भारत और इंग्लैंड के बीच मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले जा रहे चौथे टेस्ट मैच में टीम इंडिया को एक बड़ा झटका लगा। इस सीरीज में अच्छी लय में चल रहे विकेटकीपर बल्लेबाज़ ऋषभ पंत को पहली पारी के दौरान गंभीर चोट लग गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत मैदान छोड़ना पड़ा। यह घटना इंग्लैंड की पहली पारी के 68वें ओवर में हुई, जब पंत ने क्रिस वोक्स की गेंद पर रिवर्स स्वीप खेलने की कोशिश की और गेंद सीधे उनके टखने पर जा लगी।
गेंद लगते ही पंत दर्द से जमीन पर बैठ गए और उनके पैर में तुरंत सूजन आ गई। फिजियो ने मौके पर पहुंचकर जांच की और इसके बाद साफ हो गया कि वह आगे बल्लेबाज़ी नहीं कर सकते। हालत इतनी खराब थी कि पंत खुद चल भी नहीं पाए और उन्हें एक छोटी गाड़ी के ज़रिए मैदान से बाहर ले जाया गया। उस समय वह 37 रन पर बल्लेबाज़ी कर रहे थे और ‘रिटायर्ड हर्ट’ घोषित किए गए।
वॉन को नहीं पसंद आया 10 बनाम 11 का मुकाबला
ऋषभ पंत की चोट के बाद इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने टेस्ट क्रिकेट के नियमों को लेकर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की। उनका मानना है कि जब कोई खिलाड़ी इस तरह गंभीर रूप से चोटिल हो जाए, तो उस टीम को किसी दूसरे खिलाड़ी को मैदान पर उतारने की अनुमति दी जानी चाहिए।
बीबीसी स्पोर्ट्स से बात करते हुए वॉन ने कहा, “मुझे यह ठीक नहीं लगता कि अब हमारे पास चार दिन का खेल बचा है और भारत को पूरे मैच में 10 खिलाड़ियों के साथ ही खेलना होगा। यह एक शानदार सीरीज़ रही है और ऐसे में किसी टीम को कमज़ोर हालत में देखना खेल की भावना के खिलाफ है।”
वॉन ने यह भी कहा कि जब आईसीसी ने कन्कशन सब्स्टीट्यूट की इजाजत दी थी, तभी से उन्हें लगता है कि ऐसी स्थिति (गंभीर चोट) में भी सब्स्टीट्यूट की व्यवस्था होनी चाहिए। उनके मुताबिक, अगर खिलाड़ी को पहले इनिंग्स में चोट लगती है और वह आगे नहीं खेल सकता, तो उसकी जगह किसी और को लाना एकदम जायज़ होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, “अगर किसी का हाथ टूट जाए, पैर में फ्रैक्चर हो जाए या मांसपेशी फट जाए तो वह साफ तौर पर दिखता है कि खिलाड़ी अब नहीं खेल सकता। ऐसे मामलों में कोई चालाकी नहीं हो सकती। इसलिए मुझे लगता है कि नियमों में बदलाव होना चाहिए।”
एलेस्टेयर कुक ने इस बात से असहमति जताई
हालांकि, वॉन की इस राय से इंग्लैंड के ही एक और पूर्व कप्तान सर एलेस्टेयर कुक सहमत नहीं दिखे। उन्होंने साफ कहा कि इस नियम में बदलाव करना इतनी आसान बात नहीं है, क्योंकि कई बार चोट गंभीर होती नहीं, लेकिन खिलाड़ी बाहर चला जाता है।
कुक ने सवाल उठाते हुए कहा, “अगर किसी को सिर्फ गहरी चोट यानी ब्रूज़ आई हो, और एक्स-रे में कुछ न निकले, तब क्या होगा? क्या सिर्फ दर्द के आधार पर कोई सब्स्टीट्यूट मैदान पर आएगा? यह तय करना मुश्किल होगा कि चोट कितनी गंभीर है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी खिलाड़ी की हड्डी टूटी हो, तो मामला साफ होता है, लेकिन कई बार खिलाड़ी कहते हैं कि वह दर्द में हैं और ठीक से बैट नहीं पकड़ पा रहे, जबकि अंदरूनी तौर पर चोट उतनी गहरी नहीं होती।
पंत की चोट ने उठाए कई अहम सवाल
ऋषभ पंत की चोट ने एक बार फिर इस बहस को तेज कर दिया है कि क्या टेस्ट क्रिकेट में किसी खिलाड़ी के गंभीर रूप से चोटिल होने पर टीम को विकल्प मिलना चाहिए या नहीं। जहां माइकल वॉन जैसे पूर्व खिलाड़ी इसका समर्थन कर रहे हैं, वहीं एलेस्टेयर कुक जैसे दिग्गज इसके दुरुपयोग की आशंका भी जता रहे हैं।
गौरतलब हो कि, आईसीसी ने अब तक सिर्फ कन्कशन यानी सिर में चोट लगने पर सब्स्टीट्यूट की इजाजत दी है, लेकिन बाकी मामलों में नियम सख्त हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पंत की यह चोट क्रिकेट के नियमों में कोई बदलाव ला पाती है या नहीं।
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