Olympics: भारतीय खिलाड़ियों ने ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर अपनी मेहनत और प्रतिभा के बदौलत अपनी अमिट छाप छोड़ी है। आज हम आपको ओलंपिक में भारत के कुछ बेहतरीन प्रदर्शनों के बारे में बतायेंगे। जिन्होंने देश के गोल्ड, सिल्वर और ब्रोंज़ मेडल जीत कर अपने देश का नाम रौशन कर चुके हैं।
भारत के लिए ओलंपिक्स में मेडल जीतने वाले 7 एथलीट के बारे में जानते हैं।
7. भारतीय पुरुष हॉकी टीम, गोल्ड मेडल (एम्स्टर्डम 1928 से टोक्यो 1980, 8 स्वर्ण)
20वीं सदी की शुरुआत में हॉकी में भारत का प्रदर्शन ओलंपिक इतिहास का एक शानदार अध्याय रहा है। भारतीय हॉकी टीम ने कुल आठ ओलंपिक स्वर्ण पदक अपने नाम किए, जिनमें से छह लगातार (1928 से 1956 तक) जीते गए थे, जबकि बाकी दो स्वर्ण पदक टोक्यो 1964 और मॉस्को 1980 में हासिल किए गए।
6. कर्णम मल्लेश्वरी, भारोत्तोलन में कांस्य पदक (2000 सिडनी ओलंपिक)

2000 के सिडनी ओलंपिक में भारोत्तोलन में कर्णम मल्लेश्वरी का कांस्य पदक भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि वह ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। 69 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतियोगिता करते हुए, मल्लेश्वरी ने कुल 240 किलोग्राम (110 किलोग्राम स्नैच और 130 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क) उठाकर कांस्य पदक जीता। वह ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय भारोत्तोलक (महिला या पुरुष) थीं।
5. अभिनव बिंद्रा, गोल्ड मेडल, 10 मीटर एयर राइफल (बीजिंग 2008)

अभिनव बिंद्रा हमेशा भारत के पहले ओलंपिक व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता के रूप में याद किए जाएंगे। बीजिंग 2008 ओलंपिक में उन्होंने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में आखिरी शॉट पर लगभग 10.8 का सटीक निशाना लगाकर, 25 साल की उम्र में ओलंपिक चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
4. पीवी सिंधु, सिल्वर मेडल (रियो 2016) और ब्रोंज मेडल (टोक्यो 2020), बैडमिंटन

पी.वी. सिंधु भारत की पहली महिला हैं जिन्होंने दो ओलंपिक पदक जीते हैं। रियो 2016 ओलंपिक में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक पहुंचकर रजत पदक हासिल किया, जिससे पूरे देश को गर्व महसूस हुआ। चार साल बाद, टोक्यो 2020 ओलंपिक में सिंधु ने कांस्य पदक के लिए हुए मुकाबले में चीन की ही बिंग जियाओ को हराकर एक बार फिर इतिहास रच दिया।
3. लवलीना बोरगोहेन, ब्रोंज, मुक्केबाजी (टोक्यो 2020, वेल्टरवेट)
टोक्यो 2020 ओलंपिक में लवलीना बोरगोहेन ने महिला वेल्टरवेट (69 किग्रा) वर्ग में कांस्य पदक जीता। वह मैरी कॉम और विजेंदर सिंह के बाद ओलंपिक पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय मुक्केबाज बनीं। ओलंपिक में कांस्य और विश्व व एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर, लवलीना ने भारतीय महिला मुक्केबाजी की उस परंपरा को आगे बढ़ाया जिसे महान मुक्केबाज मैरी कॉम ने शुरू किया था।
2. मीराबाई चानू, सिल्वर मेडल, भारोत्तोलन (टोक्यो 2020, 49 किग्रा)

भारतीय भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने टोक्यो 2020 ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। उस समय 26 वर्ष की मीराबाई ने कुल 202 किलोग्राम भार (स्नैच में 87 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 115 किग्रा) उठाया। वे चीन की होउ झिहुई से थोड़ा पीछे रहीं, जिन्होंने 210 किलोग्राम (94+116) उठाकर ओलंपिक रिकॉर्ड बनाया। मीराबाई की यह सफलता उस ऐतिहासिक पल के दो दशक बाद आई, जब कर्णम मल्लेश्वरी ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। उन्होंने 2000 के सिडनी ओलंपिक में महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया था।
1. नीरज चोपड़ा, गोल्ड मेडल, भाला फेंक (टोक्यो 2020)

नीरज चोपड़ा ने टोक्यो 2020 ओलंपिक में पुरुषों की भाला फेंक प्रतियोगिता में 87.58 मीटर का शानदार थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता। यह एथलेटिक्स में भारत का पहला ओलंपिक पदक था, जो एक लंबे समय से अधूरा सपना पूरा हुआ। इस उपलब्धि को पाने की कोशिश मिल्खा सिंह और पी.टी. उषा जैसे महान खिलाड़ियों ने भी की थी, लेकिन वे थोड़े से अंतर से पीछे रह गए थे।
इसके अलावा, नीरज चोपड़ा का टोक्यो ताज, बीजिंग 2008 में अभिनव बिंद्रा के निशानेबाजी खिताब के बाद ग्रीष्मकालीन खेलों में भारत का दूसरा व्यक्तिगत स्वर्ण पदक था।

