Rahul Dravid Son Anvay Dravid Selected for BCCI U19 Challenger Trophy 2025: भारतीय क्रिकेट में युवा प्रतिभाओं को पहचान देने के लिए बीसीसीआई हर साल अंडर 19 चैलेंजर ट्रॉफी का आयोजन करता है, और इसे आने वाली अंडर 19 वर्ल्ड कप टीम के चयन से पहले एक अहम परीक्षा माना जाता है। इस बार का टूर्नामेंट 5 नवंबर से 11 नवंबर तक हैदराबाद में आयोजित किया जा रहा है। इस टूर्नामेंट में पूर्व भारतीय कप्तान और मौजूदा दिग्गज कोच राहुल द्रविड़ के छोटे बेटे अन्वय द्रविड़ को टीम सी में शामिल किया गया है।
यह चयन केवल उनके नाम की वजह से नहीं, बल्कि उनके हालिया प्रदर्शन की वजह से चर्चा में है। कुछ महीनों पहले राहुल द्रविड़ के बड़े बेटे समित द्रविड़ को भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू अंडर 19 सीरीज के लिए चुना गया था, लेकिन चोट के चलते वह उस दौरे में शामिल नहीं हो सके थे। अब परिवार के छोटे बेटे ने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अपनी जगह बनाकर एक नई शुरुआत की है।
अंडर 19 वर्ल्ड कप 2026 की तैयारी में बड़ा कदम
अगला अंडर 19 वर्ल्ड कप वर्ष 2026 में जिम्बाब्वे और नामीबिया में खेला जाना है। इस टूर्नामेंट के लिए मजबूत टीम तैयार करने के उद्देश्य से बीसीसीआई युवा खिलाड़ियों को चैलेंजर ट्रॉफी के जरिए परखा जाता है। इसीलिए अन्वय का चयन उनके करियर के लिए बड़ा मोड़ माना जा रहा है। यह प्रतियोगिता प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों को वर्ल्ड कप संभावित सूची तक पहुंचाने का रास्ता खोलती है।
वीनू मांकड़ ट्रॉफी में कप्तानी और शानदार प्रदर्शन
अन्वय द्रविड़ ने हाल ही में समाप्त हुई वीनू मांकड़ ट्रॉफी में कर्नाटक की कप्तानी की और टीम को क्वार्टर फाइनल तक पहुंचाया। इस टूर्नामेंट में उन्होंने कुल 6 मुकाबले खेले और 220 रन बनाए, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 82 नाबाद रहा। इसके अलावा देहरादून में खेले गए एक मैच में उन्होंने 63 रनों की पारी खेली थी जिससे उनका प्रदर्शन लगातार प्रभावी रहा।
कर्नाटक ने ग्रुप स्टेज में पांच में से चार मैच जीतकर दूसरे स्थान पर रहकर साथ नॉकआउट में जगह बनाई थी, लेकिन क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उन्हें इस इवेंट की चैंपियन हैदराबाद के खिलाफ हार झेलनी पड़ी थी। इसके बावजूद अन्वय की कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों की काफी चर्चा रही।
82* रनों की नाबाद पारी ने दिलाई पहचान
अन्वय ने हिमाचल प्रदेश के खिलाफ 82* रनों की नाबाद पारी खेली थी। वह इस मैच में चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और 236 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम को जीत तक पहुंचाया। उन्होंने अपनी पारी में 93 गेंदों पर 6 चौके और 2 छक्के लगाए, जो दर्शाता है कि वह परिस्थिति के अनुसार खेल बदलने की क्षमता रखते हैं।
इसके अलावा, उनकी 63 रनों वाली अर्धशतकीय पारी चंडीगढ़ के खिलाफ थी, जहाँ उनकी टीम को हार झेलनी पड़ी थी, लेकिन उनकी तकनीक और संयम ने चयनकर्ताओं पर अच्छा प्रभाव छोड़ा।
विकेटकीपर के रूप में चुने गए अन्वय
अन्वय द्रविड़ को टीम सी में बतौर विकेटकीपर शामिल किया गया है। उनके साथ इस टीम में सौराष्ट्र के युवा विकेटकीपर युवराज गोहिल भी हैं। मौजूदा अंडर 19 साइकिल में दो अन्य विकेटकीपर पहले से चयन की दौड़ में आगे माने जा रहे हैं। इनमें सबसे ऊपर सौराष्ट्र के हरवंश सिंह का नाम है, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज में खेलते हुए चार दिवसीय मैच में शतक जड़ा था।
इसके अलावा मुंबई के अभिज्ञान कुंडू भी एक उभरते हुए आक्रामक बल्लेबाज और विकेटकीपर हैं, जो चयन में मजबूत दावेदार हैं। इसलिए अन्वय को चैलेंजर ट्रॉफी में अपनी बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग दोनों से प्रभाव डालना होगा, ताकि वे चयन रेस में मजबूती से खड़े रह सकें।
चारों टीमों की कप्तानी और प्रमुख खिलाड़ी
चैलेंजर ट्रॉफी में कुल चार टीमें बनाई गई हैं और प्रत्येक टीम की कमान प्रभावशाली युवा खिलाड़ियों को सौंपी गई है। टीम ए की कप्तानी पंजाब के विहान मल्होत्रा कर रहे हैं, जबकि इसी टीम में अभिज्ञान कुंडू उप कप्तान हैं। टीम बी का नेतृत्व वेदांत त्रिवेदी कर रहे हैं और उनके उप कप्तान हरवंश सिंह हैं।
टीम सी की कमान हैदराबाद के आरोन जॉर्ज को दी गई है। उन्होंने वीनू मांकड़ ट्रॉफी में अपनी टीम को अपराजित रहते हुए खिताब जिताया था। उनके उप कप्तान पंजाब के आर्यन यादव हैं। इसके अलावा, टीम डी की जिम्मेदारी बंगाल के चंद्रहास दाश को दी गई है, जो हाल में लगातार अच्छे प्रदर्शन के चलते चयनकर्ताओं के ध्यान में आए हैं।
अन्वय द्रविड़ के लिए यह टूर्नामेंट क्यों है अहम?
अन्वय द्रविड़ के लिए यह केवल चयन नहीं, बल्कि खुद को साबित करने का मौका है। वह अब एक ऐसे स्तर पर पहुँच चुके हैं जहां नाम से ज्यादा उनकी क्षमता और निरंतरता मायने रखेगी। उन्हें यह दिखाना होगा कि वह दबाव को संभाल सकते हैं और टीम को मैच जिताने वाली भूमिका निभा सकते हैं।
चूंकि आने वाले महीनों में अंडर 19 वर्ल्ड कप का चयन होगा, ऐसे में एक प्रभावशाली प्रदर्शन उनके लिए भारतीय अंडर 19 टीम का दरवाजा खोल सकता है। भारतीय क्रिकेट में यह उम्र सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट मानी जाती है, क्योंकि यहीं से भविष्य के स्टार खिलाड़ियों की पहचान शुरू होती है।
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