WWE की चमक-धमक के पीछे कई ऐसी गलत धारणाएं छिपी हैं, जिन्हें फैंस ने बिना सवाल किए सच मान लिया।
WWE दशकों से प्रोफेशनल रेसलिंग की दुनिया में सबसे बड़ा और प्रभावशाली नाम रही है। इसकी पहचान केवल रिंग में होने वाले मुकाबलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक वैश्विक एंटरटेनमेंट ब्रांड बन चुका है। WWE ने जिस तरह से रेसलिंग को टीवी, स्टोरीटेलिंग और कैरेक्टर बिल्डिंग से जोड़ा, उसी ने इसे आम खेल से अलग पहचान दिलाई।
इसी लोकप्रियता के साथ WWE से जुड़ी कई बातें भी फैंस के बीच फैलती चली गईं। कुछ बातें कंपनी की कहानी कहने की शैली से निकलीं, तो कुछ समय के साथ अफवाहों और अधूरी जानकारी का रूप लेती गईं। धीरे-धीरे ये बातें इतनी प्रचलित हो गईं कि इन्हें सच मान लिया गया। इस आर्टिकल में हम WWE के ऐसे ही सात बड़े झूठे फैक्ट्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें फैंस सालों से सच मानते आए हैं।
ये हैं WWE के 7 झूठे फैक्ट्स जिन्हें फैंस मानते हैं सच
1. WWE पूरी तरह Fake होती है
WWE को लेकर सबसे ज्यादा दोहराया जाने वाला दावा यही है कि यह पूरी तरह नकली होती है। यह धारणा आधी जानकारी और अधूरी समझ पर आधारित है।
असलियत यह है कि WWE में मैच का परिणाम और कहानी पहले से तय होती है, लेकिन रिंग के भीतर होने वाला शारीरिक संघर्ष वास्तविक होता है।
रेसलर्स को भारी बॉडी स्लैम, सुप्लेक्स, पॉवरबॉम्ब और ऊंचाई से गिरने वाले मूव्स खुद झेलने पड़ते हैं। इन मूव्स में न केवल दर्द होता है, बल्कि चोट लगने का गंभीर खतरा भी रहता है। यही कारण है कि WWE अपने कार्यक्रमों में बार-बार चेतावनी देता है कि इन स्टंट्स की नकल घर पर न की जाए। अगर WWE पूरी तरह नकली होती, तो इतने बड़े स्तर पर चोटें और करियर खत्म होने की घटनाएं देखने को नहीं मिलतीं।
2. स्क्रिप्टेड मैच में कुछ भी गलत नहीं हो सकता
कई फैंस यह मानते हैं कि जब कोई मैच पहले से लिखा गया होता है, तो उसमें गलती की कोई गुंजाइश नहीं रहती। यह सोच वास्तविकता से काफी दूर है, क्योंकि रिंग में परफॉर्म करने वाले रेसलर्स इंसान होते हैं और उनसे चूक होना स्वाभाविक है।
कभी संतुलन बिगड़ जाता है, कभी टाइमिंग चूक जाती है और कभी रेसलर तय समय पर किकआउट नहीं कर पाता। ऐसे हालात में रेफरी वही निर्णय देता है, जो उसकी आंखों के सामने होता है। इसी वजह से इतिहास में कई ऐसे मुकाबले दर्ज हैं, जहां स्क्रिप्ट होने के बावजूद नतीजा बदल गया। यह बात साबित करती है कि WWE पूरी तरह कंट्रोल्ड सिस्टम नहीं है।
3. Hulk Hogan ने Andre the Giant को पहली बार बॉडी स्लैम किया था
WrestleMania 3 में Hulk Hogan द्वारा Andre the Giant को बॉडी स्लैम करना प्रोफेशनल रेसलिंग के सबसे यादगार पलों में शामिल है। इस दृश्य को सालों तक WWE के इतिहास का सबसे बड़ा कारनामा बताया गया। लंबे समय तक यह दावा किया गया कि Andre को पहली बार उसी मुकाबले में उठाया गया था।
हकीकत यह है कि Andre the Giant को WrestleMania से पहले भी कई बार स्लैम किया जा चुका था। खुद Hogan उन्हें पहले भी उठा चुके थे। इसके अलावा जापान और अमेरिका में कई अन्य रेसलर्स यह कारनामा कर चुके थे। यह कहानी दरअसल उस दौर की मार्केटिंग और स्टोरीटेलिंग का हिस्सा थी, जिसने उस पल को और भी ऐतिहासिक बना दिया।
4. WWE में बैन किया गया मूव कभी वापस नहीं आता
फैंस के बीच यह धारणा भी आम है कि जो मूव WWE में बैन हो गया, वह हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। असल में WWE ऐसा कठोर नियम नहीं अपनाता। दरअसल, Piledriver जैसे खतरनाक मूव्स को सुरक्षा कारणों से बैन किया गया था, क्योंकि इनमें गर्दन और रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
हालांकि, अनुभवी और भरोसेमंद रेसलर्स को खास मौकों पर इसकी सीमित अनुमति दी जाती है। इसका मकसद जोखिम लेना नहीं, बल्कि कहानी को प्रभावी और यादगार बनाना होता है।
5. Canadian Destroyer पूरी तरह बैन है
Canadian Destroyer को लेकर भी लंबे समय तक यही धारणा बनी रही कि यह मूव पूरी तरह प्रतिबंधित है। वास्तविकता यह है कि यह मूव कुछ समय के लिए इस्तेमाल में नहीं रहा, लेकिन इसे कभी आधिकारिक रूप से खत्म नहीं किया गया।
सोशल मीडिया पर इसकी लोकप्रियता बढ़ने के बाद WWE ने इसे सीमित रूप में दोबारा शामिल किया। आज यह मूव केवल खास मौकों और बड़े मैचों में ही देखने को मिलता है, ताकि इसका प्रभाव बना रहे और अनावश्यक जोखिम न हो।
6. PG Era के बाद WWE में खून दिखाना बंद हो गया
PG Era के बाद WWE को लेकर यह धारणा बन गई कि कंपनी ने खून दिखाना पूरी तरह बंद कर दिया है। असल में उस दौर में ब्लेडिंग पर सख्त नियंत्रण लगाया गया था, लेकिन यह नियम स्थायी नहीं था।
आज भी बड़े और अहम मुकाबलों में सीमित मात्रा में ब्लड दिखाने की अनुमति दी जाती है। यह फैसला सोच-समझकर लिया जाता है, ताकि मैच की कहानी और भावनात्मक प्रभाव को मजबूती मिले, न कि सिर्फ हिंसा दिखाई जाए।
7. WWE की रिंग ट्रैम्पोलिन जैसी होती है
कई लोग यह मानते हैं कि WWE की रिंग ट्रैम्पोलिन की तरह उछलती है, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। WWE की रिंग मजबूत लकड़ी के बीम और मोटे बोर्ड से बनी होती है। इसमें बहुत कम लचीलापन होता है। रस्सियों से टकराना भी आसान नहीं होता और नए ट्रेनिंग लेने वालों को अक्सर गंभीर चोट तक लग जाती है। अनुभवी हाई फ्लायर रेसलर्स अपनी तकनीक और संतुलन से रिंग को उछलता हुआ दिखाते हैं।
WWE से जुड़े ये झूठे फैक्ट्स समय के साथ फैंस के बीच गहराई से बैठ गए हैं। जब इनकी सच्चाई सामने आती है, तो यह साफ हो जाता है कि प्रोफेशनल रेसलिंग केवल अभिनय नहीं, बल्कि अनुशासन, जोखिम और सालों की ट्रेनिंग से बना एक गंभीर पेशा है।
WWE से जुड़ी ताजा खबरों के लिए Sports Digest Hindi पर विजिट करते रहें और हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर (X) पर भी फॉलो करें।

