Friday, March 20

How Jemimah Rodrigues scripted India Women’s winning act against Australia Women: नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में गुरुवार की शाम भारतीय महिला टीम ने वह कर दिखाया, जिसकी उम्मीद हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी कर रहा था। Women’s World Cup 2025 के सेमीफाइनल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर न केवल फाइनल में प्रवेश किया बल्कि बीते कई सालों से चले आ रहे दर्द को भी खत्म किया। यह जीत किसी एक खिलाड़ी की नहीं बल्कि पूरी टीम के धैर्य, रणनीति और विश्वास की मिसाल थी।

ऑस्ट्रेलिया के 338 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत अच्छी रही, लेकिन जब कप्तान हरमनप्रीत कौर आउट हुईं तो स्कोरबोर्ड पर दबाव बढ़ने लगा। उस वक्त भारत को 88 गेंदों में 113 रन चाहिए थे और थकी हुई लेकिन दृढ़ निश्चय के साथ खेल रहीं जेमिमाह रोड्रिग्स मैदान पर मौजूद थीं। उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा और यह तय किया कि इतिहास इस बार बदलेगा।

दीप्ति शर्मा ने संभाली जिम्मेदारी

इस अहम मौके पर दीप्ति शर्मा मैदान पर उतरीं और उन्होंने वह किया जो टीम को उस वक्त सबसे ज्यादा चाहिए था। उन्होंने शुरुआत में धैर्य से बल्लेबाज़ी की और फिर जरूरी समय पर बड़े शॉट लगाए। दीप्ति ने 17 गेंदों पर 24 रन बनाए और अपने छोटे से योगदान से रन रेट को संभाला। उनके शॉट्स में आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। उन्होंने मैदान के हर कोने में गेंदें भेजीं ताकि जेमिमाह को सांस लेने का मौका मिल सके।

ऋचा घोष का ताबड़तोड़ खेल और मैच का टर्निंग पॉइंट

भारत को जब 9 ओवर में 75 रन चाहिए थे तब ऋचा घोष मैदान पर आईं। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और मेगन शट की स्लोअर गेंद को सीधे साइटस्क्रीन के पार भेजकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इसके बाद ऐश गार्डनर के ओवर में 83 मीटर लंबा छक्का उनके आत्मविश्वास का सबूत था।

उस समय ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों पर दबाव बन चुका था, लेकिन सडरलैंड ने ऋचा को आउट कर मैच में थोड़ी देर के लिए रोमांच वापस ला दिया।

इंग्लैंड से मिली हार का सबक बना जीत की कुंजी

ऋचा के आउट होने के बाद अब अमनजोत कौर की जिम्मेदारी थी। यह वही खिलाड़ी थीं, जिन्हें इंग्लैंड के खिलाफ मैच में जीत दिलाने का मौका मिला था, लेकिन वे असफल रहीं। इस बार वह गलती दोहराना नहीं चाहती थीं।

जब अमनजोत मैदान में आईं तो उन्होंने जेमिमाह से पूछा कि क्या उन्हें अटैक करना चाहिए या पहले सेट होना चाहिए। जेमिमाह ने मुस्कुराते हुए कहा कि दोनों मिलकर काम करेंगे और रन निकाल लेंगे। वह आत्मविश्वास से भरी बातचीत टीम की सोच को दर्शाता था।

जीत की स्क्रिप्ट लिखने वाली साझेदारी

सडरलैंड के अगले ओवर में जेमिमाह ने शानदार शॉट खेले। उन्होंने स्कूप, कट और कवर ड्राइव से लगातार रन बनाए और एक ही ओवर में 15 रन बटोरे। अब जीत पूरी तरह भारत की मुट्ठी में थी। आखिरी दो ओवर में सिर्फ आठ रन चाहिए थे और अमनजोत ने अपनी पारी में वह खत्म करने की ठानी। उन्होंने लगातार दो चौके और एक डबल लेकर मैच को खत्म कर दिया। भारत ने लक्ष्य को एक ओवर पहले हासिल कर लिया और पूरे स्टेडियम में खुशी की लहर दौड़ गई।

जेमिमाह रोड्रिग्स बनीं भारत की नई फिनिशर

जेमिमाह रोड्रिग्स ने इस मैच में न सिर्फ टीम को संकट से निकाला, बल्कि अपनी परिपक्वता से सभी को प्रभावित किया। उन्होंने दूसरे ओवर से लेकर आखिरी गेंद तक बल्लेबाज़ी की और गर्मी व दबाव दोनों से जूझते हुए टीम को जीत तक पहुंचाया। मैच के बाद उन्होंने कहा कि “ऑस्ट्रेलिया को हराने का अलग ही मजा है।”

अमनजोत ने भी अपनी साथी की तारीफ करते हुए कहा कि जेमिमाह का संयम और आत्मविश्वास ही असली फर्क लेकर आया। उन्होंने बताया कि दोनों ने तय किया था कि वे आखिरी ओवर से पहले ही मैच खत्म कर देंगी और वैसा ही हुआ।

इतिहास बदलने वाली जीत

इस जीत से भारत ने न केवल वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई, बल्कि यह साबित कर दिया कि टीम अब दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है। इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार ने उन्हें सिखाया कि मैच को कब खत्म करना है और कब संयम रखना है। अब वह इसी आत्मविश्वास के साथ रविवार को होने वाले फाइनल में लेकर जाएंगी।

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Neetish Kumar Mishra Sports Digest Hindi में Editor के रूप में कार्यरत हैं और खेल पत्रकारिता में गहरा अनुभव रखते हैं। क्रिकेट, टेनिस, फुटबॉल और अन्य खेलों की बारीकियों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है।

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