एशियन क्रिकेट का सबसे बड़ा टूर्नामेंट यानी एशिया कप क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी बड़े त्योहार से कम नहीं है। एशियाई टीमों के फैंस इस टूर्नामेंट का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस टूर्नामेंट की शुरुआत 41 साल पहले 1984 में हुई थी।
1983 वर्ल्ड कप के दौरान जब फाइनल मैच में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष एन.के.पी. साल्वे को मैच स्टैंड में बैठने से मना कर दिया गया था। इस अपमान का बदला लेते हुए उन्होंने एशिया कप टूर्नामेंट शुरू किया। उस वक्त एशिया कप टूर्नामेंट की नींव एक दिलचस्प और बदले की भावना से रखी गई थी।
एशिया कप की शुरुआत कब और कहां हुई
भारत और पाकिस्तान के बाद श्रीलंका भी इस मुहिम का हिस्सा बना। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के हेड गामिनी दिसानायके ने साल्वे और नूर खान का साथ दिया। इसके बाद 19 सितंबर 1983 को नई दिल्ली में एशियन क्रिकेट कॉन्फ्रेंस का गठन हुआ। ACC के पहले अध्यक्ष भी भारत के एन.के.पी. साल्वे बने थे। 1984 में शारजाह में पहला एशिया कप खेला गया था, इसमें भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने हिस्सा लिया। यह टूर्नामेंट न सिर्फ क्रिकेट का उत्सव बना बल्कि भारत ने पहला कप जीतकर अपनी बादशाहत कायम की।
एशियन क्रिकेट काउंसिल में कितने मेंबर शामिल हैं
1984 में एशिया कप का पहला वनडे मैच यूएई की मेजबानी में खेला गया था। उस वक्त ACC में सिर्फ तीन ही टीम – भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका थीं। लेकिन कुछ समय बाद बांग्लादेश और अफगानिस्तान को भी शामिल किया गया। अभी एशियन क्रिकेट काउंसिल में 30 देश शामिल हैं।
क्या है एशिया कप क्रिकेट लीग बनाने की कहानी
सबसे पहले वर्ल्ड कप की शुरुआत 1975 में हुई थी। शुरुआती दोनों टूर्नामेंट वेस्टइंडीज की टीम ने जीते। वेस्टइंडीज की टीम के सामने सारी टीमें फीकी रह गईं। वर्ल्ड कप का तीसरा सीजन 1983 में खेला गया था। तब टीम इंडिया बहुत कमजोर नज़र आ रही थी, मगर कपिल देव की कप्तानी में टीम इंडिया ने सभी को चौंकाया और फाइनल में जगह बनाई। इस बात से बीसीसीआई अध्यक्ष साल्वे समेत पूरा भारत देश खुश था। फाइनल में भारत की टक्कर वेस्टइंडीज से ही थी।
इस मैच को देखने के लिए एन.के.पी. साल्वे भी पहुंचे थे और यह महामुकाबला वो स्टैंड से देखना चाहते थे। इंटरनेशनल काउंसिल ने साल्वे की यह मांग नहीं मानी और उन्हें टिकट देने से मना कर दिया। इसपर उस वक्त के बीसीसीआई अध्यक्ष काफी नाराज़ हुए और इसे अपना तथा भारतीयों का अपमान समझा।
इसके बाद उन्होंने फैसला किया कि उस दौर में इंग्लैंड क्रिकेट की शक्ति का केंद्र था और वर्ल्ड कप हमेशा वहीं आयोजित होता था। साल्वे को पता था कि यह काम आसान नहीं है, लेकिन उन्होंने ठान लिया कि भारत की ताकत और एशियाई क्रिकेट की एकजुटता से इसे संभव किया जा सकता है। फिर एशिया कप जैसे टूर्नामेंट की शुरुआत हुई।
एशिया कप में सबसे अधिक फाइनल खिताब भारतीय टीम ने जीते हैं। 6 बार श्रीलंका की टीम ने यह ट्रॉफी उठाई है और पाकिस्तान की टीम ने 2 बार इस खिताब को अपने नाम किया है।
वहीं 2025 एशिया कप टी20 टूर्नामेंट का आगाज 9 सितम्बर से होने वाला है। इस बार इसमें कुल 8 टीमें आपस में भिड़ेंगी। वहीं इस दौरान भारत और पाकिस्तान का मुकाबला 14 सितम्बर को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा।

