Monday, February 16

MS धोनी ने 02 दिसंबर 2005 को अपना टेस्ट डेब्यू किया था।

टेस्ट क्रिकेट की दुनिया में 2 दिसंबर एक ऐसा दिन है जिसे भारतीय क्रिकेट फैंस कभी नहीं भूलते, क्योंकि इसी दिन मैदान पर उतरा था, वह खिलाड़ी जिसकी शांति, चालाकी और पावर हिटिंग ने खेल का पूरा नजरिया बदल दिया।

2 दिसंबर 2005 को जब लंबे बालों वाला एक विकेटकीपर बल्लेबाज श्रीलंका के खिलाफ चेन्नई में टेस्ट डेब्यू करने आया तो शायद किसी ने नहीं सोचा था कि आने वाले सालों में यह खिलाड़ी भारत को नंबर वन टेस्ट टीम बनाने में मास्टरमाइंड बनेगा। धोनी का डेब्यू एक साधारण शुरुआत थी, लेकिन उसमें एक चमक छिपी थी, जो आगे जाकर टेस्ट इतिहास की अनगिनत कहानियों में बदल गई। आज उसी खास दिन की सालगिरह पर हम एमएस धोनी की टेस्ट विरासत को मजेदार अंदाज में याद करते हैं।

धोनी को अक्सर लोग सीमित ओवरों का सुपरस्टार समझते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि टेस्ट में भी उन्होंने मुश्किल हालात में टीम को बचाते हुए कई अमर पारियां खेलीं। चाहे हाथ में चाय लेकर मैच देख रहे फैंस हों या कमेंट्री बॉक्स में बैठे दिग्गज, टेस्ट में धोनी का योगदान अक्सर उन्हें हैरान कर देता था। तो आइए इस खास डेब्यू डे पर उनके पांच यादगार टेस्ट इनिंग्स की यात्रा शुरू करते हैं और देखते हैं कि कैप्टन कूल ने लंबी फॉर्मेट में कैसे अपनी छाप छोड़ी।

एमएस धोनी का पूरा टेस्ट करियर

एमएस धोनी ने 2 दिसंबर 2005 को श्रीलंका के खिलाफ चेन्नई में टेस्ट डेब्यू किया और इसके बाद भारतीय टेस्ट क्रिकेट में स्थिरता और नेतृत्व का प्रतीक बनकर उभरे। उन्होंने 90 टेस्ट मैचों में 144 पारियों में 4876 रन बनाए, जिनमें उनका औसत 38.09 रहा और 6 शतक तथा 33 अर्धशतक शामिल रहे। इस फॉर्मेट में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 224 है, जो उन्होंने 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बनाया था।

उन्होंने विकेटकीपर कप्तान के रूप में भारत को नंबर एक टेस्ट टीम बनाने में बड़ी भूमिका निभाई और घरेलू तथा विदेशी दोनों परिस्थितियों में उपयोगी योगदान दिया। उनके टेस्ट करियर में धैर्य, जिम्मेदारी, मैच परिस्थिति को समझने की क्षमता और बड़े मुकाम पर टीम को संभालने का गुण साफ नजर आता है।

ये हैं एमएस धोनी की टेस्ट करियर की टॉप 5 यादगार पारियां

1. 224 बनाम ऑस्ट्रेलिया, चेन्नई, 2013

इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 380 रन बनाए और भारत जब बल्लेबाजी के लिए उतरा तो टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए और स्थिति दबाव में थी। भारत 196 पर 4 विकेट खोकर संघर्ष कर रहा था तब धोनी ने विराट कोहली के साथ साझेदारी बनाकर मैच का रुख बदल दिया।

धोनी ने 224 रन बनाए और भारत को 572 के विशाल स्कोर पर पहुंचा दिया, जिससे टीम को पहली पारी में 192 रन की बढ़त मिली। यह पारी 365 गेंदों में 24 चौकों और 6 छक्कों के साथ आई और मैच में भारत की बड़े अंतर से जीत का मुख्य आधार बनी। उनकी पारी ने न केवल मैच का परिणाम तय किया बल्कि यह भी साबित किया कि वह कठिन स्पिन ट्रैक पर लंबी और प्रभावशाली पारी खेलने की क्षमता रखते हैं।

2. 148 बनाम पाकिस्तान, फैसलाबाद, 2006

फैसलाबाद टेस्ट में पाकिस्तान ने पहली पारी में 588 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत शुरुआत में ही दबाव में आ गया था। भारत ने 3 विकेट 150 से पहले ही खो दिए थे तब धोनी पांचवें नंबर पर आए और टीम को संभालते हुए तेज लेकिन नियंत्रित पारी खेली।

उन्होंने 148 रन की इनिंग 153 गेंदों में 19 चौकों और एक छक्के के साथ खेली और भारत को 603 के जवाबी स्कोर तक पहुंचाया, जिससे मैच पूरी तरह संतुलित हो गया। उनकी पारी ने भारत को फॉलो ऑन से बचाया और मनोवैज्ञानिक बढ़त दिलाई। इस पारी ने दिखाया कि वह शुरुआत से ही विपक्षी गेंदबाजों पर आक्रामक तरीके से दबाव बना सकते हैं और टीम को मुश्किल परिस्थितियों से निकाल सकते हैं।

3. 132* बनाम दक्षिण अफ्रीका, कोलकाता, 2010

कोलकाता टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी में 296 रन बनाए और भारत ने जवाब में मजबूत शुरुआत के बाद कुछ जल्दी विकेट गंवा दिए थे। भारत जब 10 के भीतर एक और विकेट खोने को लेकर चिंतित था, धोनी ने जिम्मेदारी संभालते हुए वीवीएस लक्ष्मण के साथ बड़ी साझेदारी की।

भारत ने पहली पारी में 643 का विशाल स्कोर खड़ा किया जिसमें धोनी के नाबाद 132 रन महत्वपूर्ण थे। उनकी यह पारी 23 चौकों से सजी हुई थी और टीम को पारी और 57 रन से बड़ी जीत दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई। इस पारी ने यह साबित किया कि धोनी मैच परिस्थिति को समझकर धैर्य और आक्रामकता का संतुलित मिश्रण मैदान पर उतार सकते हैं।

4. 90* बनाम इंग्लैंड, लॉर्ड्स (लंदन) 2007

लॉर्ड्स टेस्ट में इंग्लैंड ने पहली पारी में 298 और दूसरी पारी में 282 रन बनाए थे, जिससे भारत को जीत के लिए 380 रन का चुनौती भरा लक्ष्य मिला। आखिरी दिन भारत जल्दी विकेट खो बैठा और टीम 282/9 पर खड़ी थी तब इंग्लैंड की जीत लगभग तय मानी जा रही थी।

धोनी ने 90 नाबाद रन बनाकर न केवल समय बिताया, बल्कि बारिश आने तक इंग्लैंड को जीत से दूर रखा। उनकी शांत बल्लेबाजी और सही शॉट चयन की वजह से भारत मैच को ड्रा करने में सफल रहा। यह पारी इंग्लैंड के खिलाफ विदेशी परिस्थितियों में धोनी के धैर्य और मानसिक मजबूती का सबसे बड़ा उदाहरण मानी जाती है।

5. 76 बनाम इंग्लैंड, चेन्नई, 2008

इस मैच में इंग्लैंड ने पहली पारी में 316 रन बनाए और भारत ने जवाब में अच्छी शुरुआत के बाद बीच में कुछ विकेट गंवा दिए। दूसरी पारी में इंग्लैंड ने 311 का लक्ष्य दिया जो पांचवें दिन भारतीय बल्लेबाजों के लिए चुनौतीपूर्ण था।

वीरेंद्र सहवाग की तेज शुरुआत के बाद जब मध्यक्रम को स्थिरता की जरूरत थी, तब धोनी ने 76 रन की जिम्मेदार पारी खेली। उनकी इनिंग ने साझेदारियों को खड़ा किया और भारत को सफल रन चेज की दिशा में आगे बढ़ाया। अंत में भारत ने चार विकेट 387 का लक्ष्य खोकर हासिल किया, जो टेस्ट इतिहास के सबसे यादगार चेज में से एक है और इसमें धोनी की यह पारी अहम स्तंभ साबित हुई।

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Neetish Kumar Mishra Sports Digest Hindi में Editor के रूप में कार्यरत हैं और खेल पत्रकारिता में गहरा अनुभव रखते हैं। क्रिकेट, टेनिस, फुटबॉल और अन्य खेलों की बारीकियों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। नीतिश कुमार मिश्र अपने पेशेवर लेखन के जरिए पाठकों को न सिर्फ सटीक खबरें, बल्कि गहन विश्लेषण के माध्यम से खेलों को और करीब से समझने का मौका भी देते हैं।

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