Head Coach Amol Muzumdar Made India Women World Champions: महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 का फाइनल नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेला गया और टीम इंडिया ने इस मुकाबले में इतिहास रच दिया। भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराते हुए पहली बार किसी आईसीसी ट्रॉफी पर कब्जा किया। यह जीत सिर्फ एक टूर्नामेंट की जीत नहीं थी, बल्कि यह उन वर्षों की मेहनत, उम्मीद और संघर्ष की जीत थी जो भारतीय महिला खिलाड़ियों ने लगातार जारी रखी थी।
कई बार टीम इंडिया फाइनल तक पहुंची, सपने के करीब आई, लेकिन खिताब हाथ से निकल गया। इस बार हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारत ने मजबूती दिखाई और एक भी मौका हाथ से नहीं जाने दिया। हालांकि, यह सफलता सिर्फ मैदान में खेल रही खिलाड़ियों की वजह से नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे एक ऐसा चेहरा भी है, जिसकी कहानी उतनी ही प्रेरणादायक है। वह चेहरा है भारतीय महिला टीम के हेड कोच अमोल मजूमदार का, जिन्हें अपने करियर में वह इंसाफ कभी नहीं मिला जिसके वह हकदार थे।
कौन हैं भारतीय महिला क्रिकेट टीम के कोच
भारतीय महिला टीम की इस ऐतिहासिक जीत का श्रेय खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन के साथ सपोर्ट स्टाफ को भी जाता है। उस सपोर्ट स्टाफ में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका हेड कोच की होती है, जो टीम के खेल, रणनीति और मानसिकता को आकार देता है। महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 की यह उपलब्धि उसी मार्गदर्शन का नतीजा है जिसे कोच अमोल मजूमदार ने पिछले दो वर्षों में टीम के अंदर उतारा।
अमोल मजूमदार ने ऐसी सोच और आत्मविश्वास टीम में डाला जिसने खिलाड़ियों को दबाव में भी शांत रहकर प्रदर्शन करने की क्षमता दी। उन्होंने टीम को सिर्फ खेल सिखाया नहीं, बल्कि मैच पढ़ना और जीत के रास्ते ढूंढना भी सिखाया।
अमोल मजूमदार कौन हैं
अमोल मजूमदार भारत के पूर्व घरेलू क्रिकेटर हैं और इस समय उनकी उम्र 50 वर्ष है। उन्होंने अपने लंबे क्रिकेट करियर में रनों की इतनी बड़ी पूंजी जोड़ी कि उन्हें भारतीय घरेलू क्रिकेट का सबसे सफल बल्लेबाज माना जाता है। उनका अनुभव, स्थिरता और खेल की समझ महिला टीम के लिए वरदान साबित हुई।
घरेलू स्तर पर अमोल ने लगभग दो दशक तक क्रिकेट खेला और इस अवधि में कई दिग्गज खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा किया। सचिन तेंदुलकर जैसे महान बल्लेबाजों के साथ खेलने का अनुभव भी उनके करियर को मजबूत बनाता है।
कोच बनने का सफर कैसे शुरू हुआ
क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद अमोल मजूमदार ने कोचिंग को अपने करियर की दूसरी पारी के रूप में चुना। उन्होंने भारतीय अंडर 19 और अंडर 23 टीम के साथ बल्लेबाजी कोच के रूप में काम किया और युवा खिलाड़ियों को निखारने में बड़ी भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने नीदरलैंड क्रिकेट टीम के साथ बल्लेबाजी सलाहकार के रूप में अनुभव बढ़ाया।
साल 2018 में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें आईपीएल में अपना बैटिंग कोच नियुक्त किया। इसके अलावा वह कुछ समय दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट टीम के अंतरिम बैटिंग कोच भी रहे। अक्टूबर 2023 में बीसीसीआई ने उन्हें भारतीय महिला टीम का हेड कोच बनाया। उसी के बाद से उन्होंने टीम में विश्वास, अनुशासन और रणनीतिक सोच को नए स्तर पर पहुंचाया।
20 साल लंबा क्रिकेट करियर
मुंबई में 11 नवंबर 1974 को जन्मे अमोल ने 1993 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट करियर शुरू किया। वह मुंबई की ओर से घरेलू क्रिकेट में लगातार खेलते रहे और टीम को कई बार खिताब दिलाने में योगदान दिया। उन्होंने 2013 में आखिरी घरेलू लिस्ट A मैच खेला और इसके बाद क्रिकेट को अलविदा कह दिया।
उनके करियर में सबसे खास बात यह थी कि जितना ज्यादा खेला, उतने ज्यादा रन बनाए और लगातार बेहतर होते गए। उन्होंने कभी हार नहीं मानी और टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज बने रहे।
करियर के आंकड़े हैरान कर देंगे
अमोल मजूमदार के आंकड़े यह साबित करते हैं कि वह एक असाधारण बल्लेबाज थे। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 171 मैच खेलकर 11167 रन बनाए। इसमें 30 शानदार शतक और 60 अर्धशतक शामिल हैं। लिस्ट ए क्रिकेट में उन्होंने 106 पारियों में 3286 रन बनाए और इसमें 3 शतक और 26 अर्धशतक शामिल रहे।
करियर के अंत में उन्होंने टी20 क्रिकेट भी खेला जिसमें 14 मैचों में 174 रन बनाए और एक अर्धशतक लगाया। कुल मिलाकर अपने घरेलू क्रिकेट करियर में उन्होंने 33 शतक और 87 अर्धशतक की मदद से 14627 रन बनाए।
इतने रन और शतक, फिर भी टीम इंडिया से बाहर
यह बात कई क्रिकेट प्रेमियों को आज भी चुभती है कि इतने शानदार आंकड़ों के बावजूद अमोल मजूमदार को भारतीय टीम में एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। वह सचिन तेंदुलकर से लेकर राहुल द्रविड़ तक के युग में घरेलू क्रिकेट खेलते रहे, लेकिन चयन के मौके कभी उनके पक्ष में नहीं आए।
14627 रन और 33 शतक बनाकर भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए दर्दनाक अनुभव होता है। इसी अन्याय और निराशा के कारण उन्होंने संन्यास लिया और टीम इंडिया के लिए खेलने का सपना अधूरा रह गया।
एक सपना अधूरा, दूसरी पारी में पूरा हुआ नया सपना
हालांकि, अमोल मजूमदार खिलाड़ी के रूप में भारत के लिए नहीं खेल पाए, लेकिन कोच के रूप में उन्हें वह मौका मिला, जिसने उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी कमी को किसी हद तक पूरा कर दिया। मजूमदार ने महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 में टीम इंडिया को चैंपियन बनाकर देश के लिए ट्रॉफी जीतने का सपना पूरा किया।
यह जीत उनके लिए सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं थी, बल्कि दो दशक की मेहनत, संघर्ष और अधूरी इच्छा का जवाब थी। 50 साल की उम्र में उन्होंने साबित किया कि अगर हौसला और ईमानदारी हो, तो सपने किसी भी रूप में पूरे हो सकते हैं।
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