भारत में एक से बढ़कर एक खिलाड़ी हुए हैं। बल्लेबाज़ों की यह लिस्ट तो बहुत लंबी है। जबकि पिछले कुछ समय से भारतीय टीम में काफ़ी अच्छे गेंदबाज़ आए हैं जिन्होंने अपने दम पर विपक्षी टीम की कमर तोड़कर टीम को मैच जिताया है।
जवागल श्रीनाथ, वेंकटेश प्रसाद, ज़हीर खान, अजित अगरकर, आरपी सिंह, भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह भारत के दिग्गज गेंदबाज़ हैं। इन खिलाड़ियों ने भारत को बहुत से मैच जिताए हैं। क्रिकेट में बहुत कम ऐसा होता है कि जब कोई खिलाड़ी छुट्टी मना रहा हो और उसे टीम में खेलने के लिए बुलावा आ जाए। टीम इंडिया का एक खिलाड़ी अमेरिका में छुट्टियां मना रहा था कि अचानक उसे टीम में शामिल कर दिया गया।
साल 2011 टीम इंडिया के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा साल

साल 2011 भारतीय टीम के लिए काफ़ी उतार-चढ़ाव भरा साल रहा। टीम इंडिया के लिए शुरुआत के 6 महीने तो बहुत अच्छे गए। उन्होंने 28 सालों के बाद धोनी की कप्तानी में अपने घर में हो रहे वर्ल्ड कप को अपने नाम किया और सभी भारतीयों का सपना पूरा किया। उसके बाद वेस्टइंडीज को उनके घर में धूल चटाई। हालाँकि उसके बाद टीम के लिए आगे आने वाले महीने बहुत कठिन गुज़रे।
आरपी सिंह को अमेरिका से बुलाया गया
भारतीय टीम 4 टेस्ट, 1 टी20 और 5 वनडे मैच खेलने के लिए इंग्लैंड गई थी। जहाँ टेस्ट सीरीज़ की शुरुआत भारतीय टीम के लिए बहुत ख़राब रही। पहले ही मैच में ज़हीर खान चोटिल हो गए और उसके बाद चोट का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ कि ज़्यादातर खिलाड़ी चोटिल होते रहे और भारत से खिलाड़ियों को बुलाना पड़ा। हद तो तब हो गई जब भारतीय टीम के पास गेंदबाज़ों की कमी पड़ गई और ऐसे में आरपी सिंह को अमेरिका से बुलाया गया।
अमेरिका में छुट्टियां मना रहे थे आरपी सिंह
फ़ाइनल मैच लंदन के ओवल में खेला जाना था। क्लीन स्वीप से बचने के लिए आरपी सिंह को टीम में जोड़ा गया। जब उन्हें टीम में शामिल होने का बुलावा आया, उस समय आरपी सिंह अमेरिका के मियामी में छुट्टियाँ मना रहे थे।
उन्हें अचानक टीम में शामिल कर लिया गया और चौथे टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में भी जगह दे दी गई। यह फ़ैसला टीम मैनेजमेंट के लिए असफल साबित हुआ। आरपी ने पहली पारी में 34 ओवर फेंके और 118 रन दिए। वह एक भी विकेट नहीं ले पाए। भारत यह मैच पारी और 8 रन से हार गया।
छुट्टियां कैंसिल कर सीधा मिला मैच खेलने का मौक़ा
बाएँ हाथ का यह तेज़ गेंदबाज़ लगातार अपनी फिटनेस से जूझ रहा था जो मैच में भी देखने को मिला। उनकी स्पीड में भी बहुत गिरावट आ गई थी और वो स्विंग कराने में भी सफल नहीं हो रहे थे।
अमेरिका में अपनी छुट्टियां कैंसल कर टीम में शामिल हुए आरपी केवल एक पारी में ही गेंदबाज़ी कर सके और फिर कभी टीम इंडिया के लिए टेस्ट नहीं खेल सके। उसी दौरे पर उन्हें वनडे सीरीज़ में भी खेलने का मौक़ा मिला।
पाँच में से तीन ओडीआई मैचों में उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया और उसमें उन्होंने चार विकेट लिए। इंग्लैंड के इस दौरे ने उनके करियर का अंत कर दिया और इसके बाद वो फिर कभी भारतीय टीम के लिए नहीं खेल सके।
ऐसा रहा है आरपी सिंह का करियर
आरपी सिंह ने 4 सितंबर 2018 को क्रिकेट के सभी फ़ॉर्मेट को अलविदा कह दिया था। उन्होंने 2005 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था और 14 टेस्ट, 58 वनडे और 10 टी20 मैच खेले। बाएँ हाथ के तेज़ गेंदबाज़ ने टेस्ट क्रिकेट में 40, वनडे में 69 और टी20 में 15 विकेट लिए।
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