Monday, February 23

साउथ अफ्रीका से हार के बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच में संजू सैमसन की प्लेइंग XI में वापसी पर गंभीर चर्चा चल रही है।

आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर 8 स्टेज में साउथ अफ्रीका से करारी हार के बाद भारतीय टीम की प्लेइंग XI को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बल्लेबाजी की खराब शुरुआत और टॉप ऑर्डर की लगातार नाकामी ने टीम मैनेजमेंट को नए विकल्पों पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

अब जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाला मुकाबला भारत के लिए करो या मरो जैसा बन गया है। सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए टीम इंडिया को यह मैच हर हाल में जीतना होगा, इसलिए टीम कॉम्बिनेशन में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

ओपनिंग जोड़ी बनी सबसे बड़ी चिंता

पूरे टूर्नामेंट में भारत की सबसे बड़ी समस्या शुरुआती विकेट जल्दी गिरना रही है। कई मुकाबलों में टीम लगभग शून्य या बेहद कम स्कोर पर पहला विकेट खो बैठी, जिससे मिडिल ऑर्डर पर अतिरिक्त दबाव आ गया।

बार-बार ऑफ स्पिन से विकेट गिरने का पैटर्न भी सामने आया है। विरोधी टीमें लगातार इस रणनीति का इस्तेमाल कर रही हैं और भारत का टॉप ऑर्डर इसका समाधान नहीं निकाल पा रहा।

अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा का खराब फॉर्म

अभिषेक शर्मा पूरे टूर्नामेंट में संघर्ष करते नजर आए हैं। चार मैचों में तीन बार शून्य पर आउट होने के बाद उन्होंने एक पारी में सिर्फ 15 रन बनाए। ऐसी स्थिति में टीम को मजबूत शुरुआत नहीं मिल पा रही है।

तिलक वर्मा भी इस टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। टॉप ऑर्डर और मिडिल ऑर्डर के बीच संतुलन बनाने की उनकी भूमिका अभी तक सफल नहीं रही, जिससे रन चेज के दौरान दबाव बढ़ता गया।

संजू सैमसन विकल्प के रूप में मजबूत दावेदार

संजू सैमसन ने टूर्नामेंट में सिर्फ एक मैच खेला है, जिसमें उन्होंने 22 रन बनाए थे। वह दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और टॉप ऑर्डर में संतुलन ला सकते हैं, खासकर तब जब विपक्षी टीम ऑफ स्पिन से शुरुआत कर रही हो।

टीम मैनेजमेंट ने भी माना है कि दाएं हाथ के बल्लेबाज को ऊपर भेजना रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकता है। यही कारण है कि सैमसन का नाम गंभीरता से चर्चा में है।

भारतीय टीम मैनेजमेंट का बड़ा बयान

टीम के सहायक कोच ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि ओपनिंग साझेदारी चिंता का विषय है और अगले मैच से पहले सभी विकल्पों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले डेढ़ साल से अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखना या बदलाव करना, यह फैसला आसान नहीं होगा।

उन्होंने संकेत दिया कि सैमसन को शामिल करने से टॉप ऑर्डर में संतुलन मिल सकता है और टीम को अलग रणनीतिक विकल्प मिलेगा। हालांकि अंतिम निर्णय मैच से पहले परिस्थितियों और टीम कॉम्बिनेशन को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

सेमीफाइनल की उम्मीदों से जुड़ा फैसला

जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबला भारत के लिए बेहद अहम है। यदि टीम यह मैच हारती है तो सेमीफाइनल की उम्मीदें लगभग खत्म हो सकती हैं। इसके बाद भारत को वेस्टइंडीज के खिलाफ भी कठिन मुकाबला खेलना है।

ऐसे में प्लेइंग XI का चयन सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि पूरे टूर्नामेंट की दिशा तय कर सकता है। यदि मैनेजमेंट जोखिम लेकर बदलाव करता है और वह सफल रहता है, तो भारत की वापसी की कहानी यहीं से शुरू हो सकती है।

संजू सैमसन को मौका मिलता है या नहीं, यह तो मैच से ठीक पहले ही स्पष्ट होगा, लेकिन इतना तय है कि यह फैसला टीम इंडिया के अभियान के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

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Neetish Kumar Mishra Sports Digest Hindi में Editor के रूप में कार्यरत हैं और खेल पत्रकारिता में गहरा अनुभव रखते हैं। क्रिकेट, टेनिस, फुटबॉल और अन्य खेलों की बारीकियों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है।

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