जानिए उन पांच मुकाबलों की कहानी जहां टीमों ने लिस्ट ए क्रिकेट में लक्ष्य का पीछा करते हुए क्रिकेट इतिहास में अविश्वसनीय रिकॉर्ड बनाए।
लिस्ट ए क्रिकेट में बड़ा लक्ष्य हासिल करना किसी भी टीम के लिए असली परीक्षा माना जाता है, क्योंकि 50 ओवर की सीमित गेंदें बल्लेबाजों को लगातार रन बनाने का दबाव देती हैं। इसके बावजूद कुछ मुकाबलों में बल्लेबाजों ने अपने कौशल, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर ऐसे बड़े लक्ष्य हासिल किए, जिन्हें देखकर फैंस आज भी रोमांचित हो उठते हैं। इन पलों में न सिर्फ रन बने, बल्कि साझेदारियों, बड़े शॉट्स और शांत दिमाग ने मिलकर मुकाबले को यादगार बना दिया।
इन पांच मुकाबलों में टीमों ने न सिर्फ रनों का पहाड़ गिराया, बल्कि मैच की कहानी को पूरी तरह बदल दिया। चाहे विदेशी दौड़ हो, घरेलू टूर्नामेंट हो या विश्वस्तरीय भिड़ंत, हर जगह बल्लेबाजों ने चुनौती को स्वीकार किया और इतिहास रच दिया। चलिए नजर डालते हैं उन टॉप 5 मुकाबलों पर, जो आज भी सबसे बड़े सफल रन चेज के रूप में याद किए जाते हैं।
ये हैं लिस्ट A क्रिकेट में अब तक हुए टॉप 5 सबसे बड़े सफल रन चेज
5. मिडलसेक्स – 390/5 बनाम डरहम, चेस्टर-ले-स्ट्रीट (2025)
2025 के अंग्रेजी वनडे कप में मिडलसेक्स ने डरहम के खिलाफ 387 रनों के लक्ष्य को हासिल करते हुए सभी को हैरान कर दिया। इस लक्ष्य के सामने किसी भी टीम का आत्मविश्वास डगमगा सकता था, लेकिन मिडलसेक्स ने शुरुआत से ही सकारात्मक बैटिंग करते हुए मैच को नियंत्रण में रखा। दिन बल्लेबाजी के लिए शानदार था और टीम ने इसका फायदा उठाते हुए लगातार बाउंड्री निकाली।
इस ऐतिहासिक पीछा करते समय सैम रॉबसन ने 169 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम को मजबूती से आगे बढ़ाया। पूरी टीम की रन बनाने की निरंतरता और दबाव में शांत रहने की कला ने इस चेज को लिस्ट ए इतिहास के बेहतरीन मुकाबलों में शामिल कर दिया।
4. कराची रीजन – 392/2 बनाम सियालकोट रीजन, सियालकोट (2004)
2004 के कायद-ए-आज़म कप में कराची रीजन ने सियालकोट रीजन के खिलाफ 392 रनों के लक्ष्य को बड़े आराम से हासिल किया। सियालकोट की सपाट पिच पर जहां गेंदबाजों को मदद नहीं मिल रही थी, वहीं कराची के बल्लेबाजों ने अपने शॉट्स को पूरी ताकत से खेलते हुए मुकाबले को एकतरफा बना दिया। यह रन चेज टीम के आत्मविश्वास और पिच की समझ का नतीजा रहा।
असिफ जाकिर के शतक ने शुरुआती नींव रखी और फिर हसन रजा ने 34 गेंदों में 74 रन जड़कर रनगति को तेज किया। बाद में फैजल इकबाल ने शतक पूरा करते हुए टीम को जीत तक पहुंचाया और सिर्फ गेंदों का पीछा नहीं किया बल्कि मैच को अपने नियंत्रण में रखा। यह चेज आज भी पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेट की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।
3. क्वींसलैंड – 402/3 बनाम तस्मानिया, सिडनी (2014)
2014 में नॉर्थ सिडनी ओवल के मैदान पर क्वींसलैंड ने तस्मानिया के 399 रनों के लक्ष्य को आसानी से चेज कर लिया। इस मुकाबले में तस्मानिया के लिए बेन डंक ने दोहरा शतक जड़ा, जिससे मैच उनकी पकड़ में लगता था, लेकिन क्वींसलैंड के बल्लेबाजों ने मैच को पूरी तरह बदल दिया। टीम ने शुरुआत से ही तेजी बनाए रखी और हर ओवर में रन बनाते रहे।
उस्मान ख्वाजा और क्रिस हार्टली ने मिलकर 280 रनों की साझेदारी कर मैच को एकतरफा मोड़ दे दिया। दोनों बल्लेबाजों ने शतक बनाकर रनगति भी बनाए रखी और 16 गेंदें शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया। यह चेज दिमागी संतुलन, शॉट चयन और साझेदारी के महत्व की सबसे बड़ी मिसाल है।
2. कर्नाटक – 413/5 बनाम झारखंड, अहमदाबाद (2025)
भारत की घरेलू क्रिकेट में यह मुकाबला 2025-26 विजय हजारे ट्रॉफी के पहले राउंड में खेला गया, जहां कर्नाटक ने 412 रनों के लक्ष्य को हासिल करते हुए हर किसी को चौंका दिया। झारखंड की तरफ से ईशान किशन ने सिर्फ 33 गेंदों में शतक जड़कर मैच का रुख निर्धारित किया था, लेकिन कर्नाटक ने जवाब में उससे भी तेज गति दिखाई।
देवदत्त पडिक्कल ने 118 गेंदों में 147 रन बनाकर शुरुआत को मजबूत किया और टीम के बाकी बल्लेबाजों ने भी योगदान देकर रनगति को कभी नहीं गिरने दिया। कर्नाटक ने 47.3 ओवर में लक्ष्य हासिल करके दिखाया कि सही योजना, धैर्य और साझेदारी बड़े लक्ष्य को आसान बना सकती है।
1. दक्षिण अफ्रीका – 438/9 बनाम ऑस्ट्रेलिया, जोहान्सबर्ग (2006)
लिस्ट ए क्रिकेट का सबसे महान रन चेज 2006 में दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किया, जिसे आज भी क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाता है। यह पांच मैचों की सीरीज का निर्णायक मुकाबला था और यहां ऑस्ट्रेलिया ने कप्तान रिकी पोंटिंग की 164 रन की धधकती पारी के दम पर 434 रन बना दिए। इस लक्ष्य को देखकर किसी भी टीम के हौसले टूट सकते थे।
लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और ग्रीम स्मिथ ने 55 गेंदों में 90 रन बनाकर गति पकड़ाई। इसके बाद हरशेल गिब्स ने 111 गेंदों में 175 रन जड़ते हुए मैच को दक्षिण अफ्रीका के पाले में खींच लिया। मुकाबला आखिरी ओवर तक पहुंचा जहां मार्क बाउचर ने शांत दिमाग से चौका लगाकर टीम को एक विकेट से यादगार जीत दिलाई। यह रन चेज सिर्फ एक जीत नहीं था बल्कि क्रिकेट की सीमाओं को चुनौती देने की मिसाल बन गया।
इन पांच मुकाबलों ने साबित किया कि लिस्ट ए क्रिकेट में बड़ा लक्ष्य असंभव नहीं होता, बल्कि सही शुरुआत, समझदारी और साझेदारियां किसी भी लक्ष्य को आसान बना सकती हैं। बल्लेबाजों के आत्मविश्वास, रनगति बनाए रखने की क्षमता और टीमवर्क के कारण ये मैच हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो गए। आने वाले वर्षों में कोई भी टीम जब बड़े लक्ष्य का पीछा करेगी तो इन मुकाबलों की प्रेरणा उसे लड़ने और जीतने का हौसला देगी।
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