IPL 2025 के एक मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स (DC) के कप्तान ऋषभ पंत द्वारा दिग्वेश राठी की ‘रन आउट’ की अपील वापस लेने के फैसले ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। अनुभवी भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे गेंदबाज के आत्म-सम्मान के खिलाफ बताया है।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना लखनऊ सुपर जायंट्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच खेले गए लीग मुकाबले के दौरान घटी। RCB की पारी के 17वें ओवर की आखिरी गेंद के दौरान जब जितेश शर्मा नॉन-स्ट्राइकर एंड से क्रीज़ छोड़ चुके थे, तब दिग्वेश राठी ने उन्हें रन आउट कर दिया था। रिप्ले में साफ दिखा कि बल्लेबाज़ क्रीज़ से बाहर था, लेकिन थर्ड अंपायर ने इसे ‘नॉट आउट’ करार दिया, क्योंकि राठी अपनी डिलीवरी स्ट्राइड पूरी कर चुके थे।
हालांकि अंपायर के फैसले से पहले ही ऋषभ पंत ने अपील वापस ले ली, जिससे मैदान पर मौजूद जितेश ने उन्हें गले लगाकर शुक्रिया कहा। इसके बाद RCB ने 6 विकेट से यह मैच जीत लिया।
अश्विन बोले – “यह गेंदबाज का अपमान है”
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, “दिग्वेश राठी मेरा रिश्तेदार नहीं है, मेरा दोस्त भी नहीं है। मैं उसे जानता तक नहीं। लेकिन उसकी अपील को करोड़ों लोगों के सामने वापस लेना और फिर उस पर इस तरह की बातें करना एक गेंदबाज को बहुत छोटा महसूस कराता है।”
उन्होंने आगे कहा, “एक कप्तान का काम होता है अपने खिलाड़ी का समर्थन करना। जब गेंदबाज नियम के अनुसार बल्लेबाज़ को आउट करता है, तो उस पर सवाल उठाना और उसे नीचा दिखाना सही नहीं है।”
तकनीकी रूप से क्या था स्थिति?
अश्विन ने पूरी घटना के तकनीकी पक्ष को भी समझाया। उन्होंने कहा कि अगर बल्लेबाज़ डिलीवरी स्ट्राइड शुरू होने से पहले क्रीज़ से बाहर होता है, तो उसे रन आउट किया जा सकता है। इस मामले में थर्ड अंपायर ने निष्कर्ष निकाला कि दिग्वेश राठी ने अपनी डिलीवरी स्ट्राइड पूरी कर ली थी और उस वक्त बल्लेबाज़ क्रीज़ में था, इसलिए जितेश शर्मा को नॉट आउट दिया गया।
अश्विन ने सवाल उठाया कि जब अंपायर ने फैसला सुना दिया था, तब पंत द्वारा अपील वापस लेना क्यों जरूरी समझा गया। उन्होंने कहा, “कमेंटेटर इस फैसले को खेल भावना बता रहे हैं, लेकिन क्या गेंदबाज की भावनाएं मायने नहीं रखतीं?”
“अगर दिग्वेश राठी आपका बेटा होता तो?” – अश्विन
अश्विन ने बेहद भावुक अंदाज़ में कहा, “जरा सोचिए, दिग्वेश राठी अगर आपका बेटा होता और उसका कप्तान उसकी अपील वापस लेकर उसे नीचा दिखाता, तो आपको कैसा लगता? क्या हम यही व्यवहार किसी बल्लेबाज़ के साथ करते हैं?”
उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसलों से युवा गेंदबाज हतोत्साहित होते हैं और भविष्य में वे इस तरह का रन आउट करने से डर सकते हैं, क्योंकि उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचना झेलनी पड़ सकती है।
गेंदबाजों को मिलना चाहिए बराबरी का दर्जा
अश्विन लंबे समय से नॉन-स्ट्राइकर एंड पर रन आउट को सही ठहराते रहे हैं। वह मानते हैं कि जब बल्लेबाज़ क्रीज़ छोड़ देता है, तो गेंदबाज को पूरा अधिकार है कि वह नियम के अनुसार उसे आउट करे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के रन आउट को ‘अनफेयर’ या ‘स्पोर्ट्समैनशिप की कमी’ बताना गलत है।
अश्विन ने यह भी कहा कि पंत ने यह फैसला लेने से पहले शायद ड्रेसिंग रूम से बात की हो, लेकिन मैदान पर जो कुछ भी हुआ, वह गेंदबाज को अपमानित करने जैसा था।
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