टी20 वर्ल्ड कप 2026 में खराब चयन, अस्थिर बल्लेबाजी और ओवरकॉन्फिडेंस ने टीम इंडिया की राह मुश्किल बना दी है।
आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया को खिताब के सबसे बड़े दावेदारों में गिना जा रहा था, लेकिन टूर्नामेंट में अब तक उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। सुपर 8 के पहले मुकाबले में साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली एकतरफा हार ने टीम की रणनीति और मानसिकता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शुरुआती चरण में अमेरिका और नामीबिया जैसी टीमों ने भी भारत को कड़ी टक्कर दी, जिससे साफ संकेत मिला कि टीम उतनी संतुलित और अजेय नहीं दिख रही जितनी कागज पर नजर आती है। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं ओवरकॉन्फिडेंस टीम इंडिया के प्रदर्शन पर भारी तो नहीं पड़ रहा।
खराब चयन और कॉम्बिनेशन ने बढ़ाई मुश्किल
भारत की सबसे बड़ी समस्या टीम चयन और कॉम्बिनेशन को लेकर रही है। सुपर 8 के अहम मुकाबले में अक्षर पटेल जैसे महत्वपूर्ण ऑलराउंडर को बाहर रखकर वॉशिंगटन सुंदर को मौका देना बड़ा जोखिम भरा फैसला साबित हुआ।
सुंदर न तो गेंदबाजी में प्रभाव डाल सके और न ही बल्लेबाजी में कुछ खास कर पाए, जिससे मिडिल ऑर्डर कमजोर दिखा। बड़े मैचों में ऐसे फैसले अक्सर टीम की रणनीतिक कमजोरी उजागर कर देते हैं।
टॉप ऑर्डर की अस्थिरता बनी चिंता का कारण
भारतीय टॉप ऑर्डर का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में उतार-चढ़ाव भरा रहा है। अभिषेक शर्मा बीमारी से लौटने के बाद लय में नहीं दिखे और लगातार कम स्कोर करते रहे। ईशान किशन, जो पहले अच्छी फॉर्म में थे, सुपर 8 मैच में खाता भी नहीं खोल सके।
जब शुरुआती बल्लेबाज जल्दी आउट होते हैं तो पूरा दबाव मिडिल ऑर्डर पर आ जाता है, जिससे टीम की रन गति और रणनीति दोनों प्रभावित होती हैं।
आक्रामकता छोड़कर एंकर की भूमिका निभा रहे बल्लेबाज
टी20 फॉर्मेट में आक्रामक बल्लेबाजी सबसे बड़ा हथियार होती है, लेकिन भारत के प्रमुख बल्लेबाजों ने कई मौकों पर जरूरत से ज्यादा सतर्क रवैया अपनाया। शुरुआती विकेट गिरने पर तेज रन बनाने के बजाय लंबी पारी खेलने की कोशिश टीम को भारी पड़ी।
इस बदलाव के कारण रन रेट बढ़ता गया और विपक्षी टीम को मैच पर नियंत्रण बनाने का मौका मिल गया। शिवम दुबे ने कुछ मैचों में मुश्किल परिस्थितियों में रन बनाए, लेकिन अन्य बल्लेबाज लगातार प्रभाव नहीं छोड़ पाए।
ओवरकॉन्फिडेंस का दिखा असर
हाल के वर्षों में द्विपक्षीय श्रृंखलाओं में शानदार प्रदर्शन के कारण भारतीय टीम बेहद आत्मविश्वास से भरी हुई है। लेकिन कई फैसले ऐसे नजर आए, जिनसे लगा कि टीम परिस्थितियों को हल्के में ले रही है।
बड़े टूर्नामेंट में हर मैच अलग होता है और यहां छोटी गलतियां भी भारी पड़ सकती हैं। साउथ अफ्रीका के खिलाफ हार ने यह साफ कर दिया कि सिर्फ नाम और रिकॉर्ड से मैच नहीं जीते जाते।
सेमीफाइनल की राह हुई कठिन
अब भारत को सुपर 8 के बाकी दोनों मुकाबले जीतने होंगे, तभी सेमीफाइनल में जगह बनाने की उम्मीद कायम रह सकती है। टीम का अगला मैच जिम्बाब्वे से चेन्नई में और उसके बाद वेस्टइंडीज से कोलकाता में होगा।
इन दोनों टीमों ने भी टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन किया है, इसलिए भारत के लिए राह आसान नहीं होगी। साथ ही नेट रन रेट भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
टीम इंडिया के पास अभी भी वापसी का मौका है, लेकिन इसके लिए चयन, रणनीति और मानसिकता तीनों में सुधार जरूरी होगा। यदि टीम परिस्थितियों के अनुसार सही फैसले लेती है और ओवरकॉन्फिडेंस से बचती है, तो वह फिर से खिताब की दौड़ में लौट सकती है।
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