टीम इंडिया के तेज गेंदबाज एस. श्रीसंत का विवाद पीछा नहीं छोड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों पहले आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने इस लीग के फेमस थप्पड़कांड का वीडियो पहली बार सार्वजनिक तौर पर साझा कर दिया था। जिसके बाद अब उनके 13 साल पुराने मामले को लेकर यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी अब कोर्ट पहुँच गई है।
2012 आईपीएल में चोट के चलते श्रीसंत ने मिस किया था आईपीएल

दरअसल, यह मामला साल 2012 का है जब श्रीसंत चोट के चलते उस आईपीएल में हिस्सा नहीं ले पाए थे। जिसके लिए राजस्थान रॉयल्स ने इंश्योरेंस क्लेम किया था लेकिन इस मुद्दे को लेकर कंपनी अब कोर्ट चली गई है। क्योंकि उनका मानना था कि वो पहले से ही चोटिल थे, जिसके चलते वो उस सीज़न लीग नहीं खेल पाए थे।
कंपनी का दावा: पहले से ही लगी थी चोट
यह विवाद तब शुरू हुआ जब राजस्थान रॉयल्स ने 82 लाख रुपये से अधिक का बीमा दावा दायर किया, जब श्रीसंत को अभ्यास मैच के दौरान लगी घुटने की चोट के कारण 2012 के आईपीएल सत्र से बाहर होना पड़ा था। हालांकि, बीमा कंपनी ने यह तर्क देते हुए दावा खारिज कर दिया कि तेज गेंदबाज को 2011 से पैर में चोट थी, जिसका उन्होंने खुलासा नहीं किया था। उनका मानना है कि यह पुरानी चोट के चलते ही वो उस सीज़न में नहीं खेलने का मुख्य कारण था, या फिर पॉलिसी के समय उन्हें यह बात बता दी जानी चाहिए थी।
एनसीडीआरसी ने दिया था राजस्थान के हक में फैसला
राजस्थान रॉयल्स का कहना है कि पैर की अंगुली की चोट कोई समस्या नहीं थी और श्रीसंत चोट के बावजूद खेल रहे थे। उनका कहना है कि टूर्नामेंट से बाहर होने का एकमात्र कारण बीमा अवधि के दौरान लगी घुटने की नई चोट थी। इस मामले में, राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने पहले आरआर के पक्ष में फैसला सुनाया था और बीमा कंपनी को दावा भुगतान करने का आदेश दिया था। हालांकि अब वो इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है।
हालांकि इस पर अभी निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने श्रीसंत के फिटनेस प्रमाण पत्र सहित अतिरिक्त दस्तावेज मंगवाए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या पहले से मौजूद पैर की चोट का कभी खुलासा किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बीमा कंपनी को पैर की चोट के बारे में पता था तो उन्हें इस तेज गेंदबाज का बीमा नहीं करना चाहिए था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को स्थगित कर दिया और बीमा कंपनी को स्पष्टता के लिए अतिरिक्त दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, जिसमें बीमा लेने के लिए आवेदन, श्रीसंत का फिटनेस प्रमाण पत्र आदि शामिल थे।
कोर्ट ने मांगे सभी डॉक्यूमेंट्स
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी की ओर से उपस्थित हुईं और उन्होंने कहा कि एनसीडीआरसी का आदेश श्रीसंत की पहले से मौजूद पैर की चोट के मुद्दे से संबंधित है, जिसका घुटने की चोट से कोई संबंध नहीं था। हालांकि कंपनी ने यह दावा किया था कि राजस्थान रॉयल्स ने बीमा करते समय पैर की चोट के बारे में खुलासा नहीं किया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल राजस्थान रॉयल्स की ओर से पेश हुए। उन्होंने तर्क दिया कि पैर की अंगुली में पहले से लगी चोट, जिसके कारण बीमा कंपनी ने दावा खारिज कर दिया था, इससे श्रीसंत को खेलने में दिक्कत नहीं आ रही थी। जबकि बीमा के दौरान वो चोटिल हुए थे।
राजस्थान का दावा: अंगूठे की चोट की वजह से नहीं थी खेलने में दिक्कत
आईपीएल फ्रेंचाइज़ी के मालिक की तरफ से अदालत में दावा किया गया कि इस नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी खिलाड़ी को टूर्नामेंट के दौरान चोट लग जाती है तो उसे बीसीसीआई और उस टीम द्वारा भुगतान किया जाए।
कौल ने यह भी कहा कि जब श्रीसंत का बीमा कराया गया था, तब बीमा कंपनी को फिटनेस प्रमाण पत्र दिया गया था और अगला प्रमाण पत्र तब दिया गया जब उन्हें घुटने में चोट लगी। 2012 के आईपीएल के लिए, राजस्थान रॉयल्स ने बीमा कंपनी से 8,70,75,000 की राशि के लिए खिलाड़ियों की फीस के नुकसान के लिए विशेष दुर्घटना बीमा कवर’ प्राप्त किया था।
सर्वेक्षक ने रद्द की थी राजस्थान की बीमा की मांग
कंपनी, कॉन्ट्रैक्टेड खिलाड़ियों को टूर्नामेंट में भाग नहीं लेने के कारण किसी भी नुकसान के लिए आईपीएल फ्रेंचाइज़ी को भुगतान करेगी। घुटने की चोट के कारण वो उस साल आईपीएल नहीं खेल पाए थे, जिसके कारण फ्रेंचाइज़ी ने बीमा पॉलिसी के तहत लगभग 82 लाख का दावा ठोका गया।
जिसके लिए बीमा कंपनी ने एक सर्वेक्षक को नियुक्त किया जो इस मामले को देखेगा। लेकिन, उसने यह कहकर बीमाकर्ता की अपील ठुकरा दी कि श्रीसंत को लगी चोट के बारे में बीमाकर्ता को जानकारी नहीं दी गई थी।

