Players Who Performed Well on Test Debut but Never Played Again: टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में कई दिग्गज खिलाड़ियों ने सालों तक खेलकर रिकॉर्ड बनाए। लेकिन इस खेल की खूबसूरती यही है कि कभी-कभी एक ही मैच पूरी कहानी कह जाता है। क्रिकेट इतिहास में ऐसे कई खिलाड़ी हुए, जिन्होंने अपने डेब्यू टेस्ट मैच में ही कुछ ऐसा कर दिखाया कि इतिहास में उनका नाम दर्ज हो गया, लेकिन किस्मत ने उन्हें दूसरा मैच खेलने का मौका नहीं दिया।
आइए जानते हैं ऐसे ही 5 खिलाड़ियों की कहानी, जिन्होंने डेब्यू में कमाल का प्रदर्शन किया, लेकिन दोबारा फिर कभी टेस्ट क्रिकेट में नजर नहीं आए।
इन पांच खिलाड़ियों को टेस्ट डेब्यू में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद दोबारा कभी मौका नहीं मिला
1. एंडी गैंटीम (वेस्टइंडीज, 1948)
टेस्ट करियर: 1 मैच, 112 रन, औसत 112.00
वेस्टइंडीज के बल्लेबाज एंडी गैंटीम (Andy Ganteaume) का नाम आज भी सबसे चर्चित वन-टेस्ट खिलाड़ियों में लिया जाता है। 1948 में इंग्लैंड के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में खेले गए अपने डेब्यू टेस्ट में उन्होंने शानदार 112 रन बनाए थे।
उनका बल्लेबाजी औसत आज भी टेस्ट इतिहास में सबसे ऊंचा (112.00) बना हुआ है। इसके बावजूद वे दोबारा कभी टीम में नहीं चुने गए। इसका कारण सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियां और चयन विवाद भी माने गए। गैंटीम ने घरेलू क्रिकेट में लंबा करियर खेला, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका सफर सिर्फ एक मैच तक ही सीमित रहा।
2. रॉडनी रेडमंड (न्यूजीलैंड, 1973)
टेस्ट करियर: 1 मैच, 159 रन, औसत 79.50
न्यूजीलैंड के रॉडनी रेडमंड (Rodney Redmond) ने अपने पहले ही टेस्ट में पाकिस्तान के खिलाफ 107 और 56 रन बनाकर सभी को चौंका दिया था। उनकी बल्लेबाजी में क्लास और आत्मविश्वास दोनों झलक रहे थे। लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया।
दरअसल, रेडमंड को आंखों की दिक्कत थी और कॉन्टैक्ट लेंस की समस्या के कारण वे अगली सीरीज में रन नहीं बना सके। इसके बाद उन्हें दोबारा मौका नहीं मिला।
विडंबना यह है कि वे इंग्लैंड दौरे पर टीम में थे, लेकिन खेलने का मौका नहीं मिला। उनके करियर का अंत एक सेंचुरी और एक हाफ सेंचुरी के साथ हुआ, जो किसी भी बल्लेबाज का सपना होता है।
3. चार्ल्स मेरियट (इंग्लैंड, 1933)
टेस्ट करियर: 1 मैच, 11 विकेट, औसत 8.72
इंग्लैंड के लेग-स्पिनर चार्ल्स मेरियट (Charles Marriott) ने 1933 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने डेब्यू मैच में ऐसा कमाल किया जो शायद ही किसी ने किया हो। उन्होंने पहली पारी में 5/37 और दूसरी में 6/59 लेकर कुल 11 विकेट झटके।
इसके बावजूद उन्हें फिर कभी नहीं खिलाया गया। उस समय वे 37 साल के थे और क्रिकेट के साथ-साथ स्कूल टीचर भी थे। इंग्लैंड ने उन्हें सिर्फ एक अस्थायी विकल्प के तौर पर देखा। उन्होंने दोबारा टेस्ट नहीं खेला, लेकिन इतिहास में उनका नाम उस खिलाड़ी के रूप में दर्ज हुआ, जिसने डेब्यू पर 11 विकेट लेकर भी करियर खत्म होते देखा।
4. स्टुअर्ट लॉ (ऑस्ट्रेलिया, 1995)
टेस्ट करियर: 1 मैच, 54* रन
ऑस्ट्रेलिया के स्टुअर्ट लॉ (Stuart Law) आधुनिक दौर के सबसे बदकिस्मत बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ पर्थ में खेले गए अपने एकमात्र टेस्ट में नाबाद 54 रन बनाए।
लेकिन उसी दौर में ऑस्ट्रेलिया के पास रिकी पोंटिंग, मार्क वॉ और डेमियन मार्टिन जैसे सुपरस्टार बल्लेबाज मौजूद थे। इसके चलते लॉ को दोबारा टीम में जगह नहीं मिल सकी। हालांकि, उन्होंने 50 से अधिक वनडे मैच खेले और इंग्लिश काउंटी क्रिकेट में एसेक्स और लैंकाशायर के लिए शानदार प्रदर्शन किया।
5. डैरेन पैटिंसन (इंग्लैंड, 2008)
टेस्ट करियर: 1 मैच, 2 विकेट, 8 रन
ऑस्ट्रेलिया में जन्मे डैरेन पैटिंसन (Darren Pattinson) का चयन इंग्लैंड टीम में खुद एक बड़ा सरप्राइज था। उन्हें 2008 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ हेडिंग्ले टेस्ट में अचानक टीम में शामिल किया गया, जबकि उन्होंने काउंटी क्रिकेट में भी कुछ ही मैच खेले थे।
डैरेन पैटिंसन ने अपने डेब्यू टेस्ट मैच में दो विकेट जरूर लिए, लेकिन उनकी टीम हार गई और चयनकर्ताओं की जमकर आलोचना हुई। उसके बाद पैटिंसन दोबारा इंग्लैंड टीम में नहीं दिखे। उनका मामला आज भी इंग्लैंड क्रिकेट की सबसे अजीब चयन कहानियों में से एक माना जाता है।
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