साउथ अफ्रीका ने घर के बाहर वनडे क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा रन चेज किया।
भारत और साउथ अफ्रीका के बीच रायपुर में खेला गया दूसरा वनडे दर्शकों को आखिरी ओवर तक रोमांचित करता रहा और अंत में मुकाबला साउथ अफ्रीका के नाम रहा। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 358 रन बनाए, जो किसी भी दिन जीत दिलाने वाला स्कोर माना जाता है, लेकिन अफ्रीका के बल्लेबाजों ने अपने इरादे साफ रखते हुए लक्ष्य का पीछा लगातार तेज गति से किया। यह मैच इसलिए भी खास बन गया क्योंकि साउथ अफ्रीका ने घर से बाहर अपना सबसे बड़ा रन चेज पूरा किया और सीरीज को 1-1 की बराबरी पर ला दिया।
दिमाग में यही सवाल बार बार आता रहा कि आखिर 358 जैसा बड़ा स्कोर भी भारत के हाथ क्यों नहीं लगा, जबकि विराट कोहली, रुतुराज गायकवाड़ और केएल राहुल ने मिलकर बल्लेबाजी की चमक बिखेर दी। जैसे जैसे दूसरी पारी आगे बढ़ती गई वैसे वैसे अफ्रीकी बल्लेबाजों ने मैच को अपनी पकड़ में लेना शुरू कर दिया और भारतीय गेंदबाजों को लगातार दबाव में रखते हुए मैच के रुख को पलट दिया।
कोहली और गायकवाड़ ने दिखाया क्लास, भारत ने बनाया 358 रन का विशाल स्कोर
भारतीय पारी की शुरुआत तेज गति से हुई लेकिन पावरप्ले में दो विकेट गिरने से थोड़ी सावधानी भी दिखाई दी। रोहित शर्मा 14 रन बनाकर आउट हुए, जबकि यशस्वी जायसवाल 22 रन पर पवेलियन लौटे। इसके बाद विराट कोहली और रुतुराज गायकवाड़ ने मिलकर भारतीय पारी को स्थिर किया और दोनों ने शानदार शतक जड़ते हुए साउथ अफ्रीका के गेंदबाजों पर दबाव बना लिया।
कोहली ने 93 गेंदों पर 102 रन बनाए और इस दौरान उनके शॉट चयन ने एक बार फिर साबित किया कि क्यों वह दबाव के समय भरोसे का नाम हैं। दूसरी ओर रुतुराज गायकवाड़ ने 83 गेंदों पर 105 रन ठोकते हुए अपने करियर की शानदार पारियों में से एक खेली। इन दोनों की 195 रन की साझेदारी ने भारत को मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया और ऐसा लगा कि टीम 360 से ऊपर जाएगी।
अंत के ओवरों में केएल राहुल ने 66 रन की तेजतर्रार पारी खेलकर स्कोर को 358 तक पहुंचाया। हालांकि, भारतीय बल्लेबाजों ने फिर भी कुछ ओवर शांत गंवा दिए और 380 तक पहुंचने का मौका हाथ से निकल गया। अफ्रीकी गेंदबाजों में मारको जानसन ने दो विकेट लिए, जबकि बाकी गेंदबाज काफी महंगे साबित हुए।
दूसरी पारी में मार्कराम, ब्रीट्जके और ब्रेविस ने बदला मैच का नक्शा
359 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी साउथ अफ्रीका की शुरुआत सामान्य रही लेकिन शुरुआती ओवर में डी कॉक का विकेट गिरने के बाद कप्तान टेम्बा बावुमा और एडेन मार्कराम ने पारी को संभाला। बावुमा 46 रन बनाकर आउट हुए लेकिन तब तक वह मार्कराम के साथ 100 रन जोड़ चुके थे।
मैच का असली मोड़ तब आया जब मार्कराम ने भारतीय गेंदबाजों को लगातार निशाना बनाना शुरू किया और 98 गेंदों पर 110 रन की कप्तानी पारी खेली। उनके शॉट्स में मजबूती और आत्मविश्वास दोनों साफ दिखाई दे रहे थे और उन्होंने बीच के ओवरों में मैच को पूरी तरह पलट दिया।
इसके बाद मैथ्यू ब्रीट्जके और डेवाल्ड ब्रेविस ने रन गति को तेज करते हुए भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बढ़ा दिया। ब्रीट्जके ने 68 रन बटोरे, जबकि ब्रेविस ने 34 गेंदों पर 54 रन की धमाकेदार पारी खेली। इन दोनों ने मिलकर रन चेज को आसान बना दिया और 49.2 ओवर में मैच खत्म कर दिया।
भारतीय गेंदबाजी इस मैच में बेहद फीकी दिखाई दी। प्रसिध कृष्णा और अर्शदीप सिंह ने दो दो विकेट जरूर निकाले लेकिन रन रोकने में कोई भी सफल नहीं हो पाया। यहां तक कि कुलदीप यादव भी महंगे साबित हुए और बीच के ओवरों में भारत को कोई राहत नहीं दिला सके।
मैच का निर्णायक मोमेंट
मैच का सबसे बड़ा मोड़ 30वें से 42वें ओवर के बीच आया जब साउथ अफ्रीका ने इस अवधि में 120 से अधिक रन जोड़ दिए। भारतीय गेंदबाज लाइन-लेंथ नहीं साध पाए और यहीं से रन चेज आसान दिखने लगा।
इसके साथ ही भारतीय टीम की फील्डिंग भी औसत रही और दो तीन मौकों पर कैच तथा मिसफील्ड ने दबाव बढ़ा दिया। धीमी ओवर गति के कारण अतिरिक्त फील्डर को सर्कल के अंदर लाना भी भारत के खिलाफ गया।
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