जब भारत में टेनिस की पहचान तक नहीं थी, तब विजय अमृतराज ने अकेले दम पर देश को वर्ल्ड टेनिस के मानचित्र पर खड़ा किया।
भारतीय खेल इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो सिर्फ अपने खेल के लिए नहीं, बल्कि पूरे दौर का प्रतिनिधित्व करते हैं। Vijay Amritraj ऐसा ही एक नाम हैं। साल 2026 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया और यह सम्मान सिर्फ ट्रॉफियों या रैंकिंग के लिए नहीं, बल्कि उस जिम्मेदारी के लिए है, जो उन्होंने भारतीय टेनिस के शुरुआती दौर में अपने कंधों पर उठाई।
ऐसे दौर में शुरुआत, जब भारत में टेनिस का नाम तक मुश्किल था
विजय अमृतराज का जन्म 1953 में मद्रास में हुआ। उस समय भारत में टेनिस न तो पॉपुलर था और न ही इसके लिए कोई मजबूत सिस्टम मौजूद था। न पर्याप्त कोचिंग थी, न सुविधाएं और न ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के मौके।
इसके बावजूद उन्होंने 1970 में प्रोफेशनल टेनिस खेलना शुरू किया। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि उस दौर में भारतीय खिलाड़ियों के लिए विदेश जाकर लगातार खेलना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता था।
दो दशक तक टॉप लेवल पर टिके रहे अमृतराज
विजय अमृतराज 1970 से लेकर 1993 तक प्रोफेशनल टूर पर सक्रिय रहे। यानी उन्होंने करीब 23 साल तक विश्व स्तर पर टेनिस खेला। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, खासकर उस खिलाड़ी के लिए जो ऐसे देश से आया हो, जहां टेनिस की बुनियाद ही कमजोर थी।
उन्होंने सिंगल्स में 15 खिताब जीते और अपने करियर में लगभग 400 मैच जीते। साल 1980 में वह दुनिया की रैंकिंग में 18वें स्थान तक पहुंचे। उस दौर में किसी भारतीय खिलाड़ी के लिए यह रैंकिंग असाधारण मानी जाती थी।
दिग्गजों को हराकर बनाई पहचान
विजय अमृतराज की सफलता सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं थी। उन्होंने उन खिलाड़ियों को हराया, जिन्होंने उस समय वर्ल्ड टेनिस पर राज किया। उन्होंने Rod Laver, Bjorn Borg, John McEnroe और Jimmy Connors जैसे महान खिलाड़ियों को मात दी। खास बात यह है कि उन्होंने जिमी कॉनर्स को पांच बार हराया, जो उस दौर के सबसे आक्रामक और सफल खिलाड़ियों में गिने जाते थे।
वह ग्रैंड स्लैम में विंबलडन और यूएस ओपन के क्वार्टरफाइनल तक भी पहुंचे। यह प्रदर्शन दिखाता है कि उनकी सफलता संयोग नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत का नतीजा थी।
डेविस कप में भारत की पहचान बने अमृतराज
भारतीय टेनिस में डेविस कप का जिक्र आते ही विजय अमृतराज का नाम अपने आप सामने आ जाता है। भारत 1974 और 1987 में डेविस कप फाइनल तक पहुंचा और दोनों अभियानों में उनकी भूमिका बेहद अहम रही।
Who is Vijay Amritraj and why did he receive the Padma Bhushan in 2026? 🤔
Vijay Amritraj is one of the greatest names in Indian tennis.
He was born in Madras in 1953. At that time, tennis wasn't very popular in India. There was no strong system, no significant support, and… pic.twitter.com/3XWnv7hjUy
— Neetish Mishra (@NeetishKrMishra) January 25, 2026
डेविस कप में अधिकतर मुकाबले विदेशी धरती पर खेले गए, जहां दबाव कहीं ज्यादा होता है। ऐसे माहौल में भारत का प्रतिनिधित्व करना और टीम को आगे ले जाना आसान नहीं था, लेकिन अमृतराज ने यह जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
डबल्स में भी रहा खास योगदान
विजय अमृतराज ने डबल्स में भी 14 खिताब जीते। इस दौरान उन्होंने अपने भाई आनंद अमृतराज के साथ कई मुकाबले खेले। उस दौर में भारतीय टेनिस काफी हद तक अमृतराज परिवार के इर्द-गिर्द ही घूमता नजर आता था।
टेनिस के बाद भी दुनिया से जुड़े रहे
टेनिस से संन्यास लेने के बाद भी विजय अमृतराज चर्चा से दूर नहीं हुए। उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा और 1983 की जेम्स बॉन्ड फिल्म Octopussy में नजर आए। इसके बाद वह Star Trek IV का भी हिस्सा बने। इसके साथ ही उन्होंने टेनिस कमेंटेटर के रूप में काम किया और खेल से अपना रिश्ता बनाए रखा।
खेल से आगे समाज के लिए योगदान
विजय अमृतराज ने संयुक्त राष्ट्र के साथ शांति दूत के रूप में भी काम किया। इसके अलावा वह अपनी फाउंडेशन के जरिए सामाजिक और चैरिटी से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहे।
भारत सरकार ने उन्हें 1983 में पद्म श्री से सम्मानित किया था। अब 2026 में पद्म भूषण देकर उनके पूरे जीवन के योगदान को सम्मान मिला है।
क्यों खास है यह पद्म भूषण
विजय अमृतराज को पद्म भूषण इसलिए नहीं मिला कि उन्होंने कितने खिताब जीते। यह सम्मान इसलिए मिला, क्योंकि उन्होंने ऐसे समय में भारतीय टेनिस को दुनिया के सामने खड़ा किया, जब बहुत कम लोगों को भरोसा था कि भारत इस खेल में कुछ कर सकता है। उनकी कहानी यह बताती है कि कभी कभी एक खिलाड़ी सिर्फ मैच नहीं जीतता, बल्कि पूरे देश के लिए रास्ता खोल देता है।
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