Wednesday, March 18

‘क्रिकेट के भगवान’ के नाम से मशहूर सचिन तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लगभग एक दशक पहले संन्यास ले लिया था, लेकिन उनके कई रिकॉर्ड आज भी अटूट हैं।

सचिन ने भारतीय टीम को क्रिकेट में एक नई पहचान दिलाई और 2011 में टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। 24 साल लम्बे करियर में तेंदुलकर ने टीम इंडिया को बहुत से मैच जिताये लेकिन उसके बाद भी उन्हें रिटायरमेंट के लिए फाॅर्स किया गया था। तो चलिए जानते हैं कि कयता है पूरा मामला?

2012 में सचिन ने लिया था वनडे से संन्यास

तेंदुलकर ने अपना आखिरी वनडे मुकाबला 18 मार्च 2012 को एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ खेला था, जिसके बाद 22 दिसंबर 2012 को उन्होंने इस फॉर्मेट को अलविदा कह दिया।

इस बीच, टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी और सेलेक्टर संदीप पाटिल ने सचिन के वनडे रिटायरमेंट से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि 2012 के दौरान चयन समिति भविष्य को देखते हुए नए खिलाड़ियों की तलाश में थी। उस समय सचिन वनडे और टी20 छोड़ चुके थे और सिर्फ टेस्ट क्रिकेट खेल रहे थे।

पाटिल ने सचिन से पूछी आगे की प्लानिंग

पाटिल ने एक दिन सचिन को फोन कर उनकी आगे की योजना के बारे में पूछा। इस पर सचिन ने हैरानी जताते हुए सवाल किया कि ऐसा क्यों पूछा जा रहा है। तब पाटिल ने साफ कहा कि चयनकर्ता उनके विकल्प की तलाश कर रहे हैं। यह सुनकर सचिन चौंक गए और दोबारा पुष्टि करने के लिए कॉल किया कि क्या यह बात गंभीर है।

पाटिल के मुताबिक, चयनकर्ता किसी खिलाड़ी को टीम से बाहर कर सकते हैं, लेकिन सीधे तौर पर उसके करियर के अंत की घोषणा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान सचिन ने खेलने की इच्छा जताई, जिस पर चयन समिति ने भी सहमति जताई।

2013 में लिया था संन्यास

सचिन ने उसके बाद साल 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ हुई टेस्ट सीरीज में ही क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की थी। तेंदुलकर ने अपने करियर में बहुत सी यादगार पारियां खेली थी जो आज भी फैंस के जहेन में ताजा है।

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आकाश अवस्थी स्पोर्ट्स डाइजेस्ट हिंदी में बतौर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और स्पोर्ट्स जर्नलिज्म में दो वर्षों का अनुभव रखते हैं। इससे पहले वे इंडिया न्यूज़ और स्पोर्ट्सविकी जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम कर चुके हैं। क्रिकेट, कबड्डी और अन्य खेलों की बारीकियों को गहराई से समझना और उन्हें आसान व रोचक अंदाज में पाठकों तक पहुंचाना उनकी खासियत है। खेल जगत के साथ साथ पॉलिटिक्स की हर हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है।

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