ICC के 2024-27 रेवेन्यू मॉडल के तहत भारत को कुल रेवेन्यू का लगभग 38.5% हिस्सा मिलता है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी ICC ने 2024-27 साइकल के लिए जो रेवेन्यू डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल लागू किया है, उसी के आधार पर अभी 2026 में भी फंड का बंटवारा किया जाता है और यह व्यवस्था 2027 तक वैध रहेगी। 2024 के अनुसार, ICC की अनुमानित सालाना कमाई 600 मिलियन डॉलर के आसपास है। इसमें से 88.81 प्रतिशत हिस्सा 12 फुल मेंबर टीमों को मिलता है, जबकि 11.19 प्रतिशत हिस्सा एसोसिएट देशों के बीच बांटा जाता है।
इस मॉडल में भारत को सबसे बड़ा हिस्सा मिलता है और बाकी देशों की हिस्सेदारी तय प्रतिशत के आधार पर निर्धारित रहती है। हालाँकि, आईसीसी ने रकम का बंटवारा उन देशों के रेवेन्यू शेयर के आधार पर किया है। वर्तमान समय में भारत से आईसीसी को सबसे ज्यादा फायदा होता है, इसीलिए उनका रेवेन्यू शेयर भी काफी ज्यादा है। नीचे सभी 12 फुल मेंबर टीमों को आईसीसी से मिलने वाली सालाना रकम के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
भारत-पाकिस्तान सहित सभी 12 फुल मेंबर बोर्ड्स को सालाना इतना पैसा देती है ICC
1. भारत – 231 मिलियन डॉलर (लगभग 2079 करोड़ रुपये)
ICC के 2024-27 रेवेन्यू मॉडल में सबसे बड़ा हिस्सा भारत को मिलता है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को हर साल 231 मिलियन डॉलर मिलते हैं। अगर 1 डॉलर की कीमत लगभग 90 रुपये मानी जाए, तो यह रकम करीब 2079 करोड़ रुपये बैठती है। यह कुल ICC रेवेन्यू का 38.5 प्रतिशत हिस्सा है, जो किसी भी अन्य देश से बहुत ज्यादा है।
ICC की कुल अनुमानित सालाना कमाई लगभग 600 मिलियन डॉलर रहती है, जिसमें से सबसे बड़ा हिस्सा भारत को जाता है। यही वजह है कि वित्तीय रूप से BCCI सबसे मजबूत बोर्ड माना जाता है। हालाँकि, भारतीय टीम भी कमाई के मामले में अन्य देशों से कहीं आगे है।
2. इंग्लैंड – 41.33 मिलियन डॉलर (लगभग 372 करोड़ रुपये)
आईसीसी के रेवेन्यू शेयर मॉडल में सबसे ज्यादा हिस्सा पाने के मामले में दूसरे नंबर पर इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड आता है। इंग्लैंड को हर साल 41.33 मिलियन डॉलर मिलते हैं। भारतीय रुपये में यह रकम लगभग 372 करोड़ के आसपास बैठती है।
यह कुल ICC रेवेन्यू का 6.89 प्रतिशत हिस्सा है। भारत के बाद इंग्लैंड को सबसे ज्यादा वित्तीय आवंटन मिलता है। इंग्लैंड की यह हिस्सेदारी उसे अन्य फुल मेंबर देशों से ऊपर रखती है।
3. ऑस्ट्रेलिया – 37.53 मिलियन डॉलर (लगभग 337 करोड़ रुपये)
इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया है। ऑस्ट्रेलिया को हर साल 37.53 मिलियन डॉलर मिलते हैं। भारतीय रुपये में यह रकम लगभग 337 करोड़ होती है।
यह कुल रेवेन्यू का 6.25 प्रतिशत हिस्सा है। इंग्लैंड से थोड़ा कम, लेकिन बाकी देशों से ज्यादा हिस्सा ऑस्ट्रेलिया को मिलता है। इस मॉडल में ऑस्ट्रेलिया की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रहती है।
4. पाकिस्तान – 34.51 मिलियन डॉलर (लगभग 310 करोड़ रुपये)
आईसीसी से हर साल सबसे ज्यादा रकम पाने के मामले में चौथे नंबर पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का नाम आता है। पाकिस्तान को हर साल 34.51 मिलियन डॉलर मिलते हैं, जो भारतीय रुपये में यह लगभग 310 करोड़ बैठता है।
यह ICC की कुल कमाई का 5.75 प्रतिशत हिस्सा है। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बाद पाकिस्तान को सबसे ज्यादा रकम मिलती है। एशिया में भारत के बाद पाकिस्तान को सबसे अधिक हिस्सा मिलता है।
5. न्यूजीलैंड – 28.38 मिलियन डॉलर (लगभग 255 करोड़ रुपये)
पांचवें स्थान पर न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड आता है। न्यूजीलैंड को हर साल 28.38 मिलियन डॉलर मिलते हैं। रुपये में यह लगभग 255 करोड़ के आसपास बैठता है। यह कुल रेवेन्यू का लगभग 4.73 प्रतिशत हिस्सा है। बांग्लादेश के करीब हिस्सेदारी होने के कारण न्यूजीलैंड भी शीर्ष पांच देशों में शामिल रहता है।
6. वेस्टइंडीज – 27.5 मिलियन डॉलर (लगभग 247 करोड़ रुपये)
छठे नंबर पर वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड है, जिन्हें हर साल 27.5 मिलियन डॉलर मिलते हैं। भारतीय रुपये में यह लगभग 247 करोड़ होता है। यह कुल ICC रेवेन्यू का करीब 4.58 प्रतिशत हिस्सा है। न्यूजीलैंड के बाद वेस्टइंडीज को सबसे अधिक हिस्सेदारी मिलती है।
7. श्रीलंका – 27.12 मिलियन डॉलर (लगभग 244 करोड़ रुपये)
सातवें स्थान पर श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड आता है। श्रीलंका को हर साल 27.12 मिलियन डॉलर मिलते हैं। रुपये में यह रकम लगभग 244 करोड़ बैठती है। यह कुल ICC रेवेन्यू का लगभग 4.52 प्रतिशत हिस्सा है। वेस्टइंडीज से थोड़ा कम हिस्सा मिलने के कारण श्रीलंका इस सूची में सातवें स्थान पर है।
8. बांग्लादेश – 26.74 मिलियन डॉलर (लगभग 240 करोड़ रुपये)
आठवें नंबर पर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड है। बांग्लादेश को हर साल 26.74 मिलियन डॉलर मिलते हैं। भारतीय रुपये में यह रकम लगभग 240 करोड़ होती है। यह कुल रेवेन्यू का लगभग 4.46 प्रतिशत हिस्सा है। श्रीलंका के करीब हिस्सेदारी होने के कारण बांग्लादेश भी शीर्ष आठ देशों में शामिल रहता है।
9. दक्षिण अफ्रीका – 26.24 मिलियन डॉलर (लगभग 236 करोड़ रुपये)
नौवें स्थान पर क्रिकेट साउथ अफ्रीका आता है। दक्षिण अफ्रीका को हर साल 26.24 मिलियन डॉलर मिलते हैं। रुपये में यह राशि लगभग 236 करोड़ बैठती है।
यह कुल ICC रेवेन्यू का लगभग 4.37 प्रतिशत हिस्सा है। शीर्ष आठ देशों के बाद दक्षिण अफ्रीका को सबसे अधिक वित्तीय आवंटन मिलता है। लंबे समय से मजबूत क्रिकेट संरचना रखने के बावजूद इस मॉडल में उसका हिस्सा भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया से काफी कम है।
10. आयरलैंड – 18.04 मिलियन डॉलर (लगभग 162 करोड़ रुपये)
दसवें स्थान पर आयरलैंड क्रिकेट बोर्ड है। आयरलैंड को हर साल 18.04 मिलियन डॉलर मिलते हैं। भारतीय रुपये में यह लगभग 162 करोड़ होता है। यह कुल ICC रेवेन्यू का करीब 3.01 प्रतिशत हिस्सा है। अफगानिस्तान और जिम्बाब्वे से अधिक हिस्सेदारी होने के कारण आयरलैंड इस सूची में दसवें स्थान पर है।
11. जिम्बाब्वे – 17.64 मिलियन डॉलर (लगभग 158 करोड़ रुपये)
ग्यारहवें स्थान पर जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड है। जिम्बाब्वे को हर साल 17.64 मिलियन डॉलर मिलते हैं। भारतीय रुपये में यह लगभग 158 करोड़ बैठता है। यह कुल रेवेन्यू का करीब 2.94 प्रतिशत हिस्सा है। आयरलैंड से थोड़ा कम हिस्सा मिलने के कारण जिम्बाब्वे इस सूची में नीचे है।
12. अफगानिस्तान – 16.82 मिलियन डॉलर (लगभग 151 करोड़ रुपये)
बारहवें और अंतिम फुल मेंबर के रूप में अफगानिस्तान को हर साल 16.82 मिलियन डॉलर मिलते हैं। रुपये में यह करीब 151 करोड़ बैठता है। इसका हिस्सा लगभग 2.8 प्रतिशत है। हाल के वर्षों में टीम के प्रदर्शन में सुधार के बावजूद वित्तीय हिस्सेदारी अभी भी शीर्ष देशों से काफी कम है।
एसोसिएट देशों को कितना हिस्सा मिलता है
ICC की कुल अनुमानित सालाना कमाई लगभग 600 मिलियन डॉलर रहती है। इसमें से 532.84 मिलियन डॉलर, यानी 88.81 प्रतिशत हिस्सा 12 फुल मेंबर देशों को मिलता है।
बाकी 67.16 मिलियन डॉलर, यानी 11.19 प्रतिशत हिस्सा एसोसिएट सदस्य देशों के बीच बांटा जाता है। रुपये में यह रकम लगभग 604 करोड़ बैठती है, जिसे सभी एसोसिएट देशों में साझा किया जाता है।
क्रिकेट से जुड़ी ताजा खबरों के लिए Sports Digest Hindi पर विजिट करते रहें और हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर (X) पर भी फॉलो करें।







