Football: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उन बढ़ती मांगों का समर्थन किया है, जिनमें ऑस्ट्रेलिया से ईरानी महिला फुटबॉल टीम को शरण देने का आग्रह किया जा रहा है। क्यूंकि यह टीम पिछले सप्ताह एशियाई कप टूर्नामेंट के एक मैच से पहले ईरानी राष्ट्रगान गाने से इनकार करने के बाद घर लौटने की तैयारी कर रही है।
ईरानी महिला फुटबॉलरों के समर्थन में आए ट्रंप :-
इस मौजूदा समय में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते हुए अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑस्ट्रेलिया से ईरान की राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम को शरण देने की अपील की है। इस बीच उन्होंने कहा है कि इस टीम को वापस ईरान भेजना एक बड़ी मानवीय भूल हो सकती है।

इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में चल रहे एएफसी महिला एशियन कप के दौरान अब यह विवाद सामने आया है। वहीं इस टूर्नामेंट के दौरान ही अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर हवाई हमले किए थे। इसमें तब ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत की खबर सामने आई थी। इसके बाद तब ईरान की महिला टीम अपने पहले मैच में दक्षिण कोरिया के खिलाफ राष्ट्रगान के दौरान चुप खड़ी रही थी।
फिलीपींस से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हुई ईरानी टीम :-

इसके बाद बीते रविवार को ईरानी महिला फुटबॉल टीम फिलीपींस की टीम से 2-0 से हार कर बाहर हो गई है। लेकिन अब खिलाड़ियों के वैश्विक संघ FIFPRO ने भी इन महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। क्यूंकि अब संघ का कहना है कि इस टीम के ईरान लौटने पर उनके साथ कठोर कार्रवाई होने का खतरा हो सकता है।
ट्रंप ने की ऑस्ट्रेलिया सरकार से अपील :-

इसके बाद अब इस मुद्दे पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा है कि ऑस्ट्रेलिया इस ईरानी टीम को वापस भेजकर भयंकर मानवीय गलती कर रहा है। इसके आगे उन्होंने कहा कि अगर ऑस्ट्रेलिया शरण नहीं देता तो अमेरिका इन खिलाड़ियों को अपने यहां आश्रय देने के लिए तैयार है। इसके बाद अब ऑस्ट्रेलिया सरकार के सहायक विदेश मंत्री मैट थिस्टलेटवेट ने कहा है कि सरकार गोपनीयता के कारण किसी भी खिलाड़ी के व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकती है।
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