दोनों वर्ल्ड कप एमएस धोनी की कप्तानी में जीता था।

टी20 वर्ल्ड कप 2007 में विजेता भारतीय टीम का हिस्सा रहे गंभीर ने 2011 में भारत को अपना दूसरा वनडे वर्ल्ड कप ट्रॉफी जिताने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यादगार क्रिकेट करियर के बावजूद Gautam Gambhir ने हाल ही में बताया कि उन्हें केवल एक ही बात का अफसोस है और वह World Cup 2011 Final में एमएस धोनी के साथ हुए यादगार पल से जुड़ा है।

Gautam Gambhir & MS Dhoni World Cup 2011 Final
Gambhir/ Courtesy: Getty Images

बता दें कि, गौतम गंभीर ने वर्ल्ड कप 2011 के फाइनल में 97 रनों की शानदार पारी खेली थी और टीम को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, भारत को मुश्किल परिस्थितियों से निकालने के बाद वह अंत तक रूककर विनिंग शॉट नहीं लगा सके थे। गौतम गंभीर ने शुक्रवार को खुलासा किया कि उन्हें World Cup 2011 Final में मैच को खत्म ना कर पाने का अफसोस है।

“काश, मैं वह मैच खत्म कर पाता” – World Cup 2011 Final में MS Dhoni की तरह मैच खत्म ना कर पाने पर Gautam Gambhir ने जताया अफसोस

Gautam Gambhir ने World Cup 2011 Final का जिक्र करते हुए कहा, “काश, मैं वह मैच खत्म कर पाता। खेल को खत्म करना मेरा काम था, न कि किसी और को खेल खत्म करने के लिए छोड़ना। अगर मुझे समय को पीछे मोड़ना पड़े, तो मैं वापस जाऊंगा और आखिरी रन बनाऊंगा, चाहे मैंने कितने भी रन बनाए हों।”

Gautam Gambhir & MS Dhoni World Cup 2011 Final
Gambhir & Dhoni (World Cup 2011 Final)/ Courtesy: Getty Images

गौरतलब हो कि, 13 साल पहले यानी साल 2011 में श्रीलंका के खिलाफ़ मुम्बई में खेले गए फाइनल मैच में मेहमान टीम 6 विकेट खोकर 274 रन ही बना सकी थी। महेला जयवर्धने की शतकीय पारी के बाद ज़हीर खान और युवराज सिंह ने दो-दो विकेट चटकाए। जवाब में, भारत ने 6 ओवरों में सिर्फ 31 रन पर 2 विकेट खो दिए थे, जिसमें लसिथ मलिंगा ने वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर दोनों को आउट कर दिया था।

इसके बाद, गंभीर को युवा विराट कोहली का अच्छा साथ मिला और फिर कप्तान धोनी भी उनके साथ आए। धोनी और गंभीर ने 109 रनों की अच्छी साझेदारी भी की। उस मैच में गंभीर 97 रन बनाकर अपने शतक से मात्र 3 रन दूर थे, लेकिन 42वें ओवर में तिलकरत्ने दिलशान ने उन्हें आउट कर दिया। उस समय भारत को जीत के लिए मात्र 51 रनों की जरूरत थी।

Gautam Gambhir & MS Dhoni World Cup 2011 Final
Dhoni’s Last Six in World Cup 2011 Final / Courtesy; Getty Images

एमएस धोनी ने World Cup 2011 Final में गेंदों पर 79 गेंदों पर 8 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 91* रनों की नाबाद पारी खेली थी और प्लेयर ऑफ द मैच बने थे। भारत ने यह मुकाबला 10 गेंदे शेष रहते हुए जीत लिया था। धोनी ने लॉन्ग ऑन पर छक्का लगाकर भारत को जीत की दहलीज पार कराई थी। धोनी के उस छक्के को क्रिकेट इतिहास के सबसे आइकॉनिक शॉट्स में से एक माना जाता है और जब भी वर्ल्ड कप फाइनल की चर्चा होती है, तो इसकी बात जरूर होती है।

कई सारे क्रिकेट फैंस और विशेषज्ञ आज भी यह मानते हैं कि, भले ही World Cup 2011 Final में एम धोनी ने तेज पारी खेलकर भारत को जीत की दहलीज तक पहुँचाया था, लेकिन जब जल्दी ही दो बड़े विकेट गिर गए थे, तब गौतम गंभीर ने ही भारत की पारी को संभाला था और टीम को जीत की राह दिखाई थी। ऐसे में परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें ही प्लेयर ऑफ द मैच चुना जाना चाहिए था।

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Neetish Kumar Mishra Sports Digest Hindi में Editor के रूप में कार्यरत हैं और खेल पत्रकारिता में गहरा अनुभव रखते हैं। क्रिकेट, टेनिस, फुटबॉल और अन्य खेलों की बारीकियों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है।

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