Anjum Chopra Reacts Strongly on Harmanpreet Kaur Captaincy: टीम इंडिया ने इतिहास रच दिया है। मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर पहली बार आईसीसी महिला वनडे वर्ल्ड कप अपने नाम किया। यह जीत सिर्फ एक कप्तान या एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि पूरे दल की एकजुटता और मेहनत का नतीजा थी। स्मृति मंधाना, जेमिमा रॉड्रिग्स और दीप्ति शर्मा जैसी खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर भारत को इस गौरवशाली मुकाम तक पहुंचाया।
इस जीत से देशभर में जश्न का माहौल था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद खिलाड़ियों से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी। लेकिन इसी खुशी के बीच एक पुरानी बहस फिर से सिर उठाने लगी कि ट्रॉफी जिताने के बाद हरमनप्रीत कौर को अब कप्तानी छोड़ देनी चाहिए।
“अब हरमन को कप्तानी छोड़ देनी चाहिए” – शांता रंगास्वामी
पूर्व भारतीय कप्तान शांता रंगास्वामी ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि हरमनप्रीत को अब कप्तानी छोड़ देनी चाहिए और अपने बल्लेबाजी व फील्डिंग पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। उनका मानना था कि टीम के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अब बदलाव का समय आ गया है।
हालांकि, उनके इस बयान पर फैंस ने नाराजगी जताई और कहा कि वर्ल्ड कप जिताने वाली कप्तान के बारे में इस तरह की बात करना अनुचित है।
“जीतें या हारें, हर बार यही कहा जाता है” – अंजुम चोपड़ा
NDTV से खास बातचीत में अंजुम चोपड़ा ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने साफ कहा कि हर वर्ल्ड कप के बाद कोई न कोई ऐसा बयान जरूर आता है।
अंजुम ने कहा, “हर वर्ल्ड कप के बाद इस तरह का एक बयान आ ही जाता है। पिछले चार-पांच टूर्नामेंट देख लीजिए, हर बार यही कहा गया कि हरमन को हटा देना चाहिए। जब टीम हारती है तब भी यही कहा जाता है और जब टीम जीतती है तब भी यही कहा जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि वह इस वक्त इस मुद्दे पर और कुछ नहीं कहना चाहतीं, क्योंकि ऐसा करने से भारत की ऐतिहासिक जीत का जश्न फीका पड़ जाएगा।
अंजुम और हरमन का गहरा रिश्ता
अंजुम चोपड़ा और हरमनप्रीत कौर का रिश्ता सिर्फ खिलाड़ी और मेंटर का नहीं, बल्कि एक गहरे सम्मान और भरोसे का है। हरमन ने भी वर्ल्ड कप जीतने के बाद कहा था कि उनके शुरुआती दिनों में अंजुम दीदी ने हमेशा उनका साथ दिया और आत्मविश्वास बढ़ाया।
अंजुम ने एक इंटरव्यू में हरमन की शुरुआती झलक याद करते हुए कहा, “मैंने उसे पहली बार तब देखा जब वह डोमेस्टिक क्रिकेट खेल रही थी। बाद में मुंबई में चैलेंजर ट्रॉफी में भी साथ खेले। तभी समझ गई थी कि यह खिलाड़ी अलग है। एक अंडर-19 लड़की जो गेंद को इतने लंबे शॉट्स मार सकती थी, यह बहुत खास था।”
उन्होंने कहा कि उस समय से लेकर आज तक उन्होंने कभी भी हरमन को ‘मैच विनर’ से कम नहीं माना।
“हरमन हमेशा से हमारी कप्तान होनी चाहिए”
अंजुम ने अंत में साफ कहा कि वह हमेशा से हरमनप्रीत कौर को भारत की कप्तान के तौर पर सही विकल्प मानती आई हैं।
अंजुम ने कहा, “पहले दिन से लेकर आज तक मैंने कभी नहीं सोचा कि हरमन टीम के लिए सही लीडर नहीं हैं। मैं हमेशा मानती रही हूं कि वह हमारी कप्तान होनी चाहिए।”
महिला वर्ल्ड कप जीतने के बाद टीम इंडिया ने यह साबित कर दिया कि एकजुट होकर खेलना किसी भी आलोचना से ज्यादा ताकतवर होता है। हरमनप्रीत कौर ने नेतृत्व में धैर्य, आत्मविश्वास और विजयी सोच का प्रदर्शन किया है। अंजुम चोपड़ा का समर्थन दिखाता है कि भारतीय महिला क्रिकेट के भीतर अब अनुभव और नई सोच का सही संतुलन बन चुका है।
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