भारतीय तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह भले ही टीम इंडिया की गेंदबाज़ी के सबसे बड़े हथियार हों, लेकिन उनकी फिटनेस और उपलब्धता को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
इंग्लैंड के खिलाफ हाल ही में खत्म हुई पांच टेस्ट मैचों की सीरीज़ में उन्होंने धमाकेदार शुरुआत करते हुए हेडिंग्ले में पांच विकेट झटके, लेकिन इसके बाद वह दूसरे टेस्ट से बाहर हो गए। फिर तीसरे और चौथे टेस्ट में खेले, लेकिन निर्णायक टेस्ट से पहले उन्हें स्क्वाड से रिलीज़ कर दिया गया।
मैनजमेंट ने साफ कहा कि यह फैसला उनकी फिटनेस और पुराने चोट के रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर लिया गया है। जनवरी में सिडनी में लगी चोट के बाद से ही बुमराह को लेकर टीम का रुख सतर्क रहा है।
चौथे टेस्ट के आखिरी दिन का खेल भले ही नहीं हुआ, लेकिन इसके बावजूद बुमराह को आखिरी मैच के दूसरे दिन ही टीम से बाहर कर दिया गया।
सीमित उपयोग में आ रहा है भारत का तुरुप का इक्का
बुमराह अब सफेद गेंद की द्विपक्षीय सीरीज़ों में भी बहुत कम नजर आते हैं। आखिरी बार उन्होंने सितंबर 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज़ में भाग लिया था। इसके बाद से उनका इस्तेमाल अधिकतर टेस्ट या बड़े टूर्नामेंटों में ही किया गया है।
वर्तमान हालात को देखते हुए माना जा रहा है कि बुमराह अब सीधे एशिया कप 2025 से टीम इंडिया के टी20 फॉर्मेट में लौट सकते हैं, अगर वह फिट रहते हैं।
ग्लेन मैक्ग्रा ने दी चेतावनी – “केवल टेस्ट तक सीमित करना होगा नुकसान”
ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज गेंदबाज़ ग्लेन मैक्ग्रा ने बुमराह की इस सीमित भागीदारी पर चिंता जताई है।
उन्होंने The Indian Express से बात करते हुए कहा कि, “आप चाहते हैं कि आपका सबसे अच्छा गेंदबाज़ हमेशा गेंदबाज़ी करे। अगर वह सिर्फ छोटे-छोटे स्पेल में गेंदबाज़ी करेगा तो बल्लेबाज़ टीम जान जाएगी कि बस कुछ ओवर निकालने हैं, उसके बाद रास्ता साफ है।”
मैक्ग्रा ने आगे कहा कि अगर बुमराह के साथ और तेज़ गेंदबाज़ अच्छे प्रदर्शन करें, तो उन पर बोझ कम पड़ेगा। लेकिन मौजूदा हालात में अगर उन्हें सिर्फ टेस्ट क्रिकेट तक सीमित किया गया तो यह भारतीय क्रिकेट के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
उनके अनुसार, “बुमराह वनडे और टी20 दोनों में बेहद प्रभावशाली हैं। ऐसे में उन्हें सिर्फ टेस्ट क्रिकेट तक सीमित करना एक अफसोस की बात होगी। हालांकि, आखिर में उन्हें खुद यह तय करना होगा कि उनके लिए सबसे बेहतर क्या है।”
क्या बुमराह की वर्कलोड मैनेजमेंट रणनीति सही है?
बुमराह की गेंदबाज़ी की शैली उनके शरीर पर ज्यादा असर डालती है। तेज़ रफ्तार, ऐक्शन में झटका और रन-अप का अनोखा अंदाज़ उन्हें बाकी गेंदबाज़ों से अलग बनाता है, लेकिन यही स्टाइल बार-बार चोटों का कारण भी बनता है। इसी वजह से टीम मैनेजमेंट उनके वर्कलोड को लेकर बेहद सतर्क है।
भारत के असिस्टेंट कोच रयान टेन डोएशेट के मुताबिक, “हमने बुमराह की गेंदबाज़ी लोड को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। यह एक रणनीतिक और भलाई के हिसाब से लिया गया फैसला है।”
बुमराह का सीमित उपयोग करना समाधान है या समस्या?
टीम इंडिया के लिए जसप्रीत बुमराह जैसा गेंदबाज़ नायाब संपत्ति हैं। लेकिन अगर वह लगातार चोटिल होते रहे या उन्हें ज़्यादा रोटेट किया गया, तो यह भारतीय तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण की धार को कमजोर कर सकता है।
ग्लेन मैक्ग्रा जैसे दिग्गज की राय इस बात का इशारा करती है कि भारत को सिर्फ एक गेंदबाज़ की फिटनेस के भरोसे नहीं रहना चाहिए, बल्कि एक मजबूत पूल तैयार करना चाहिए जो सभी फॉर्मेट्स में योगदान दे सके। बुमराह की प्रतिभा को संतुलन के साथ इस्तेमाल करना ही शायद सबसे बुद्धिमानी होगी।
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