100m World Champion Simran Sharma and Her Husband Gajendra Singh Incredible Journey: भारत की पैरा एथलीट सिमरन शर्मा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सच्चा जुनून और प्यार मिल जाए तो कोई सपना अधूरा नहीं रहता। नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 100 मीटर T12 कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।
उन्होंने 11.95 सेकंड का इंडिविजुअल बेस्ट परफॉरमेंस करते हुए न केवल भारत का नाम रोशन किया, बल्कि यह जीत उनके जीवन के संघर्ष, मेहनत और उनके पति गजेन्द्र सिंह के समर्पण की कहानी भी बन गई।
शुरुआती जिंदगी में चुनौतियों का पहाड़
सिमरन का जन्म समय से पहले हुआ था, जिसके चलते उन्होंने बचपन में ही अपनी आँखों की रोशनी खो दी थी, लेकिन उन्होंने अपने अंदर के डर को कभी हावी नहीं होने दिया। एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली सिमरन के लिए खेलों में करियर बनाना आसान नहीं था। आर्थिक तंगी, ट्रेनिंग के साधनों की कमी और समाज की मानसिकता जैसी कई रुकावटें उनके सामने थे, लेकिन वह हर मुश्किल से जूझती रहीं।
गजेन्द्र सिंह से मुलाकात और एक नई शुरुआत
सिमरन की जिंदगी ने तब करवट ली जब उनकी मुलाकात भारतीय सेना के जवान गजेन्द्र सिंह से हुई। दोनों के बीच दोस्ती और फिर शादी ने सिमरन के जीवन की दिशा ही बदल दी।
गजेन्द्र ने सिर्फ एक पति के रूप में नहीं, बल्कि कोच, गाइड और साथी के रूप में उनका साथ निभाया। उन्होंने सिमरन को हर दिन बेहतर बनने के लिए प्रेरित किया, उनके ट्रेनिंग की व्यवस्था की, डाइट प्लान तैयार किया और हर मोड़ पर उनका हौसला बढ़ाया।
गजेन्द्र सिंह ने जमीन बेचकर सिमरन के सपनों को बनाया हकीकत
जहां कई लोग अपने सपनों को आर्थिक तंगी में छोड़ देते हैं, वहीं गजेन्द्र सिंह ने अपनी जमीन तक बेच दी ताकि सिमरन के ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं में कोई रुकावट न आए।
उनका मानना था कि “सपने पूरे करने के लिए कुछ खोना पड़ता है” और उन्होंने अपने कर्मों से यह साबित किया। उनके त्याग का ही नतीजा है कि आज सिमरन न केवल भारत की शान हैं, बल्कि पूरी दुनिया में प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।
सिमरन शर्मा ने World Para Athletics Championships 2025 के 100 मीटर T12 इवेंट में जीता गोल्ड मेडल
नई दिल्ली में हुए वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में सिमरन शर्मा ने महिलाओं के 100 मीटर T12 इवेंट में 11.95 सेकंड का समय लेकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
यह प्रदर्शन उनके करियर का अब तक का सर्वश्रेष्ठ रहा। इस जीत के साथ उन्होंने भारत को इस प्रतियोगिता में 15वां पदक दिलाया।
उनकी सफलता ने न केवल खेल जगत को गौरवान्वित किया, बल्कि दिखाया कि समर्पण और प्यार से असंभव भी संभव बन सकता है।
संघर्ष, समर्पण और सपनों का संगम
यह गोल्ड मेडल गजेन्द्र सिंह की विश्वासपूर्ण ट्रेनिंग और सिमरन की अथक मेहनत का नतीजा है। उन्होंने हर सामाजिक और आर्थिक बाधा को पार करते हुए यह मुकाम हासिल किया।
सिमरन की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि एक ऐसे जोड़े की कहानी है जिसने प्यार, विश्वास और त्याग के बल पर पूरी दुनिया को प्रेरित किया है।
आने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा
सिमरन शर्मा की यह यात्रा उन सभी युवाओं के लिए मिसाल है जो हालातों से हार मान लेते हैं। उनका संदेश साफ है कि “अगर आपका साथी, आपका परिवार और आपका इरादा मजबूत है, तो दुनिया की कोई ताकत आपको रोक नहीं सकती।”
चैंपियन बनने के बाद सिमरन ने कहा था, “यह जीत सिर्फ मेरी नहीं है, यह मेरे पति की मेहनत और विश्वास की जीत है। अगर उन्होंने मुझ पर भरोसा नहीं किया होता, तो शायद मैं यहां तक नहीं पहुंच पाती।”
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