Wednesday, June 17

Prithvi Shaw Hits Third-Fastest Double Century in Ranji Trophy 2025-26: लंबे समय से आलोचनाओं से घिरे रहे पृथ्वी शॉ ने मंगलवार को रणजी ट्रॉफी 2025-26 के एलीट ग्रुप बी मैच में अपनी दमदार वापसी का आगाज किया। मुंबई छोड़ने के बाद इस सीजन महाराष्ट्र के लिए खेल रहे शॉ ने चंडीगढ़ के खिलाफ अपना दूसरा मैच खेलते हुए मात्र 141 गेंदों में अपना दोहरा शतक पूरा किया और अंततः 156 गेंदों पर 222 रन बनाकर टीम को एक जबरदस्त बढ़त दिलाई। उनका यह दोहरा शतक रणजी ट्रॉफी के इतिहास में तीसरा सबसे तेज दोहरा शतक है और इस पारी ने शॉ के करियर के एक नए अध्याय का संकेत दे दिया है।

पृथ्वी शॉ ने कैसे बनाए 156 गेंदों पर 222 रन?

पृथ्वी शॉ ने चंडीगढ़ के खिलाफ महाराष्ट्र की दूसरी पारी में कुल 156 गेंद खेलीं और 222 रन बनाए, जिनमें 29 चौके और 5 छक्के शामिल थे। उनका स्ट्राइक रेट 142.31 रहा, जो फर्स्ट क्लास क्रिकेट में बहुत प्रभावशाली है। शॉ ने 141 गेंदों पर अपना दोहरा शतक पूरा किया, जो रणजी ट्रॉफी के रिकॉर्ड में केवल तनमय अग्रवाल (119 गेंद) और रवि शास्त्री (123 गेंद) से पीछे है।

शॉ ने अपनी पारी में हर तरह के शॉट खेले। शुरुआत में उन्होने जल्दी से रुक कर विपक्षी गेंदबाजों की रेखा और लेंथ को पढ़ा और फिर लक्ष्य बनाकर आक्रमण तेज किया। शॉ के रन बनने की प्रक्रिया में बीच-बीच में सुरक्षित खेल भी था और समय पर जोखिम उठाकर बड़ी चुनौतियाँ भी उन्होंने स्वीकार कीं। इन दोनों चीजों का संतुलन उनकी पारी की खासियत रही।

महाराष्ट्र ने दूसरी पारी में कुल 359/3 के स्कोर पर पारी डिक्लेयर किया। यह डिक्लेरेशन शॉ के मुखर प्रदर्शन और टीम की बढ़त को देखते हुए किया गया। तीसरे दिन स्टम्प्स तक चंडीगढ़ दूसरी पारी में 129 पर एक विकेट पर थी और उसे जीत के लिए 335 रन चाहिए थे। यह स्थिति दिखाती है कि महाराष्ट्र ने मैच पर मजबूत पकड़ बना ली है।

तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक मैच की कहानी

तीसरे दिन जब खेल शुरू हुआ, तब महाराष्ट्र का दूसरा सेशन शुरू होने ही वाला था। पहले से ही टीम ने अच्छी स्थिति बना रखी थी और शॉ को खोलने का मौका मिला। पहले सेशन में शॉ ने नियंत्रण के साथ शुरुआत की और दूसरे सेशन में अपनी गति बढ़ा दी। उनके साथ अनुभवी साथी बल्लेबाजों ने भी जरूरी योगदान दिया जिससे टीम ने ड्राइव में रफ्तार कायम रखी।

चंडीगढ़ की तरफ से कुछ उम्दा गेंदबाजी की कोशिशें हुईं, लेकिन शॉ ने लंबी समय तक दबाव सहन किया और फिर सही समय पर रन बनाने शुरू किए। तीसरे दिन के दौरान मैच के कई महत्वपूर्ण मोड़ आए। शॉ और उनके साझेदारों ने जिस तरह से रन बनाए, उसने विपक्षी टीम की रणनीतियाँ प्रभावित कीं। अंततः डिक्लेरेशन के साथ महाराष्ट्र ने मैच को निर्णायक दिशा में मोड़ देने की कोशिश की और चंडीगढ़ को अधिकतम जोखिम भरे हालात में छोड़ दिया।

शॉ की यह पारी क्यों है खास?

पृथ्वी शॉ की यह पारी कई कारणों से खास है। सबसे पहले यह उनकी महाराष्ट्र के लिए पहली बड़ी पारी है। मुंबई के साथ लंबे समय तक खेलने के बाद उन्होंने टीम बदली और अब महाराष्ट्र की जर्सी में यह उनका दूसरा रणजी मैच ही था। अपने दूसरे ही मुकाबले में ऐसे प्रदर्शन से यह साफ होता है कि परिवर्तन ने उनके खेल को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।

दूसरा, पिछले सीजन में शॉ को मुंबई के सेटअप से बाहर कर दिया गया था और उनकी फिटनेस तथा अनुशासन पर सवाल उठे थे। उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि उन्होंने पिछले कुछ महीनों में पर्सनल ट्रेनर और डाइटिशियन के साथ काम किया है। बुच्ची बाबू इनविटेशनल जैसे प्री-सीजन टूर्नामेंटों में किये प्रदर्शन ने भी उनकी तैयारियों के संकेत दिए। इन तैयारियों का असर इस मैच में साफ देखा गया।

तीसरा, यह पारी शॉ के करियर की 14वीं फर्स्ट क्लास शतकीय पारियों में एक है और महाराष्ट्र के लिए उनका पहला शतक भी बन गया। ऐसे आंकड़े दर्शाते हैं कि वह सिर्फ बलपूर्वक होने से परे निरंतरता और मानसिक मजबूती भी हासिल कर रहे हैं।

पृथ्वी की यह पारी चयनकर्ताओं के लिए एक संकेत जरूर है। शॉ ने पहले ही प्रोफेशनल क्रिकेट में अपनी आक्रमकता और रन बनाने की क्षमता साबित कर दी है। भले ही अभी वह सीधे राष्ट्रीय टीम की चर्चा में नहीं आ रहे हों, लेकिन यदि वह इसी तरह लगातार प्रदर्शन करते रहे तो चयनकर्ताओं की नजरें निश्चित रूप से उन पर टिक सकती हैं।

वर्तमान में कुछ ओपनिंग विकल्प चर्चा में हैं और कई खिलाड़ी मिडिल ऑर्डर में भी जा चुके हैं। ऐसे में शॉ की फिर से वापसी आकर वह आगामी चुनौतियों में उपयोगी विकल्प बन सकते हैं। उनकी फिटनेस और मानसिक रूप से मजबूत होने की बातें भी उनके पक्ष में जाती हैं।

महाराष्ट्र में पृथ्वी शॉ के लिए टीम का माहौल और साथियों की भूमिका

महाराष्ट्र के कप्तान अंकित बावने और साथी रुतुराज गायकवाड़ ने शॉ का स्वागत किया और उनकी सहजता के बारे में कहा कि टीम के कई खिलाड़ी उनसे पहले से परिचित हैं। टीम के अंदर का समर्थन और साथी खिलाड़ियों की सलाह भी शॉ के आत्मविश्वास में योगदान देने वाली बातें रहीं।

शॉ ने खुद कहा था कि टीम में कई साथी पहले से जान-पहचान वाले हैं और नए साथी भी बहुत मददगार रहे हैं। इस सपोर्ट सिस्टम ने शॉ को जल्दी एडजस्ट करने में मदद की।

FAQs

1. पृथ्वी शॉ ने महाराष्ट्र के लिए अपना दोहरा शतक कितनी गेंदों में पूरा किया और यह रणजी ट्रॉफी के रिकॉर्ड में किस स्थान पर आता है?

पृथ्वी शॉ ने अपना दोहरा शतक 141 गेंदों में पूरा किया। यह रणजी ट्रॉफी के इतिहास में तीसरा सबसे तेज दोहरा शतक माना जा रहा है। इस सूची में तनमय अग्रवाल का 119 गेंदों वाला दोहरा शतक और रवि शास्त्री का 123 गेंदों वाला दोहरा शतक उनसे तेज हैं। शॉ का यह रिकॉर्ड घरेलू फर्स्ट क्लास इतिहास में उनकी आक्रमक क्षमता को दर्शाता है और उन्हें रिकॉर्ड बुक में एक प्रतिष्ठित स्थान देता है।

2. शॉ की 222 रनों की पारी का स्कोरकार्ड क्या रहा और महाराष्ट्र ने अपनी दूसरी पारी में क्या फैसला लिया?

पृथ्वी शॉ ने 156 गेंदें खेलकर 222 रन बनाए, जिसमें 29 चौके और 5 छक्के शामिल थे। महाराष्ट्र ने अपनी दूसरी पारी 359 रन पर तीन विकेट खोकर डिक्लेयर कर दी। तीसरे दिन स्टम्प्स तक चंडीगढ़ की टीम दूसरी पारी में 129/1 पर थी और उसे जीत के लिए 335 रन चाहिए थे।

क्रिकेट से जुड़ी ताजा खबरों के लिए Sports Digest Hindi पर विजिट करते रहें और हमें यूट्यूबफेसबुकइंस्टाग्राम, और ट्विटर (X) पर भी फॉलो करें।

Share.

Neetish Kumar Mishra Sports Digest Hindi में Editor के रूप में कार्यरत हैं और खेल पत्रकारिता में गहरा अनुभव रखते हैं। क्रिकेट, कबड्डी, टेनिस, फुटबॉल और अन्य खेलों की बारीकियों पर इनकी पकड़ बेहद मजबूत है।

Leave A Reply

Exit mobile version