Friday, February 20

टीम इंडिया के टेस्ट कप्तान शुभमन गिल जब भी पिच पर उतरते हैं, कोई न कोई कीर्तिमान जरूर बनाते हैं। उनके टैलेंट की चर्चा तो शुरुआत से ही थी, लेकिन उसे प्रदर्शन में भी तब्दील करना पड़ता है।

जो उन्होंने बखूबी करके दिखाया है, जिसके चलते वो इस समय तीनों फॉर्मेट में खेलने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में से हैं। रिकॉर्ड्स के बाज़ीगर बने शुभमन गिल के क्रिकेटर बनने की कहानी काफी रोचक है। एक साधारण किसान का बेटा टीम इंडिया के लिए रन मशीन बन गया है।

4 साल की उम्र में शुरू किया क्रिकेट खेलना

How 100 Rupees Bet Made Shubman Gill Star Player
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आपको बता दें कि शुभमन ने 4 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। उनका जन्म पंजाब के फाजिल्का जिले के चक खेरेवाला गांव में हुआ था और वो बचपन में अपने पिता के साथ इस खेल को खेला करते थे। जब गिल बड़े हो रहे थे तो उनके पिता ने अपने बेटे की प्रतिभा को और ज्यादा निखारने के लिए एक शानदार प्लान बनाया।

शुभमन को आउट करने पर 100 रुपये इनाम मिलता

शुभमन के पिता ने अपने खेत को ग्राउंड की तरह बना दिया और उसके बाद उन्होंने शर्त रखी कि जो भी उसे आउट करेगा, उसे वह 100 रुपये इनाम देंगे।

वो कई सालों तक टेनिस बॉल से ही क्रिकेट खेले थे, लेकिन गिल का सामना लेदर बॉल से तब हुआ जब उनका परिवार जलालाबाद शिफ्ट हुआ। उन्होंने काफी समय तक वहां पर छोटी सी ट्रेनिंग जरूर ली थी, लेकिन अभी वो पूरी तरह से पके नहीं थे और अभी भी बहुत सी चीजें थीं जो उनको सीखनी बाकी थीं।

मोहाली स्टेडियम के पास लिया एडमिशन

शुभमन बारीकी से क्रिकेट सीख पाएं, इसके लिए उनके पिता ने उन्हें चंडीगढ़ भेजा और उनका एडमिशन मोहाली स्टेडियम के पीछे वाली अकादमी में करा दिया। ताकि उनको वहां पर खेलने का ज्यादा समय मिल सके और उसके साथ उनका परिवार भी वहां पर शिफ्ट हो गया।

शुभमन रोज सुबह 3:30 बजे उठते थे और 4 बजे तक अकादमी पहुंच जाया करते थे। वो दिनभर प्रैक्टिस करने के बाद शाम को घर वापस आ जाया करते थे। यही नहीं, वो शाम के समय ट्रेनिंग देखने के लिए भी अपने पिता के साथ जाते थे।

करसन घावरी ने पहचाना शुभमन का टैलेंट

टीम इंडिया के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ करसन घावरी यंग टैलेंट की पहचान के लिए पंजाब गए हुए थे। हालांकि वहां पर वो सिर्फ तेज़ गेंदबाज़ की तलाश में गए थे, लेकिन उन्हें वहां एक ऐसा टैलेंटेड खिलाड़ी दिखा जो आगे चलकर दुनियाई क्रिकेट पर राज करने वाला था।

दरअसल पीसीए क्रिकेट स्टेडियम मोहाली में वो 18-19 साल के गेंदबाज़ों की खोज में आए थे। जिसके लिए उन्होंने पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन से कुछ बल्लेबाज़ मांगे थे।

गीली पिच पर भी शुभमन ने की शानदार बैटिंग

हालांकि ट्रायल वाले दिन बारिश हो रही थी, जिसके चलते वो और उनके असिस्टेंट कोच टहलने निकल गए। वहीं पर पास ग्राउंड में बारिश के बीच भी 10-12 साल के लड़के खेल रहे थे। पिच गीली होने के बाद भी मैच नहीं रोका गया और उस बल्लेबाज़ ने वहां भी अच्छी बल्लेबाज़ी की।

ग्राउंड के पास पेड़ के नीचे एक आदमी खड़े हुए थे। जिनसे मैंने पूछा कि यह लड़का कौन है? तो उन्होंने बताया कि यह मेरा बेटा शुभमन गिल है, जो कि अभी 12 साल का है। करसन घावरी ने उनसे कहा कि कल आप उसको मोहाली स्टेडियम में प्रैक्टिस के लिए भेज देना।

ट्रायल्स में शुभमन ने सभी को प्रभावित किया

अगले दिन ट्रायल्स के दौरान शुभमन ने अपनी बल्लेबाज़ी से सभी को काफी इम्प्रेस किया, जिसके बाद उन्हें एज ग्रुप क्रिकेट और फिर अंडर-19 टीम में भी जल्द जगह बनाने में सफलता मिली। हालांकि उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब वो इस समय दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाज़ों में से हैं।

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आकाश अवस्थी स्पोर्ट्स डाइजेस्ट हिंदी में बतौर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और स्पोर्ट्स जर्नलिज्म में दो वर्षों का अनुभव रखते हैं। इससे पहले वे इंडिया न्यूज़ और स्पोर्ट्सविकी जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम कर चुके हैं। क्रिकेट, कबड्डी और अन्य खेलों की बारीकियों को गहराई से समझना और उन्हें आसान व रोचक अंदाज में पाठकों तक पहुंचाना उनकी खासियत है। खेल जगत के साथ साथ पॉलिटिक्स की हर हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है।

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