Wednesday, June 10

एशेज 2025 का दूसरा मैच शुरू होने वाला है। यह मैच ब्रिस्बेन के द गाबा में खेला जाना है। इस मुकाबले के लिए दोनों टीमें तैयारी में जुटी हुई हैं। इंग्लैंड ने इस अहम मैच से पहले अपनी प्लेइंग इलेवन का भी ऐलान कर दिया, जबकि ऑस्ट्रेलिया की टीम को लगातार चोटों ने परेशान कर रखा है। कमिंस, हेज़लवुड और उसके बाद अब ख्वाजा भी बाहर हो गए हैं।

उसके बाद भी ऑस्ट्रेलियाई टीम कमजोर नहीं हुई है। कप्तान स्टीव स्मिथ पूरी तरह से तैयारी में जुटे हुए हैं। हालाँकि इस बार उनकी तैयारी कुछ खास है। क्योंकि यह मुकाबला डे-नाइट टेस्ट है और इसमें पिंक बॉल का प्रयोग होना है। तो इसकी प्रैक्टिस के लिए ऑस्ट्रेलियाई कप्तान आई ब्लैक का इस्तेमाल कर रहे हैं। तो चलिए जानते हैं कि यह आई ब्लैक क्या होता है और इसका यूज क्यों किया जाता है।

क्या है आई ब्लैक?

Ashes 2025-26: Why Steve Smith Wearing Eye Black
Ashes 2025-26: Why Steve Smith Wearing Eye Black

आई ब्लैक एक पतला, लचीला चिपकने वाला पैच होता है जिसे आँखों के नीचे, ऊपरी गाल पर लगाया जाता है। इन्हें खिलाड़ी की आँखों में नीचे और किनारों से आने वाली रोशनी की मात्रा को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह वह एरिया होता है जहाँ रोशनी का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है, इसलिए इसका प्रयोग किया जाता है।

अमेरिकी फ़ुटबॉल और बेसबॉल में भी आई ब्लैक का इस्तेमाल काफी ज्यादा किया जाता है। क्योंकि ये खेल बड़े और काफी चमकदार स्टेडियम में खेले जाते हैं। यही नहीं, इनमें तेज़ गेंद या खिलाड़ी की गति के साथ हाई-इंटेंसिटी की फ्लडलाइट्स का प्रयोग होता है। आई ब्लैक इसलिए मददगार होते हैं क्योंकि यह गहरे रंग की रोशनी को फैलाने के बजाय उसे कम करने का प्रयास करते हैं।

पिंक बॉल के लिए आई ब्लैक क्यों है फायदेमंद?

पिंक गेंद रेड गेंद से अलग व्यवहार करती है। यह अंतर काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि वह लाइट के साथ कैसा रिएक्शन करती है। पिंक बॉल पर एक्स्ट्रा कोटिंग की जाती है ताकि रात में वह ज्यादा विजिबल हो सके। लेकिन इस बॉल से खेले जाने वाले टेस्ट मैच में खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ट्वाइलाइट पीरियड होता है।

सूर्यास्त के बाद के 20–30 मिनट के दौरान, जब सूरज की रोशनी जा रही होती है और फ्लडलाइट्स पूरी तरह से प्रभावी नहीं होतीं, तब पिंक बॉल को खेलना काफी मुश्किल हो जाता है। यही वह समय होता है जब अधिकांश बल्लेबाज़ कहते हैं कि वे एक पल के लिए गेंद को “खो” देते हैं। उनके गालों पर रिफ्लेक्ट होने वाली चमक समस्या को और बढ़ा देती है, जब गेंद सबसे ज्यादा स्विंग कर रही होती है।

क्यों स्टीव स्मिथ कर रहे हैं आई ब्लैक का यूज?

स्टीव स्मिथ ने 14 में से 13 गुलाबी गेंद वाले टेस्ट मैच खेले हैं, लेकिन इन मैचों में उनका रिकॉर्ड सामान्य रहा है। उन्होंने 37.04 की औसत से 815 रन बनाए हैं। 36 वर्षीय बल्लेबाज़ ने स्वीकार किया है कि पिंक बॉल टेस्ट मैचों की चुनौतियाँ अलग होती हैं और यह गेंद भी लाल गेंद से अलग व्यवहार करती है।

सामान्य तौर पर, पिंक बॉल से मैच बिल्कुल अलग गेम हो जाता है। निजी तौर पर, मुझे दिन के कुछ खास समय पर गेंद को पिक करना बहुत मुश्किल हो जाता है। और यह बॉल जिस तरह से व्यवहार करती है वह रेड बॉल से बिल्कुल अलग है। इसलिए उन्होंने ट्वाइलाइट पीरियड में आने वाली रोशनी की समस्या से बचने के लिए आई ब्लैक का प्रयोग करना शुरू किया है।

चंद्रपॉल ने बताया है आई ब्लैक का फायदा

वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज़ शिवनारायण चंद्रपॉल भी आई ब्लैक के साथ बल्लेबाजी करने के लिए मशहूर थे। 51 वर्षीय इस खिलाड़ी ने कहा कि पैच के इस्तेमाल से उन्हें अपनी आँखों से चमक का एक बड़ा हिस्सा हटाने में मदद मिली। उन्होंने 2018 में गल्फ न्यूज़ को बताया, “जब भी बहुत ज्यादा चमक होती थी, मैं हमेशा इसका इस्तेमाल करता था। मैं इसे लगाता हूँ, और इससे मेरी आँखों से 60–70 प्रतिशत चमक हट जाती है, और यह मेरे लिए अच्छा रहा।

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आकाश अवस्थी स्पोर्ट्स डाइजेस्ट हिंदी में बतौर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और स्पोर्ट्स जर्नलिज्म में दो वर्षों का अनुभव रखते हैं। इससे पहले वे इंडिया न्यूज़ और स्पोर्ट्सविकी जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम कर चुके हैं। क्रिकेट, कबड्डी और अन्य खेलों की बारीकियों को गहराई से समझना और उन्हें आसान व रोचक अंदाज में पाठकों तक पहुंचाना उनकी खासियत है। खेल जगत के साथ साथ पॉलिटिक्स की हर हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है।

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