टी20 वर्ल्ड कप 2026 की स्क्वाड में शामिल होने के बाद रिंकू सिंह ने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में लगातार दो धुआंधार पारियां खेलकर साबित किया कि फिनिशर की भूमिका उनके लिए बिल्कुल फिट है।
भारत की टी20 वर्ल्ड कप टीम में जगह मिलने के बाद रिंकू सिंह के प्रदर्शन को लेकर उत्सुकता और भी बढ़ गई थी और उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में शुरुआत से ही यह दिखा दिया कि वह बड़े टूर्नामेंट से पहले अपने खेल को नए स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं।
पहले मुकाबले में उन्होंने 48 गेंदों पर 67 रन बनाकर अपनी टाइमिंग और शॉट चयन की झलक दिखाई, जबकि दूसरे ही मैच में उन्होंने महज 60 गेंदों पर नाबाद 101 रन ठोककर यह साबित किया कि उन्हें फिनिशर का रोल क्यों दिया गया है।
इन दो मैचों में उन्होंने जिस तरह मिडिल ऑर्डर में आकर परिस्थिति के अनुसार अपने खेल को बदला वह पूरे अभियान में उत्तर प्रदेश टीम के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत रहा। बल्लेबाजी का उनका रवैया बेहद शांत नजर आया और रन बनाने की भूख हर गेंद पर वजूद में दिखी।
पहले मैच में 67 रन, शुरुआती संकेत ही मिले दमदार
हैदराबाद के खिलाफ मैच में उत्तर प्रदेश की टीम को मिडिल ऑर्डर में बढ़त दिलाने की जरूरत थी और रिंकू ने अपनी क्रीज पर मौजूदगी से यह कर दिखाया। वह पारी के अहम मोड़ पर बल्लेबाजी के लिए आए और शुरू से ही गेंदबाजों पर दबाव बनाने लगे। उन्होंने 42 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया और फिर अगले छह गेंदों पर 17 रन जोड़कर टीम को 300 के पार पहुंचाने में मदद की।
ध्रुव जुरेल के साथ उनकी साझेदारी मैच की नींव साबित हुई और अंत में ज़ीशान अंसारी के चार विकेटों की मदद से उत्तर प्रदेश ने यह मुकाबला आसानी से जीत लिया। रिंकू की इस पारी ने संकेत दे दिया था कि टीम इंडिया में चयन के बाद उनका आत्मविश्वास बिल्कुल नए स्तर पर पहुंच चुका है।
दूसरे मैच में तूफानी शतक, मैदान पर दिखी बदली हुई बैटिंग
चंडीगढ़ के खिलाफ अगले ही मुकाबले में रिंकू ने अपनी असली ताकत दिखाई। टीम के पास पहले से मजबूत शुरुआत थी और नंबर पांच पर आते ही उन्होंने रनगति को और तेजी से आगे बढ़ाया। 35 गेंदों पर अर्धशतक पूरा करने के बाद उन्होंने छह गेंदों पर सिर्फ छह रन जोड़े और फिर अगले ही पल मैदान पर आक्रामक अंदाज में छा गए।
बाकी के 39 रन उन्होंने सिर्फ 15 गेंदों में जोड़ दिए और 60 गेंदों की पारी में नाबाद 101 रन बनाकर टीम को 367 के बड़े स्कोर तक पहुंचाया। यह पारी उनकी दूसरी लिस्ट ए सेंचुरी थी और इसमें उन्होंने हर तरह के शॉट्स खेलकर गेंदबाजों को दबाव में रखा। इस प्रदर्शन से यह स्पष्ट हो गया कि वह मिडिल ऑर्डर में तेजी लाने की कला में महारत हासिल कर चुके हैं।
टीम इंडिया में जगह और भी मजबूत, चयन के फैसले को मिला समर्थन
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज में बाहर रहने के बाद ऐसा लग रहा था कि रिंकू वर्ल्ड कप टीम से बाहर हो सकते हैं लेकिन चयनकर्ताओं ने उन पर भरोसा जताया और उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में ताबड़तोड़ प्रदर्शन कर उस भरोसे को सही साबित किया। उनकी पारियों ने यह दिखा दिया कि भारत के पास एक ऐसा बल्लेबाज मौजूद है, जो आखिरी ओवरों में मैच का रुख अपनी ओर मोड़ सकता है।
जितेश शर्मा को बाहर किए जाने और ईशान किशन की मौजूदगी के बाद फिनिशर स्लॉट पर रिंकू पर बड़ी जिम्मेदारी है और वह फिलहाल इस जिम्मेदारी को खूब आनंद लेकर निभाते दिख रहे हैं। उनकी ये दो पारियां टी20 वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया के लिए सबसे उत्साहजनक संकेतों में से एक हैं।
उत्तर प्रदेश को मिला नया टोन, विरोधी टीमों पर दवाब
उत्तर प्रदेश ने इन दो मैचों में 300 से ऊपर के स्कोर बनाए और दोनों ही मैचों में बल्लेबाजी की लय मजबूत रही। रिंकू की आक्रामक शैली के साथ-साथ ज़ीशान अंसारी की गेंदबाजी उत्तर प्रदेश की जीत में अहम भूमिका निभाती दिखी, क्योंकि चंडीगढ़ को भी उनके चार विकेटों ने बड़े स्कोर तक पहुंचने का मौका नहीं दिया।
टीम का पूरे अभियान में आत्मविश्वास और तालमेल मजबूत नजर आया और रिंकू की पारियों ने टीम की बल्लेबाजी को एक नई दिशा दी जो आगे भी काम आ सकती है।
अब सवाल यह है कि क्या रिंकू सिंह टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत के सबसे अहम फिनिशर बनकर उभरेंगे? उनके शुरुआती घरेलू प्रदर्शन देखकर तो यही लगता है कि कहानी अभी शुरू ही हुई है।
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