India begin bold new era with four-spinner strategy in home Tests against South Africa: भारत ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में अपना इरादा बिल्कुल साफ कर दिया है। टीम ने चार स्पिनरों के साथ मैदान में उतरकर यह दिखा दिया कि वे घरेलू परिस्थितियों में अपने सबसे बड़े हथियार को पूरी मजबूती के साथ इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं।
यह रणनीति तभी संभव हो सकी जब टीम मैनेजमेंट ने वॉशिंगटन सुंदर को एक टॉप ऑर्डर बल्लेबाज की भूमिका में प्रमोट किया और इससे टीम को एक अतिरिक्त स्पिन विकल्प को शामिल करने की आजादी मिली।
टेस्ट की पूर्व संध्या पर शुभमन गिल का बयान चर्चा में था, क्योंकि उन्होंने बताया था कि आखिरी स्लॉट एक स्पेशलिस्ट स्पिनर और एक ऑलराउंडर के बीच है। यह सुनकर ऐसा लगा कि कहीं टीम कुलदीप यादव को बाहर रखने का विचार तो नहीं कर रही।
पिच के खुलने के बाद साफ हो गया कि भारत को तीसरे तेज गेंदबाज की जरूरत नहीं है, जिससे कुलदीप को लेकर चिंता कुछ बढ़ी जरूर लेकिन मैच के दिन गिल ने पुष्टि की कि कुलदीप के साथ एक स्पिन ऑलराउंडर भी खेल रहा है।
वॉशिंगटन सुंदर की नई भूमिका ने खोली रणनीतिक लचीलेपन की खिड़की
भारत ने साई सुदर्शन की जगह वॉशिंगटन सुंदर को नंबर तीन पर भेजकर एक साहसिक फैसला लिया है। सुदर्शन ने पिछले मैच में 87 रन बनाए थे लेकिन भारत के पास बल्लेबाजी में इतना बैकअप है कि टीम इस प्रयोग को करने से पीछे नहीं हटी।
विशेषज्ञों का मानना है कि वॉशिंगटन सुंदर लंबे समय से ऐसे खिलाड़ी हैं जो बल्लेबाजी में ऊंचे क्रम पर खेल सकते हैं और यह पहला मौका है जब टीम ने इस सोच को असल मैच में परखने का निर्णय लिया।
अगर यह प्रयोग सफल होता है तो भारत के पास भविष्य में एक ऐसा ऑलराउंडर होगा जो बल्लेबाजी क्रम में ऊपर खेल सकता है और गेंदबाजी में लगातार विकेट चटका सकता है।
इस बदलाव की वजह से भारत को अपने सभी प्रमुख गेंदबाजों को शामिल करने का फायदा मिला, जिनमें जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और कुलदीप यादव शामिल हैं। अतिरिक्त स्पिन विकल्प के रूप में अक्षर पटेल को टीम में जगह मिली और इस तरह टीम में दो लेफ्ट आर्म स्पिनर खेले।
दक्षिण अफ्रीका ने तीन तेज गेंदबाजों के साथ ली चुनौती
दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीका ने अपने कॉम्बिनेशन में स्पिनर बढ़ाने का फैसला नहीं किया और टीम ने तीन तेज गेंदबाजों के साथ चुनौती स्वीकार की। कगिसो रबाडा की चोट ने उन्हें जरूर झटका दिया लेकिन उनकी जगह कॉर्बिन बॉश को शामिल किया गया और वियान मुल्डर को फिर से नंबर तीन की जिम्मेदारी सौंपी गई। कप्तान टेम्बा बावुमा ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी चुनी और बताया कि शुरुआती दो दिनों में विकेट बल्लेबाजी के लिए काफी अच्छा रहेगा।
यह भी दिलचस्प रहा कि यह पहला मौका है जब दक्षिण अफ्रीका ने भारत में अपने पिछले सात टॉस हारने के बाद आखिरकार टॉस जीता। शुभमन गिल ने मजाक में कहा कि शायद वे केवल WTC फाइनल में ही टॉस जीत पाएंगे, क्योंकि लगातार हार उन्हें मजाकिया अंदाज में सोचने पर मजबूर कर रही है।
दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन
भारत: यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, वॉशिंगटन सुंदर, शुभमन गिल, ऋषभ पंत, रविंद्र जडेजा, ध्रुव जुरेल, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज।
दक्षिण अफ्रीका: एडेन मार्कराम, रयान रिकेल्टन, वियान मुल्डर, टेम्बा बावुमा, टोनी डी जॉर्जी, ट्रिस्टन स्टब्स, काइल वेरिन, मार्को यांसिन, कॉर्बिन बॉश, साइमन हार्मर, केशव महाराज।
इस कॉम्बिनेशन ने साफ कर दिया कि भारत अपने घरेलू टेस्ट मैचों में आक्रामक स्पिन रणनीति पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। कुलदीप, जडेजा, अक्षर और वॉशिंगटन सुंदर मिलकर विपक्षी टीम के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। बल्लेबाजी में भी भारत की गहराई इतनी मजबूत है कि टीम इस प्रयोग को आत्मविश्वास के साथ लागू कर पाई।
भारत के लिए यह मैच सिर्फ एक टेस्ट मुकाबला नहीं बल्कि एक नई सोच की शुरुआत है। चार स्पिनरों की रणनीति और वॉशिंगटन सुंदर को टॉप ऑर्डर में प्रमोट करने का फैसला टीम के लचीलेपन और आक्रामक सोच को दिखाता है। आने वाले दिनों में यह रणनीति कितनी सफल होती है, यह मैदान पर प्रदर्शन से तय होगा लेकिन इतना साफ है कि भारत ने घरेलू क्रिकेट में अपने स्पिन हथियारों को पूरी ताकत से आगे रखने की तैयारी कर ली है।
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